झारखण्ड के 49 शहरी निकायों में कचरा प्रबंधन की हाईटेक निगरानी: हर घर को मिलेगा यूनिक कोड; ऐप से होगी हाजिरी, गाड़ियों पर लगेगा जीपीएस, डीपीआर और तकनीकी प्रारूप पर काम शुरू
–सुडा ने तैयार की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मॉनिटरिंग व गवर्नेंस प्लेटफॉर्म की रूपरेखा, एआई पकड़ेगा फर्जीवाड़ा, कचरे के उठाव से अंतिम निष्पादन तक हर किलो की डिजिटल ट्रैकिंग, काम के सत्यापन के बाद ही एजेंसियों को होगा भुगतान
राँची।झारखण्ड के सभी 49 शहरी निकायों में कचरा उठाव और उसके निष्पादन की व्यवस्था को पारदर्शी व जवाबदेह बनाने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ी योजना तैयार की है. विभाग के अधीन राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने ‘स्टेट इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मॉनिटरिंग एंड गवर्नेंस प्लेटफॉर्म’ की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाया है. इसके तहत पूरे राज्य में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के हर चरण की डिजिटल निगरानी के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), टेक्नोलॉजी आर्किटेक्चर, लागत आकलन और क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इस व्यवस्था से नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में कागजी रिपोर्टों के आधार पर होने वाले दावों पर पूरी तरह लगाम लगेगी.
हर घर का होगा डिजिटल खाता : UWIN और क्यूआर कोड से जुड़ेगा डोर-टू-डोर कलेक्शन
योजना के तहत राज्य के सभी आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत भवनों का डिजिटल रजिस्टर तैयार होगा. प्रत्येक संपत्ति को एक ‘यूनिक वेस्ट आइडेंटिफिकेशन नंबर’ (UWIN) दिया जाएगा और प्रवेश द्वार पर छेड़छाड़-मुक्त क्यूआर कोड लगाया जाएगा. सफाईकर्मी जब कचरा लेने पहुंचेंगे, तो मोबाइल ऐप से कोड स्कैन करेंगे. स्कैन होते ही समय, तारीख, जीपीएस लोकेशन और गीला-सूखा कचरा अलग मिलने की स्थिति स्वतः दर्ज हो जाएगी. फर्जी स्कैन रोकने के लिए प्रतिदिन 5 से 10 फीसदी घरों की रैंडम जियो-टैग्ड फोटो भी ली जाएगी.
गाड़ियों की होगी रूट ट्रैकिंग : अनधिकृत हॉल्ट या रूट छोड़ने पर सिस्टम देगा अलर्ट
कचरा उठाने वाले सभी वाहनों (टिपर, ट्रैक्टर, कॉम्पेक्टर) को विशिष्ट पहचान देकर जीपीएस/वीटीएस से लैस किया जाएगा. वाहन के डिपो से निकलने, तय रूट पर चलने और प्रोसेसिंग प्लांट पहुंचने का समय दर्ज होगा. यदि कोई गाड़ी तय रूट छोड़ेगी, अनधिकृत जगह रुकेगी या बिना कचरा उठाए सीधे प्लांट पहुंचेगी, तो सॉफ्टवेयर में स्वतः रूट कंप्लायंस घटेगा और अलर्ट जारी होगा.
डिजिटल वे-ब्रिज व ऑटोमैटिक एंट्री : वजन में फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म
कचरा प्रसंस्करण केंद्रों, ट्रांसफर स्टेशनों और डंपिंग साइटों पर आरएफआईडी गेट रीडर और एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे लगाए जाएंगे. वाहनों की एंट्री और एग्जिट का रिकॉर्ड स्वतः दर्ज होगा. साथ ही सभी प्रमुख प्रोसेसिंग प्लांटों पर डिजिटल वे-ब्रिज जोड़े जाएंगे, जिससे गाड़ियों का सकल वजन, खाली वजन और वास्तविक कचरे का शुद्ध वजन सीधे स्टेट डैशबोर्ड पर अपलोड होगा.
एंड-टू-एंड मॉनिटरिंग : खाद, आरडीएफ और रीसाइक्लेबल की बिक्री का होगा पूरा हिसाब
प्लांटों में सूखा कचरा पहुंचने के बाद उससे तैयार होने वाले आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल), रीसाइक्लेबल मैटेरियल और कंपोस्ट के उठाव का भौतिक सत्यापन होगा. आरडीएफ सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजा गया या नहीं, इसकी पुष्टि ई-वे बिल और इनवॉइस से होगी. इसी तरह रांची स्थित कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट सहित अन्य वेट वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट्स के इनपुट-आउटपुट और फीडस्टॉक की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी.
ड्रोन से नपेगा लिगेसी वेस्ट : पुराने कचरे के पहाड़ों का वॉल्यूमेट्रिक सर्वे
डंपिंग यार्डों पर वर्षों से जमा पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) के बायो-माइनिंग की निगरानी ड्रोन आधारित वॉल्यूमेट्रिक सर्वे से की जाएगी. बेसलाइन सर्वे और मासिक ड्रोन मैपिंग के जरिए यह जांचा जाएगा कि कितना कचरा साफ हुआ, कितनी जमीन मुक्त कराई गई और उससे निकले इनर्ट्स व आरडीएफ का सही निस्तारण हुआ या नहीं.
सेप्टेज और बल्क वेस्ट पर पहरा : अवैध डंपिंग रोकने को टैंकरों पर जीपीएस
राज्य में संचालित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांटों और सेप्टिक टैंक खाली करने वाले सेप्टेज वाहनों को भी इसी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. जीपीएस के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सीवेज सीधे ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे, खुले में न बहाया जाए. इसके अलावा होटल, अस्पताल, मैरिज हॉल और बड़े अपार्टमेंट जैसे बल्क वेस्ट जनरेटरों का अनिवार्य पंजीयन होगा ताकि वे मौके पर ही गीले कचरे का निस्तारण सुनिश्चित करें.

