सीओ से गाली-गलौज का वीडियो वायरल, लोगों ने पूछा- अब एसोसिएशन कहां है? विधायक-पुलिस विवाद में तो खूब उछल रहे थे…

राँची/हजारीबाग। हुरहुरू की खास महल जमीन पर अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के बीच शुक्रवार को जो कुछ हुआ, उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है। कार्रवाई रोकने को लेकर पूर्व मंत्री और सदर सीओ आशुतोष कुमार के बीच तीखी बहस हुई। वीडियो को लेकर गाली-गलौज और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ इस तरह के व्यवहार पर अधिकारी या प्रशासनिक एसोसिएशन की ओर से आवाज कब उठेगी।मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ दिन पहले ही डुमरी विधायक और JLKM प्रमुख जयराम महतो तथा बरवाअड्डा थानेदार रवि कुमार के विवाद में पुलिस एसोसिएशन ने बेहद मुखर रुख अपनाया था। पुलिस एसोसिएशन ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग तक की थी तथा आंदोलन का ऐलान किया था।

वहां थानेदार के सम्मान की बात, यहां सीओ के लिए चुप्पी क्यों?

जयराम महतो प्रकरण में पुलिस एसोसिएशन ने कहा था कि पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और अमर्यादित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन ने इस मामले में धनबाद एसएसपी को पत्राचार किया और विधायक की गिरफ्तारी की मांग रखी।अब हजारीबाग में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और सीओ के बीच हुए विवाद का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसी सवाल को उठा रहे हैं,अगर थानेदार की गरिमा के लिए एसोसिएशन खुलकर सामने आ सकता है, तो प्रशासनिक अधिकारी के साथ कथित गाली-गलौज पर वही तेवर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?

गाली-गलौज के वीडियो पर सोशल मीडिया में सवालों की बौछार

घटना से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर योगेंद्र साव और सीओ के बीच हुई बहस को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक सरकारी अधिकारी के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा और गाली-गलौज के मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का संगठन क्या रुख अपनाएगा?लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या अधिकारी संगठनों की भूमिका सिर्फ पुलिसकर्मियों से जुड़े मामलों तक सीमित है या प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा और सम्मान के मामलों में भी वे उसी तरह मुखर होंगे?

जयराम महतो मामले में एसोसिएशन ने दिखाई थी पूरी ताकत

जयराम महतो-थानेदार विवाद में पुलिस एसोसिएशन ने पांच दिनों के भीतर गिरफ्तारी की मांग की थी और मांग पूरी नहीं होने पर राज्यभर में आंदोलन की चेतावनी दी थी। एसोसिएशन ने इसे पुलिसकर्मियों के सम्मान और गरिमा से जुड़ा मामला बताया था।
यही वजह है कि अब हजारीबाग के मामले में सोशल मीडिया पर यह तुलना तेजी से सामने आ रही है—“तब एसोसिएशन सड़क पर उतरने की बात कर रहा था, अब सीओ के साथ कथित गाली-गलौज पर खामोशी क्यों?”हालांकि, इस सवाल का जवाब फिलहाल संबंधित प्रशासनिक अधिकारी संगठन या एसोसिएशन की ओर से आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।

मुख्यमंत्री को लेकर भी बयान वाला वीडियो चर्चा में

मामले के बीच योगेंद्र साव का एक अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वह झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आने का दावा किया जा रहा है। इस वीडियो को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट किया है। वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।अब नजर इस बात पर है कि सीओ के साथ हुए इस विवाद और वायरल वीडियो पर प्रशासनिक अधिकारी संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

सीओ से बहस कई घंटे चली, कार्रवाई फिर भी जारी रही
शुक्रवार को सदर अंचलाधिकारी सह खास महल पदाधिकारी आशुतोष कुमार पुलिस बल और जेसीबी के साथ हुरहुरू पहुंचे थे। प्रशासन के अनुसार, खास महल की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए यह पांचवीं कार्रवाई थी।जेसीबी से पीसीसी सड़क और गौशाला के शेड को हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही योगेंद्र साव मौके पर पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई पर आपत्ति जताई और संबंधित आदेश की प्रति दिखाने की मांग की। इसके बाद दोनों पक्षों में बहस बढ़ गई और करीब चार घंटे तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।प्रशासन का कहना था कि संबंधित जमीन खास महल की सरकारी भूमि है और उस पर अतिक्रमण किया गया था। वहीं योगेंद्र साव का दावा है कि जमीन पुश्तैनी है और उन्होंने जमीन मालिक से पावर लिया हुआ है।

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