फर्जी GST-ITC नेटवर्क पर ED का वार, जमशेदपुर से बाप-बेटे गिरफ्तार, देर रात राँची लाए गए

राँची/जमशेदपुर। झारखण्ड के चर्चित 734 करोड़ रुपये के फर्जी GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। बुधवार को ED की राँची जोनल टीम ने जमशेदपुर, देवघर और कोलकाता में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। घंटों चली तलाशी के बाद जमशेदपुर से स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तारी के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच देर रात जमशेदपुर से राँची लाया गया, जहां एजेंसी की ओर से पूछताछ की जा रही है।

मेडिकल जांच के दौरान हंगामा, राँची रवाना हुई टीम

गिरफ्तारी के बाद ED की टीम दोनों को मेडिकल जांच के लिए जमशेदपुर के MGM अस्पताल लेकर पहुंची। इस दौरान दोनों ने हंगामा किया और खुद को मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया। ज्ञानचंद जायसवाल ने ब्लड प्रेशर बढ़ने और दवा नहीं मिलने की शिकायत भी की। मेडिकल जांच के बाद ED टीम दोनों को लेकर राँची रवाना हो गई।

सुबह से शुरू हुई कार्रवाई, कई ठिकानों पर पहुंची ED टीम

ED की कार्रवाई बुधवार सुबह करीब सात बजे शुरू हुई। जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित ज्योति अपार्टमेंट में ज्ञानचंद जायसवाल के आवास-सह-कार्यालय में अधिकारियों ने तलाशी शुरू की। यह स्थान होटल सोनेट के सामने स्थित है।इसके साथ ही बिष्टुपुर के एन रोड स्थित बीएस टावर में उनके फ्लैट और उनके अकाउंटेंट संजय पारेख से जुड़े ठिकानों पर भी जांच टीम पहुंची। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों की तैनाती की गई थी।बताया गया कि तीन शहरों में एक साथ चली इस कार्रवाई में 50 से अधिक अधिकारी शामिल थे। कई घंटे तक चली तलाशी के दौरान जांच टीम ने दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।

देवघर में भी कारोबारी के ठिकानों पर तलाशी

ED की टीम ने देवघर में भी एक साथ कार्रवाई की। यहां विकास चटर्जी के नंदन पहाड़ स्थित आवास और बीएन झा पथ स्थित कार्यालय की तलाशी ली गई।जांच के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले में उनकी भूमिका को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

कागजी कंपनियों के जरिए ITC लेने का आरोप

ED की यह कार्रवाई फर्जी GST ITC मामले की जांच के दूसरे चरण का हिस्सा बताई जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में ऐसे कारोबारी नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है, जिन पर बिना वास्तविक माल की आपूर्ति किए केवल कागजी बिल और इनवॉइस के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने का आरोप है।जांच का एक अहम पहलू कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के नेटवर्क और उनके बीच हुए वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ना है। इसी क्रम में एजेंसी मनी ट्रेल की भी पड़ताल कर रही है।

पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

इस मामले में ED इससे पहले मई 2025 में जुगसलाई निवासी अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया और कोलकाता के शिवकुमार देवड़ा समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी।ED के मुताबिक, अब तक इस मामले में 29 लाख रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं, जबकि फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में जमा करीब 63 लाख रुपये की राशि फ्रीज कराई गई है।

बड़े कारोबारियों तक पहुंच रहा जांच का दायरा

734 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी ITC नेटवर्क की जांच अब केवल फर्जी कंपनियों और कागजी लेन-देन तक सीमित नहीं है। ED वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क से कौन-कौन से कारोबारी जुड़े थे और रकम का प्रवाह किन खातों या संस्थाओं के माध्यम से हुआ।

बुधवार की कार्रवाई और ज्ञानचंद जायसवाल व उनके बेटे की गिरफ्तारी को इसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगी।

37 शेल कंपनियों से 5 हजार करोड़ के फर्जी चालान का दावा

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित नेटवर्क में 37 शेल कंपनियां बनाई गईं और इनके जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान जारी किए गए। आरोप है कि वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना करीब 734 करोड़ रुपये के ITC का दावा किया गया।

जीएसटी इंटेलिजेंस की जांच के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और फर्जी कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।

डमी डायरेक्टर के जरिए बबलू जायसवाल तक पहुंची जांच

ED की जांच में बबलू जायसवाल से जुड़ी कई कंपनियां भी दायरे में हैं। इनमें मेसर्स जय भोलानाथ, मेसर्स मां शारदा पावर, मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केदारनाथ टेक्सटाइल्स और मेसर्स जानदीप आयरन एंड स्टील लिमिटेड शामिल हैं।

एजेंसी के मुताबिक, अगस्त 2025 में सरायकेला के कारोबारी पंचानंद सरदार से जुड़े ठिकानों पर हुई तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों के विश्लेषण से एक शेल कंपनी में डमी डायरेक्टर बनाए जाने की जानकारी सामने आई। ED का दावा है कि जांच आगे बढ़ने पर कंपनी का वास्तविक नियंत्रण बबलू जायसवाल से जुड़ा पाया गया।

55 करोड़ के संदिग्ध ITC की भी जांच

जांच एजेंसी के अनुसार, बबलू जायसवाल से जुड़ी कंपनियों के जरिए करीब 55 करोड़ रुपये के संदिग्ध GST-ITC का मामला पहले भी सामने आया था। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी ITC से जुड़े पैसों का इस्तेमाल कहां और किस माध्यम से किया गया।वहीं, हावड़ा में राज जायसवाल से जुड़े कारोबारी नेटवर्क और रियल एस्टेट में कथित निवेश की भी जांच की जा रही है। ED फर्जी चालानों से लेकर बैंक खातों और संपत्तियों तक मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी है।

 

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