जेल में बंदियों से सीधे संवाद, भोजन से लेकर कानूनी पैरवी तक की पड़ताल

–महिला वार्ड में बच्चों से मिली टीम, चार साल के मासूम ने सुनाई कविता; व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों ने दिए जरूरी निर्देश

पलामू। जेल की ऊंची दीवारों के भीतर बंदियों की जिंदगी कैसी है, उन्हें समय पर इलाज मिल रहा है या नहीं, भोजन की गुणवत्ता कैसी है, साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त है या नहीं और सबसे अहम-क्या हर बंदी को अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए बुधवार को मेदिनीनगर केंद्रीय कारा में औचक निरीक्षण किया गया।

झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर बोर्ड ऑफ विजिटर और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की संयुक्त टीम जेल पहुंची। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राज कुमार मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने जेल की व्यवस्थाओं को करीब से परखा और बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।

बैरक से रसोई और मेडिकल वार्ड तक पहुंची टीम

निरीक्षण के दौरान टीम ने बैरक, महिला वार्ड, मुलाकाती सहायता केंद्र, मेडिकल वार्ड, रसोईघर, स्टोर रूम, पुस्तकालय, प्रिंटिंग प्रेस और कपड़ा बुनाई केंद्र का जायजा लिया।बंदियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं, दवाइयों और चिकित्सा व्यवस्था के साथ पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की भी जानकारी ली गयी। अधिकारियों ने जेल में उपलब्ध संसाधनों और बंदियों को दी जा रही सुविधाओं की स्थिति को भी देखा।

“अधिवक्ता के अभाव में नहीं रहना चाहिए कोई बंदी”

निरीक्षण के दौरान बंदियों से उनके मुकदमों की स्थिति के बारे में जानकारी ली गयी। यह भी पूछा गया कि उन्हें कानूनी पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध है या नहीं।प्रभारी पीडीजे राज कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि कोई भी बंदी अधिवक्ता के अभाव में नहीं रहना चाहिए। जरूरतमंद बंदियों को डालसा के माध्यम से नि:शुल्क कानूनी सहायता और अधिवक्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि जेल में किसी तरह की परेशानी होने पर बंदी जेल पीएलवी के माध्यम से लिखित शिकायत डालसा तक पहुंचा सकते हैं।

थाली में क्या पहुंच रहा है, रसोई में भी हुई जांच

संयुक्त टीम ने जेल की रसोई का भी निरीक्षण किया। यहां यह देखा गया कि बंदियों को निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन दिया जा रहा है या नहीं। खाद्य सामग्री की उपलब्धता और भोजन तैयार करने की व्यवस्था की भी जानकारी ली गयी।इसके साथ ही टीम ने यह भी पड़ताल की कि बंदियों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव तो नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि कहीं कोई बंदी दूसरे बंदी को धमका या प्रताड़ित तो नहीं कर रहा।निरीक्षण के दौरान जेल की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं संतोषजनक पायी गयीं। पुस्तकालय में किताबें और संगीत वाद्य यंत्र भी सही स्थिति में मिले। टीम ने बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जेल प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए।

महिला वार्ड में बच्चों से मिली टीम, मासूम की कविता ने खींचा ध्यान

महिला वार्ड का निरीक्षण इस औचक जांच का खास हिस्सा रहा। टीम ने महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी व्यक्तिगत और अन्य समस्याओं की जानकारी ली।इस दौरान महिला बंदियों के साथ रह रहे छोटे बच्चों को बोर्ड ऑफ विजिटर की ओर से बिस्किट और टॉफी दी गयी। इसी बीच चार वर्षीय एक बच्चे ने टीम के सामने कविता सुनाई और अंग्रेजी के अल्फाबेट भी बोलकर सुनाए। मासूम की प्रतिभा देखकर टीम के सदस्यों ने उसकी खूब सराहना की।

ये अधिकारी रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायती राज पदाधिकारी दानवीर लकड़ा, एसडीपीओ राजेश यादव, डालसा सचिव सौरभ कुमार गौतम, व्यवहार न्यायालय के निबंधक कमल प्रकाश, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के चीफ अमिताभ चंद्र सिंह, डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

जेल अधीक्षक प्रभात कुमार, कारापाल देवनाथ राम, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के असिस्टेंट वीर विक्रम वक्स राय व पुष्कर राज, डालसा असिस्टेंट संजीव कुमार सिंह तथा पीएलवी आलोक केरकेटा और नीरज सिंह समेत अन्य सदस्य भी निरीक्षण टीम में शामिल रहे।

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