धनबाद के दो सबसे चर्चित हत्याकांड में फैसला आया, लेकिन सवाल वही- आखिर हत्या किसने की?
धनबाद। धनबाद के दो सबसे चर्चित हत्याकांड पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या और रंजय सिंह हत्याकांड में वर्षों बाद कानूनी प्रक्रिया अपने मुकाम तक पहुंची, लेकिन इन घटनाओं से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल आज भी कायम है। आखिर हत्या किसने की?
29 जनवरी 2017 को रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह की हत्या ने धनबाद को हिला दिया था। इसके करीब दो महीने बाद 21 मार्च 2017 को सरायढेला के स्टीलगेट के पास पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों हत्याकांडों में पुलिस जांच हुई, आरोपियों के नाम सामने आए और मामले अदालत तक पहुंचे। लेकिन वर्षों बाद सामने आए नतीजों ने हत्या के वास्तविक दोषियों को लेकर सवाल फिर खड़े कर दिए हैं।
स्टीलगेट में हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग: 21 मार्च 2017 की शाम करीब सात बजे नीरज सिंह, अशोक यादव, निजी अंगरक्षक मुन्ना तिवारी एवं ड्राइवर घोल्टू की अंधाधुंध गोलीबारी कर हत्या कर दी गई थी। नीरज सिंह के भाई अभिषेक सिंह उर्फ गुड्डू सिंह की शिकायत पर सरायढेला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में तत्कालीन विधायक संजीव सिंह, उनके भाई मनीष सिंह, पिंटू सिंह, गया सिंह और महंत पांडेय को आरोपी बनाया गया था।इस मामले में पुलिस ने संजय सिंह, डबलू मिश्रा, धनजी सिंह, पिंटू सिंह, संजीव सिंह, अमन सिंह, सोनू उर्फ कुर्बान, सागर उर्फ शिबू, चंदन उर्फ सतीश एवं विनोद कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हत्याकांड की जांच के दौरान कई नाम सामने आए और मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा।
करीब आठ साल छह महीने बाद आया फैसला: नीरज सिंह हत्याकांड करीब आठ साल छह महीने तक अदालत में विचाराधीन रहा। अब धनबाद के एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड में अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सभी आठ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। विशेष अदालत में न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी ने मामले पर फैसला सुनाया। बरी होने वालों में पूर्व बीजेपी विधायक संजीव सिंह भी शामिल थे।
अदालत के फैसले के बाद कानूनी तौर पर सभी आठ आरोपियों को राहत मिल गई, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल फिर सामने आ गया।अगर सभी आरोपी बरी हो गए, तो फिर नीरज सिंह और उनके तीन साथियों की हत्या आखिर किसने की?
वहीं, रंजय सिंह हत्याकांड में करीब नौ साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 23 गवाहों की गवाही कराई गई थी। अदालत के फैसले के बाद आरोपियों को कानूनी राहत मिल गई, लेकिन इससे एक सवाल खत्म नहीं हुआ अगर आरोपी दोषी साबित नहीं हुए, तो फिर रंजय सिंह की हत्या किसने की?
इसी तरह नीरज सिंह हत्याकांड में भी वर्षों तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चली। 21 मार्च 2017 की शाम स्टीलगेट में हुई उस ताबड़तोड़ फायरिंग में चार लोगों की जान चली गई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन अब जांच और साक्ष्यों की स्थिति ने घटना के वास्तविक हत्यारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों घटनाओं की परिस्थितियां और कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग हैं। किसी आरोपी का अदालत से बरी होना यह नहीं बताता कि हत्या हुई ही नहीं थी, बल्कि इसका अर्थ है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका। ऐसे में सवाल उन परिवारों का भी है, जिन्होंने अपने अपनों को खोया और वर्षों तक न्याय की उम्मीद में अदालतों का रुख किया।
धनबाद के इन दोनों चर्चित हत्याकांडों में अब सवाल किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि उस सच तक पहुंचने का है जो आज भी पूरी तरह सामने नहीं आया है।रंजय सिंह को गोली किसने मारी, नीरज सिंह और उनके तीन साथियों पर गोलियां किसने बरसाईं? क्या जांच उस व्यक्ति या उन लोगों तक पहुंच पाई, जिन्होंने वास्तव में हत्या को अंजाम दिया।
करीब नौ साल बीत गए। गवाहों के बयान हुए, अदालत में बहस हुई, आरोपी बनाए गए, गिरफ्तारियां हुईं और फैसले भी आए। लेकिन धनबाद के इन दो सबसे चर्चित हत्याकांडों की कहानी में सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है……आखिर हत्या किसने की?

