झारखण्ड-बिहार का 10 लाख का इनामी खूंखार माओवादी मुंबई में गिरफ्तार,महाराष्ट्र ATS ने दो दशक से फरार नक्सली संजय गोदराय को दबोचा; 50 से अधिक बड़े हमलों में रहा है आरोपी

 

–झारखण्ड-बिहार के कुख्यात माओवादी नितेश यादव का करीबी है संजय गोदराय, कई बड़े नक्सली हमलों में रही है संलिप्तता; गिरफ्तारी के बाद पलामू लाने की तैयारी में जुटी पुलिस

पलामू/ठाणे। झारखण्ड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बीच सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। झारखण्ड सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का इनामी घोषित कुख्यात माओवादी संजय गोदराय उर्फ संजय यादव को महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने मुंबई से सटे ठाणे जिले के ठाकुर्ली इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। संजय गोदराय की गिरफ्तारी को झारखण्ड-बिहार में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह पिछले करीब दो दशक से झारखण्ड और बिहार के जंगलों में पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।

गिरफ्तार माओवादी की पहचान 45 वर्षीय संजय सरोज यादव उर्फ संजय गोदराय उर्फ बुधराम के रूप में हुई है। वह झारखण्ड के पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत देवगन गांव का रहने वाला बताया गया है। झारखण्ड सरकार ने उसकी गिरफ्तारी से संबंधित सूचना देने पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। अधिकारियों के मुताबिक, वह पिछले करीब 10 दिनों से कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ठाकुर्ली इलाके में छिपा हुआ था। महाराष्ट्र ATS ने उसे गिरफ्तार करने के बाद झारखण्ड पुलिस को सौंप दिया है।ये गिरफ्तारी झारखण्ड पुलिस की इनपुट पर हुई है।

 नितेश यादव का बेहद करीबी, माओवादी दस्ते का अहम सदस्य

संजय गोदराय माओवादी संगठन में जोनल कमांडर की भूमिका निभा चुका है। वह झारखण्ड-बिहार के कुख्यात माओवादी नितेश यादव का बेहद करीबी माना जाता है और उसके दस्ते का अहम सदस्य रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, झारखण्ड और बिहार में माओवादी संगठन की कई बड़ी हिंसक घटनाओं में उसकी भूमिका रही है। उस पर 50 से अधिक बड़े नक्सली हमलों में शामिल होने का आरोप है। लंबे समय से उसकी तलाश में झारखंड और बिहार की पुलिस लगातार अभियान चला रही थी।

संजय की गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि झारखण्ड में बचे बड़े इनामी माओवादियों में उसका नाम शामिल था। सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों और नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही थीं, लेकिन वह बार-बार पुलिस की पकड़ से बच निकलने में सफल रहा था।

कई बड़े नक्सली हमलों में रहा है आरोपी

संजय गोदराय का नाम झारखण्ड और बिहार में हुई कई बड़ी नक्सली वारदातों में सामने आया है। वर्ष 2013 में पलामू जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र में माओवादियों ने टीएसपीसी के 15 कमांडरों की हत्या कर दी थी। इस सामूहिक हत्याकांड में भी संजय गोदराय आरोपी रहा है।

वर्ष 2016 में बिहार के गया और औरंगाबाद जिले के सीमावर्ती इलाके में माओवादियों ने कोबरा बटालियन की टीम पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना में भी संजय गोदराय की संलिप्तता का आरोप है।इसी वर्ष पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के काला पहाड़ इलाके में माओवादियों ने लैंडमाइन विस्फोट कर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया था। इस भीषण विस्फोट में सात जवान शहीद हुए थे। इस घटना में भी संजय गोदराय आरोपी बताया जाता है। इन घटनाओं के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसकी गिरफ्तारी बेहद अहम हो गई थी।

2025 में पुलिस मुठभेड़ से बचकर निकला था संजय

27 मई 2025 को पलामू के हुसैनाबाद और पांडु थाना क्षेत्र की सीमावर्ती इलाके में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ के दौरान संजय गोदराय पुलिस की पकड़ में आने से बच निकला था। इसके बाद झारखण्ड और बिहार की सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज कर दिया था। लगातार उसकी तलाश की जा रही थी।

मुंबई में छिपने का क्या था मकसद, संपर्कों की होगी जांच

महाराष्ट्र ATS अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि संजय यादव महाराष्ट्र क्यों पहुंचा था और ठाकुर्ली इलाके में उसे किसने पनाह दी थी। उसके स्थानीय संपर्कों और संभावित मददगारों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह महाराष्ट्र में किसी बड़ी योजना के तहत पहुंचा था या गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां छिपा हुआ था।

पलामू लाने के लिए पुलिस की विशेष टीम मुंबई रवाना

संजय गोदराय को पलामू लाने के लिए झारखण्ड पुलिस की विशेष टीम मुंबई पहुंच चुकी है। पहले उसे मुंबई की अदालत में पेश किया जाएगा। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस उसे पलामू लेकर आएगी। इसके बाद उसे पलामू न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

कुल मिलाकर, झारखण्ड-बिहार में लंबे समय से सक्रिय और 10 लाख रुपये के इनामी माओवादी संजय गोदराय की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब पुलिस की नजर उसके नेटवर्क, माओवादी संगठन के अन्य सदस्यों और पुराने नक्सली हमलों से जुड़े राज खोलने पर होगी।

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