राँची के मोरहाबादी मैदान में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, धू-धू कर जले मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण के पुतले–
–राज्यपाल संतोष गंगवार की मौजूदगी में हुआ भव्य रावण दहन, रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगाया आसमान; बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
राँची। राजधानी राँची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में मंगलवार की शाम विजयादशमी के अवसर पर आस्था, उत्साह और उमंग का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मौका था बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक भव्य रावण दहन समारोह का। विशाल मैदान में हजारों की संख्या में जुटे लोगों की मौजूदगी, गगनभेदी जय श्रीराम के जयकारे और आसमान में बिखरती रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। रक्षा राज्य मंत्री एवं झारखण्ड के राज्यपाल संतोष गंगवार की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में जैसे ही रावण के विशाल पुतले का दहन हुआ, पूरा मोरहाबादी मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
विजयादशमी के इस खास अवसर पर सुबह से ही लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा था। शाम होते-होते मोरहाबादी मैदान में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिवार के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने पहुंचे। हर किसी की निगाहें मैदान में खड़े विशालकाय पुतलों पर टिकी थीं। लोगों को उस पल का बेसब्री से इंतजार था, जब अधर्म, अहंकार और बुराई के प्रतीक रावण का अंत होगा।
सोने की लंका के दहन के बाद जले मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले
समारोह के दौरान सबसे पहले सोने की लंका का दहन किया गया। इसके बाद क्रमवार मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण के विशाल पुतलों को आग के हवाले किया गया। पुतलों में आग लगते ही लपटें तेजी से उठने लगीं और देखते ही देखते पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। लोगों ने तालियां बजाकर इस दृश्य का स्वागत किया। रावण के पुतले के जलने के साथ ही उपस्थित लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को उत्साहपूर्वक महसूस किया।पुतलों के दहन का दृश्य इतना आकर्षक था कि मैदान में मौजूद लोग अपने मोबाइल फोन में इस यादगार पल को कैद करते नजर आए। बच्चों में खास उत्साह था, वहीं परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने भी इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया।
आतिशबाजी से जगमगाया आसमान, रोमांचित हुए दर्शक
मोरहाबादी मैदान में आयोजित रावण दहन समारोह का सबसे आकर्षक नजारा भव्य आतिशबाजी रही। आसमान में एक के बाद एक रंग-बिरंगी रोशनी बिखरती रही। आतिशबाजी की चमक और पुतलों से उठती आग की लपटों ने पूरे समारोह को यादगार बना दिया। आसमान में फैलती रंगीन रोशनी को देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। मैदान में मौजूद लोगों के बीच उत्साह देखते ही बन रहा था।जैसे ही रावण का विशाल पुतला आग की लपटों में घिरा, तालियों और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों में पर्व को लेकर खास उमंग दिखाई दी। लोगों ने अपने परिवार और परिचितों के साथ इस आयोजन का आनंद लिया। मोरहाबादी मैदान का यह नजारा विजयादशमी के उल्लास और परंपरा की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा था।
राज्यपाल ने दिया सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश
इस अवसर पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व भगवान श्रीराम की ओर से रावण पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को अहंकार, अन्याय और बुराई का त्याग करने का संदेश देने वाला अवसर भी है। उन्होंने सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने के महत्व को रेखांकित किया।विजयादशमी का पर्व हमें याद दिलाता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रावण दहन इसी शाश्वत संदेश का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने और अच्छे विचारों के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
राजधानी में दशहरा उत्सव का उल्लास चरम पर
मोरहाबादी मैदान में आयोजित भव्य रावण दहन समारोह के साथ ही राजधानी राँची में दशहरा उत्सव का उल्लास चरम पर पहुंच गया। जय श्रीराम के जयकारों, आतिशबाजी और विशाल पुतलों के दहन ने विजयादशमी की शाम को खास बना दिया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस आयोजन में लोगों की भागीदारी ने त्योहार की रौनक बढ़ा दी।रावण दहन के माध्यम से एक बार फिर समाज को यह संदेश मिला कि अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है तथा सत्य और अच्छाई की राह ही मानवता को सही दिशा दिखाती है। उत्साह और उमंग के बीच मोरहाबादी मैदान में मनाई गई विजयादशमी राजधानीवासियों के लिए यादगार बन गई।

