राँची में कार रेंटल के नाम पर लाखों का खेल: महिला समेत तीन गिरफ्तार, किराये पर ली महंगी गाड़ियां; फर्जी कागजात बनाकर 3 से 5 लाख में रखीं गिरवी

 

स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और बोलेरो को बनाया ठगी का हथियार, पहले किराया देकर जीता वाहन मालिकों का भरोसा फिर गाड़ियों को दूसरे के पास किया गिरवी; 20 से 25 लोगों के ठगी का शिकार होने की आशंका

राँची। राजधानी राँची में कार रेंटल के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। यहां शातिर तरीके से ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों को निशाना बनाया जा रहा था। गिरोह की एक महिला सदस्य पहले वाहन मालिकों से संपर्क करती, फिर स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और बोलेरो जैसी महंगी गाड़ियां किराए पर लेती थी। शुरुआत में नियमित किराया देकर वाहन मालिकों का विश्वास जीता जाता था। जब भरोसा कायम हो जाता, तो फर्जी एग्रीमेंट और एनओसी के सहारे उन्हीं गाड़ियों को दूसरे लोगों के पास तीन से पांच लाख रुपये में गिरवी रख दिया जाता था।

इस पूरे खेल का खुलासा होने के बाद ओरमांझी थाना पुलिस ने एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ज्योति कुमारी, विश्वजीत कुमार सिंह और मनोज कुमार के रूप में हुई है। पुलिस की शुरुआती जांच में करीब 20 से 25 लोगों के इस धोखाधड़ी का शिकार होने की आशंका जतायी जा रही है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गिरोह ने कई वाहन मालिकों और ट्रैवल एजेंसियों को अपने जाल में फंसाया था।

पहले भरोसा जीतो, फिर महंगी गाड़ियों को गिरवी रखकर रकम वसूलो

पुलिस की जांच में ठगी का तरीका बेहद शातिराना सामने आया है। बताया जा रहा है कि ज्योति कुमारी इस गिरोह में वाहन मालिकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी संभालती थी। वह अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों से बातचीत कर महंगी गाड़ियां किराए पर लेती थी। शुरुआत में वाहन का निर्धारित किराया समय पर दिया जाता था, ताकि मालिकों को किसी तरह का संदेह न हो।कुछ समय तक सबकुछ सामान्य चलने के बाद गिरोह अपना असली खेल शुरू करता था। गाड़ियों से संबंधित फर्जी एग्रीमेंट और एनओसी तैयार कर उन्हें दूसरे लोगों के पास गिरवी रख दिया जाता था। एक-एक गाड़ी के बदले तीन से पांच लाख रुपये तक हासिल किये जाते थे। इस तरह वाहन मालिकों की गाड़ियां उनके हाथ से निकल जाती थीं और गिरोह मोटी रकम लेकर गायब होने की तैयारी में रहता था।

किराया बंद, मोबाइल स्विच ऑफ तो खुलने लगा ठगी का राज
ठगी का शिकार हुए वाहन मालिकों को शुरुआत में पूरे खेल की भनक तक नहीं लगी। जब किराया मिलना बंद हुआ और महिला का मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा, तब उन्हें शक हुआ। इसके बाद अपने स्तर से गाड़ियों की तलाश शुरू की गयी।
कुछ वाहन मालिकों ने जीपीएस की मदद से अपनी गाड़ियों की लोकेशन ट्रेस की। जांच में पता चला कि जिन गाड़ियों को किराए पर दिया गया था, वे निर्धारित स्थानों पर मौजूद नहीं थीं। कई गाड़ियां दूसरे इलाकों और गैरेज में मिलीं। इसके बाद वाहन मालिकों को समझ में आया कि उनके साथ किराए के नाम पर बड़ा धोखा हुआ है। पीड़ितों ने मामले की शिकायत ओरमांझी थाना में दर्ज करायी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।

ट्रैवल एजेंसी संचालक भी गिरफ्तार, आपराधिक इतिहास आया सामने

इस मामले में गिरफ्तार विश्वजीत कुमार को लेकर पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। वह रातू रोड स्थित शुभ यात्रा ट्रैवल्स का संचालक बताया जा रहा है। जांच के दौरान उसका आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ कांके और ओरमांझी थानों में कई मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। इनमें हत्या और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले भी शामिल हैं।वहीं, मनोज कुमार की भूमिका गिरोह के लिए ग्राहकों की तलाश करने की बतायी जा रही है। वह कथित तौर पर उन लोगों से संपर्क करता था, जिन्हें गिरवी रखी गयी गाड़ियां उपलब्ध करायी जाती थीं। पुलिस अब तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

फर्जी कागजात बनाने वाले और गाड़ियां ठिकाने लगाने वाले भी रडार पर

ओरमांझी थाना पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। लेकिन पुलिस की जांच अभी यहीं खत्म नहीं हुई है। अब इस बात का पता लगाया जा रहा है कि फर्जी एग्रीमेंट और एनओसी किसने तैयार किये थे। गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और गिरवी रखी गयी गाड़ियों को किन लोगों के पास पहुंचाया गया था।पुलिस अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। साथ ही गिरवी रखी गयी गाड़ियों की बरामदगी का प्रयास भी किया जा रहा है। जांच में यदि और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

वाहन मालिकों के लिए बड़ा सबक
इस घटना ने कार रेंटल कारोबार और निजी वाहन मालिकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। किराए पर गाड़ी देने के नाम पर किस तरह विश्वास का फायदा उठाकर महंगी गाड़ियों को गिरवी रखा जा सकता है, यह मामला उसकी बानगी है। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि किसी अनजान व्यक्ति या एजेंसी को गाड़ी सौंपने से पहले उसका पहचान सत्यापन, पुलिस वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की जांच जरूर करें। साथ ही किराये का कानूनी समझौता और वाहन की जीपीएस निगरानी सुनिश्चित करें।फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद इस कथित गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क को लेकर कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

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