जेएसएससी-जेपीएससी घोटाले की कड़ियां जोड़ने में जुटी सीआईडी, बिंसिस निदेशक 5 दिन रिमांड पर–

–बिंसिस निदेशक अरुण शर्मा से खुलेंगे 2 करोड़ और 20% कमीशन के राज

राँची।झारखण्ड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। जेएसएससी कनीय अभियंता (डिप्लोमा) परीक्षा पेपर लीक मामले में मुंबई से गिरफ्तार बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा को अदालत ने पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
रिमांड के दौरान राँची पुलिस और सीआईडी की संयुक्त टीम आरोपी से पूछताछ करेगी। पुलिस जहां नामकुम थाने में दर्ज जेएसएससी पेपर लीक मामले में बिंसिस टेक्नोलॉजी की भूमिका को लेकर सवाल करेगी, वहीं सीआईडी जेपीएससी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करेगी।

दो करोड़ रुपये और 20 प्रतिशत कमीशन के दावे की होगी जांच

जांच के दौरान अरुण शर्मा के कथित बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि काम दिलाने के एवज में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से दो करोड़ रुपये एकमुश्त और प्रत्येक भुगतान पर 20 प्रतिशत कमीशन की कथित डील की गई थी।अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित रकम का भुगतान कब, कहां और किस माध्यम से हुआ। साथ ही इस लेन-देन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, बातचीत और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

धर्मेंद्र की भूमिका पर भी फोकस

पूछताछ का एक अहम केंद्र कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र भी है। जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि अरुण शर्मा और धर्मेंद्र की मुलाकात कैसे हुई, किसके माध्यम से संपर्क स्थापित हुआ और कथित डील को अंतिम रूप देने में किसकी क्या भूमिका रही।
सीआईडी अब आरोपों की पुष्टि के लिए अरुण शर्मा के बयानों को उपलब्ध डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों से मिलाने की तैयारी में है।
मुंबई से हुई गिरफ्तारी

जेएसएससी कनीय अभियंता (डिप्लोमा) परीक्षा में पेपर लीक की प्राथमिकी के बाद जांच के दौरान परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी बिंसिस टेक्नोलॉजी की भूमिका सामने आने का दावा किया गया था। इसके बाद राँची पुलिस की टीम ने सोमवार को मुंबई में कार्रवाई करते हुए अरुण शर्मा को गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर राँची लेकर आई।अरुण शर्मा मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के चिक्सौरा थाना क्षेत्र स्थित खोखुना गांव का रहने वाला बताया जाता है।

पूछताछ से खुल सकती हैं कई परतें

जांच एजेंसियों की नजर अब इस बात पर है कि पेपर लीक और कथित भ्रष्टाचार के पीछे सिर्फ कुछ व्यक्ति थे या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था। अरुण शर्मा से पूछताछ के आधार पर पुलिस और सीआईडी संभावित बिचौलियों, एजेंसी से जुड़े लोगों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है।पांच दिनों की रिमांड में होने वाली पूछताछ को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यदि कथित वित्तीय लेन-देन और संपर्कों से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं, तो जेएसएससी और जेपीएससी से जुड़े मामलों की जांच में नए नाम और नई कड़ियां सामने आ सकती हैं।

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