23 गवाह, 9 साल की सुनवाई… फिर भी साबित नहीं हुआ रंजय हत्याकांड, कोर्ट ने दोनों आरोपियों को किया बरी

धनबाद। धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड में शनिवार को अदालत ने करीब नौ साल बाद अपना अंतिम फैसला सुना दिया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने मामले के आरोपी नंदकुमार सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह को बरी कर दिया। दोनों आरोपियों को अदालत ने संदेह का लाभ दिया है।

अदालत ने बरी होने पर आरोपी हर्ष सिंह अपने परिवार के साथ खुशियां मनाते हुए

साल 2017 में बीच सड़क पर हुई रंजय सिंह की हत्या ने पूरे धनबाद को हिला दिया था। पुलिस की लंबी जांच के बाद नंदकुमार सिंह और हर्ष सिंह को इस हत्याकांड में आरोपी बनाया गया था। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और करीब नौ वर्षों तक गवाहों की गवाही, जिरह और कानूनी दलीलों का दौर चलता रहा। आखिरकार 19 सितंबर 2026 को अदालत का फैसला आया और दोनों आरोपियों को राहत मिल गई।

23 गवाह, लंबी सुनवाई… लेकिन आरोप साबित नहीं
मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत में कुल 23 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने सभी गवाहों से जिरह की। करीब नौ साल चली सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने अभियोजन के आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं पाया।सरकारी वकील सत्येंद्र कुमार राय ने कानूनी बिंदुओं पर बहस के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। इसके चलते पहले 5 सितंबर को प्रस्तावित फैसला टल गया था। शनिवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।

29 जनवरी 2017 की शाम सरेआम चली थी गोली
रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 की शाम करीब साढ़े पांच बजे धनबाद के बिग बाजार के सामने चाणक्य नगर मोड़ पर हुई थी। बताया गया कि रंजय सिंह अपने सहयोगी राजा यादव के साथ मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे।रास्ते में घात लगाए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ और अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे रंजय सिंह की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।इस घातक हमले में रंजय के साथ मौजूद राजा यादव किसी तरह चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गए, जिन्हें इस हाई-प्रोफाइल मामले का प्रमुख चश्मदीद गवाह बनाया गया था।हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और लंबी तफ्तीश के बाद नंदकुमार सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह को आरोपी बनाया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और लगभग नौ साल तक सुनवाई चलती रही।अब अदालत के फैसले के बाद इस बहुचर्चित हत्याकांड में दोनों आरोपियों को कानूनी तौर पर बरी कर दिया गया है।

 

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