बरी होने के बाद भी डिटेंशन सेंटर में बंद महिला, हाईकोर्ट ने पूछा- किस कानून के तहत जारी है हिरासत

 

राँची।आपराधिक मामले में अदालत से बरी होने के बावजूद हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में एक महिला को हिरासत में रखे जाने के मामले ने झारखण्ड हाईकोर्ट का ध्यान खींचा है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीधा सवाल किया कि जब महिला संबंधित आपराधिक मामले में बरी हो चुकी है, तो इसके बाद भी उसे हिरासत में रखने का कानूनी आधार क्या है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) को डिटेंशन सेंटर जाकर पूरे मामले की जांच करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं, हजारीबाग के एसपी से भी मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।

बरी होने के बाद हिरासत पर कोर्ट ने मांगा जवाब
यह मामला W.P. (Cr.) (D.B.) (HB) No. 582 of 2026 से जुड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से दायर याचिका में महिला को अदालत के समक्ष पेश करने, तत्काल रिहाई और उसकी हिरासत की वैधता की न्यायिक जांच की मांग की गई है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी ने वर्चुअल माध्यम से अदालत को बताया कि जी.आर. केस नंबर 1647/2025, जो लोहसिंगना थाना कांड संख्या 88/2025 से संबंधित है, में महिला को बरी किया जा चुका है। इसके बावजूद वह डिटेंशन सेंटर में बंद है।इस पर खंडपीठ ने जानना चाहा कि बरी होने के बाद महिला को जेल या डिटेंशन सेंटर में रखने का कानूनी अधिकार किस प्रावधान से मिलता है।

पुलिस कांस्टेबल पर यौन शोषण का आरोप
याचिका में एक पुलिस कांस्टेबल रंजीत महतो पर महिला की ओर से लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि इन आरोपों को लेकर शिकायत भी की गई है।अदालत ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। हजारीबाग एसपी को भी इस संबंध में तत्काल कार्रवाई और जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।

DLSA की टीम ने डिटेंशन सेंटर पहुंचकर शुरू की जांच
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद झारखण्ड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (JHALSA) के सदस्य सचिव ने अदालत को बताया कि हजारीबाग DLSA के सचिव अपनी टीम के साथ डिटेंशन सेंटर पहुंचकर मामले की जांच कर रहे हैं।टीम महिला का बयान दर्ज करेगी और हिरासत से जुड़े तमाम पहलुओं की जानकारी जुटाएगी। जांच रिपोर्ट अदालत में सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी।

एसपी ने सुरक्षा का दिया भरोसा
सुनवाई के दौरान हजारीबाग एसपी को वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। एसपी ने अदालत को बताया कि कांस्टेबल रंजीत महतो पर लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच तत्काल शुरू की जाएगी।उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि डिटेंशन सेंटर में रह रही महिला की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।

गृह सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से बुलाया
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आरोप पुलिस अधिकारी से संबंधित हैं, इसलिए गृह सचिव की मौजूदगी आवश्यक है।
उन्हें 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया है।

अनुच्छेद 21 का भी हवाला
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को कानूनी अधिकार के बिना नहीं छीना जा सकता।मामले की पहली सुनवाई के बाद अदालत ने इसे 5 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। अगली सुनवाई में DLSA की जांच रिपोर्ट और हजारीबाग एसपी की रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी। साथ ही गृह सचिव की मौजूदगी में अदालत मामले में आगे की दिशा तय करेगी।

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