चतरा में ACB की रेड के बाद हाई-वोल्टेज ड्रामा..15 हजार की रिश्वत लेते बड़ा बाबू गिरफ्तार; बंद कमरे की कार्रवाई पर भड़के कर्मचारी

 

चतरा। अनुमंडल कार्यालय चतरा में गुरुवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई के बाद उस वक्त हाई-वोल्टेज हंगामा खड़ा हो गया, जब हजारीबाग एसीबी की टीम ने अनुमंडल दंडाधिकारी कार्यालय के प्रधान लिपिक (बड़ा बाबू) बासुदेव राम को कथित तौर पर 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान एसीबी टीम द्वारा आरोपी को कार्यालय के एक कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर पूछताछ किए जाने पर कार्यालय के कर्मचारी भड़क गए। इसके बाद करीब आधे घंटे तक कार्यालय परिसर में जमकर हंगामा हुआ।

मामला जमीन विवाद से जुड़े एक पुराने वाद की जजमेंट कॉपी देने के एवज में रिश्वत मांगने से जुड़ा है। हजारीबाग एसीबी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हंटरगंज थाना क्षेत्र के बेला गांव निवासी 60 वर्षीय बिलास यादव ने एसीबी में शिकायत की थी। बिलास यादव के अनुसार, उनके दादा अन्हक्ष महतो वगैरह के नाम से बेला गांव में खाता संख्या-38, प्लॉट संख्या-183 और रकवा 52 डिसमिल जमीन है।इसी जमीन को लेकर गांव के ही प्रेमन यादव वगैरह ने अनुमंडल दंडाधिकारी चतरा के न्यायालय में वाद संख्या 10/2018 दायर किया था। एसीबी के मुताबिक, इस मामले में अनुमंडल दंडाधिकारी की अदालत ने प्रेमन यादव वगैरह की दावेदारी को गलत बताते हुए बिलास यादव के पक्ष में फैसला सुनाया था।फैसले की प्रमाणित प्रति यानी जजमेंट कॉपी लेने के लिए बिलास यादव ने कार्यालय के प्रधान लिपिक बासुदेव राम से संपर्क किया। आरोप है कि कॉपी देने के एवज में पहले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई और कहा गया कि पैसा दिए बिना नकल नहीं मिलेगी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने हजारीबाग एसीबी से शिकायत कर दी।

सत्यापन में सामने आया रिश्वत मांगने का आरोप
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया। एसीबी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तकनीकी यंत्र के माध्यम से किए गए सत्यापन में बासुदेव राम द्वारा शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप सत्य पाया गया। इसके बाद एसीबी हजारीबाग थाना कांड संख्या 10/2026, दिनांक 07.10.2026 दर्ज किया गया।इसके बाद एसीबी ने ट्रैप की पूरी तैयारी की। दंडाधिकारी और दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में गठित टीम ने गुरुवार को अनुमंडल कार्यालय चतरा में कार्रवाई की और एसीबी के अनुसार बासुदेव राम को शिकायतकर्ता बिलास यादव से 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद बंद कमरे में पूछताछ, फिर शुरू हुआ हंगामा
बासुदेव राम की गिरफ्तारी के बाद एसीबी टीम उसे उसके कार्यालय कक्ष में ले गई और पूछताछ शुरू कर दी। इस दौरान कमरे का दरवाजा बंद कर दिए जाने पर कार्यालय के कर्मचारियों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते कई कर्मचारी वहां जुट गए और एसीबी की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाने लगे।कर्मचारियों और एसीबी टीम के बीच करीब एक घंटे तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। हंगामा कर रहे कर्मचारियों ने एसीबी टीम पर गाली-गलौज और धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया। कर्मचारियों का आरोप था कि कार्रवाई के दौरान एक गैर-विभागीय युवक भी बंद कमरे के अंदर एसीबी टीम के साथ मौजूद था। कर्मचारियों ने उसकी मौजूदगी पर भी सवाल उठाए।

मामला बढ़ता देख कार्यालय में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। काफी देर तक कर्मचारियों और एसीबी टीम के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। इसके बाद एसीबी टीम ने कमरे का दरवाजा खोला और कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों की जांच शुरू की।
दस्तावेज खंगाले, साक्ष्य जुटाए और आरोपी को ले गई टीम
हंगामे के बाद एसीबी टीम ने कार्यालय में कार्रवाई आगे बढ़ाई। टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। कार्रवाई पूरी करने के बाद गिरफ्तार प्रधान लिपिक बासुदेव राम को अपने साथ हजारीबाग ले गई।

एसीबी की ओर से बताया गया है कि गिरफ्तारी के बाद मामले में अग्रतर कार्रवाई की जा रही है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई की जाएगी।

रिश्वत की शिकायत से शुरू हुआ मामला, गिरफ्तारी के बाद कार्यालय में मचा बवाल

एक तरफ एसीबी की टीम ने रिश्वत लेने के आरोप में प्रधान लिपिक को गिरफ्तार किया, तो दूसरी तरफ गिरफ्तारी के बाद कार्यालय में हुए हंगामे ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया। रिश्वत की शिकायत, एसीबी का ट्रैप, रंगे हाथ गिरफ्तारी और फिर बंद कमरे की कार्रवाई को लेकर कर्मचारियों का हाई-वोल्टेज विरोध इन घटनाओं के कारण गुरुवार को चतरा अनुमंडल कार्यालय में काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।

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