स्वतंत्रता दिवस पर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में लगी ‘जेल अदालत’, 10 बंदियों को मिली रिहाई; कानून से लेकर स्वास्थ्य तक पर हुआ फोकस

 

राँची। स्वतंत्रता दिवस का दिन बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में बंद बंदियों के लिए भी राहत और जागरूकता का संदेश लेकर आया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), राँची के तत्वावधान में शनिवार (15 अगस्त) को जेल परिसर में जेल अदालत-सह-विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जेल अदालत में विभिन्न मामलों से जुड़े 49 बंदियों के आवेदनों पर सुनवाई की गई। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र पाए गए 10 बंदियों को जेल अदालत का लाभ देते हुए रिहा कर दिया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जेल से बाहर निकलना इन बंदियों के लिए भावनात्मक और यादगार क्षण रहा।

15 बेंचों के माध्यम से हुई मामलों की सुनवाई
जेल अदालत को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी समेत न्यायिक दंडाधिकारियों के लिए कुल 15 बेंचों का गठन किया गया था। न्यायिक अधिकारियों ने जेल में मौजूद बंदियों के लंबित मामलों और उनके आवेदनों पर सुनवाई की तथा पात्र मामलों में नियमानुसार राहत प्रदान की।
जेल अदालत में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसबी शर्मा, डालसा सचिव राकेश रौशन, न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा, भुपेश चंद्र समद, अभिषेक श्रीवास्तव, प्रशांत गुप्ता, नुमान आजम खान, प्रशांत कुमार वर्मा, सृष्टि कुमारी, अर्चना कुमारी, खुशबू त्यागी, रित्विका सिंह तथा रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी विजय कुमार यादव समेत अन्य न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे।इसके अलावा एलएडीसीएस के सदस्य, काराधीक्षक कुमार चंद्रशेखर, कारापाल लवकुश कुमार, जेलकर्मी, पीएलवी और अन्य संबंधित लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

49 मामलों पर सुनवाई, 10 बंदियों को मिला जेल अदालत का लाभ

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न्यायालयों में लंबित मामलों से संबंधित 49 बंदियों के आवेदन जेल अदालत के समक्ष रखे गए। न्यायिक दंडाधिकारियों ने प्रत्येक मामले की सुनवाई की। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 बंदियों को जेल अदालत के माध्यम से राहत मिली और उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।स्वतंत्रता दिवस पर हुई यह रिहाई कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रही। जेल अदालत का उद्देश्य ऐसे पात्र बंदियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत त्वरित राहत उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से जेल में रहने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

बंदियों को बताया गया उनका कानूनी अधिकार
जेल अदालत के साथ विधिक जागरूकता शिविर भी आयोजित किया गया। न्यायिक पदाधिकारियों ने बंदियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्हें यह भी बताया गया कि किसी मामले में कानूनी सहायता की आवश्यकता होने पर वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी बंदियों को दी गई। अधिकारियों ने उन्हें उपलब्ध कानूनी सुविधाओं और सहायता की प्रक्रिया से अवगत कराया।

थाली में परोसे जा रहे भोजन की भी जांच
कार्यक्रम केवल अदालत और कानूनी जागरूकता तक सीमित नहीं रहा। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसबी शर्मा और डालसा सचिव राकेश रौशन ने जेल में बंदियों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता का भी निरीक्षण किया।भोजन की व्यवस्था और गुणवत्ता की जांच के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए जेल प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बंदियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई।

स्वास्थ्य जांच के लिए लगाया गया नि:शुल्क कैंप
जेल परिसर में बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर भी विशेष पहल की गई। कार्यक्रम के दौरान नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया, जिसमें बंदियों के स्वास्थ्य की जांच की गई।मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने कहा कि जेल में बंद लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है। समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण होने से गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है और जरूरत के अनुसार समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।

साफ-सफाई को लेकर भी दिया गया जोर
डालसा सचिव राकेश रौशन ने जेल परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बंदियों को डालसा, रांची के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी।

स्वतंत्रता दिवस पर न्याय, जागरूकता और मानवीय सरोकार का संदेश

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में आयोजित यह कार्यक्रम कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। एक ओर जहां 49 बंदियों के मामलों की सुनवाई हुई, वहीं 10 पात्र बंदियों को रिहाई का लाभ मिला। दूसरी ओर, विधिक जागरूकता के जरिए बंदियों को उनके अधिकारों और सरकारी विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही भोजन की गुणवत्ता की जांच, जेल की साफ-सफाई पर जोर और स्वास्थ्य जांच शिविर ने यह संदेश दिया कि जेल में बंद लोगों के कानूनी अधिकारों के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।इस तरह स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में आयोजित जेल अदालत केवल मामलों की सुनवाई और रिहाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि न्यायिक राहत, कानूनी जागरूकता, स्वास्थ्य और मानवीय सुविधाओं को एक साथ जोड़ने वाला कार्यक्रम बनकर सामने आई।

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