कोडरमा यौन शोषण कांड में बड़ा एक्शन: पूर्व सिविल सर्जन का करीबी राज आर्यन गिरफ्तार, नाबालिग को कोचिंग से नर्सिंग होम ले जाने का आरोप

 

कोडरमा। नाबालिग आदिवासी युवती के कथित यौन शोषण मामले में पुलिस की जांच अब एक और अहम कड़ी तक पहुंच गई है। पूर्व सिविल सर्जन डॉ.अनिल कुमार के करीबी माने जाने वाले राज आर्यन उर्फ छोटू को पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में कथित सहयोग, पीड़िता को लाने-ले जाने और समझौते के प्रयासों से जुड़े पहलुओं की जांच तेज हो गई है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राज आर्यन तत्कालीन सिविल सर्जन के निजी चालक के तौर पर भी काम करता था।आरोप है कि डॉ. अनिल कुमार के बुलाने पर वह नाबालिग पीड़िता को कोचिंग संस्थान से अपनी गाड़ी में बैठाकर नर्सिंग होम तक ले जाता था। इसी कथित भूमिका को लेकर पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि पूरे घटनाक्रम में उसकी क्या भूमिका थी और उसे किन-किन बातों की जानकारी थी।

गिरफ्तारी के बाद कई सवाल, बरही से पकड़ा गया आरोपी
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने राज आर्यन को बरही थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। उसके पास से 50 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने और एमजी हेक्टर कार जब्त किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस पहले भी इस मामले में उसका बयान दर्ज कर चुकी थी। डॉ. अनिल कुमार की गिरफ्तारी के बाद से ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।अब जांच का अहम पहलू यह है कि पीड़िता को कोचिंग से नर्सिंग होम ले जाने के दौरान क्या-क्या हुआ, राज आर्यन को कथित घटनाओं की कितनी जानकारी थी और उसकी भूमिका केवल वाहन से लाने-ले जाने तक सीमित थी या मामले में कोई अन्य भूमिका भी थी। इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

गिरफ्तारी के बाद पीड़िता के गांव पहुंचने का भी आरोप
इस मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि डॉ. अनिल कुमार की गिरफ्तारी के बाद राज आर्यन पीड़िता के गांव पहुंचा था। आरोप है कि उसने पीड़िता के परिजनों से संपर्क कर मामले में समझौता कराने की कोशिश की। इस दौरान परिजनों को कथित तौर पर प्रलोभन देने और दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं।पुलिस इन आरोपों की पड़ताल कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परिजनों से संपर्क करने के पीछे क्या उद्देश्य था और क्या किसी तरह से मामले की जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

मेडिकल जांच में देरी का मामला भी जांच के दायरे में
नाबालिग पीड़िता की मेडिकल जांच नहीं हो पाने और इसमें हुई कथित देरी का पहलू भी अब जांच के दायरे में है। आरोप है कि राज आर्यन ने पीड़िता के परिजनों को प्रभावित करने की कोशिश की थी, जिसके कारण शुरुआत में मेडिकल जांच नहीं हो सकी।
बताया जाता है कि बाद में पीड़िता की मां को सदर अस्पताल लाया गया और इस पूरी प्रक्रिया में कई घंटे लग गए। इस बीच सदर अस्पताल की एक चिकित्सक की कथित भूमिका को लेकर भी चर्चा सामने आई है। हालांकि, चिकित्सक की भूमिका या मेडिकल जांच में देरी के कारणों पर पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पूर्व सिविल सर्जन की गिरफ्तारी के बाद खुलेंगी और कड़ियां?
डॉ. अनिल कुमार की गिरफ्तारी के बाद राज आर्यन की भूमिका को लेकर पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा है। अब पुलिस कथित तौर पर पीड़िता को नर्सिंग होम ले जाने, परिजनों से संपर्क करने और समझौते के प्रयासों सहित पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।इस मामले में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यही हैं कि राज आर्यन को कथित यौन शोषण की घटनाओं की कितनी जानकारी थी, पीड़िता को नर्सिंग होम ले जाने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और गिरफ्तारी के बाद परिजनों से संपर्क करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। राज आर्यन के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी। इस मामले में आगे की जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।

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