कौशल विकास मिशन में फर्जी बैंक गारंटी का खेल, 1.06 करोड़ की गारंटी निकली जाली; दिल्ली की फर्म पर केस

 

राँची।झारखण्ड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) में काम हासिल करने के लिए करूर वैश्य बैंक के नाम से 1.06 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का गंभीर मामला सामने आया है. बैंक के फर्जी लेटरहेड, अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल कर यह धोखाधड़ी की गई थी इस संबंध में रांची मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में शिकायत वाद (कंप्लेन केस नंबर. 23050/2025) दर्ज कराया गया है।

यह मामला करूर वैश्य बैंक, मेन रोड रांची शाखा के प्रबंधक सुनील तिवारी की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत दायर किया गया है. अदालत में मेसर्स गिमिट ई सर्विसेज (साझेदारी फर्म, साउथ एक्सटेंशन-1, नई दिल्ली), इसके साझेदार सचिन अग्रवाल (निवासी यमुना विहार, दिल्ली), मोहम्मद शाहनवाज (निवासी न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, दिल्ली व हिंदपीढ़ी,राँची) और रूपेश कुमार (निवासी डाल्टनगंज, पलामू) को नामजद आरोपी बनाया गया है

कौशल विकास मिशन के सत्यापन मेल से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

दर्ज शिकायत के अनुसार, 22 जुलाई 2024 को झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) के मिशन निदेशक सह सीईओ के कार्यालय से करूर वैश्य बैंक को एक ईमेल भेजा गया था. इसमें 1,06,98,368 रुपये की बैंक गारंटी (संख्या N081BGP230380001, दिनांक 07.02.2023) की वैधता और सत्यता की पुष्टि मांगी गई थी।जब बैंक प्रबंधन ने अपने रिकॉर्ड की पड़ताल की तो पता चला कि बैंक द्वारा ऐसी कोई गारंटी जारी ही नहीं की गई थी।जांच में पाया गया कि बैंक गारंटी पर दर्ज अधिकारियों के हस्ताक्षर, नाम और सीरियल नंबर पूरी तरह जाली और मनगढ़ंत थे। बैंक प्रबंधन ने तुरंत जेएसडीएमएस को पत्र भेजकर उक्त बैंक गारंटी के फर्जी होने की पुष्टि कर दी।

आंतरिक जांच में बैंक कर्मियों की मिलीभगत नहीं, फर्म ने लीगल नोटिस का नहीं दिया जवाब

घटना सामने आने के बाद बैंक के आंतरिक लेखा परीक्षा विभाग (आईएडी) ने मामले की जांच की। 5 अगस्त 2024 को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इस साजिश में बैंक के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता नहीं है. इसके बाद बैंक ने आरोपी फर्म और उसके साझेदारों को 12 अगस्त 2024 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण या जवाब नहीं दिया गया. शिकायत में कहा गया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने और बैंक की साख को नुकसान पहुंचाने के इरादे से यह फर्जीवाड़ा किया गया।बैंक ने 3 सितंबर 2024 को हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए लिखित आवेदन दिया था।जब पुलिस स्तर से कोई कानूनी कदम नहीं उठाया गया, तब बैंक ने सीजेएम कोर्ट में कंप्लेंट दर्ज कराई।

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