चाईबासा:डीजीपी ने मुठभेड़ में 17 नक्सलियों को मार गिराने वाले जवानों का बढ़ाया उत्साह,नक्सलियों को सरेंडर करने की दी सलाह…
राँची।झारखण्ड पुलिस नक्सलों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलता से उत्साहित झारखण्ड के डीजीपी तदाशा मिश्रा शनिवार को अभियान में शामिल जवानों और अधिकारियों का उत्साह बढ़ाने के लिए चाईबासा पहुंचीं। डीजीपी ने चाईबासा से नक्सलियों को यह चेतावनी दी है कि वह आत्मसमर्पण करें या फिर एनकाउंटर के लिए तैयार रहें।डीजीपी तदाशा मिश्रा ने चाईबासा में हाल ही में चलाए गए संयुक्त अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक झटका बताया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से कोल्हान और सारंडा के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी है।अब बचे-खुचे नक्सलियों के पास मुख्यधारा में लौटने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है।
शनिवार को डीजीपी तदाशा मिश्रा और सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी।इस दौरान आईजी अभियान माइकल राज एस, झारखण्ड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे, डीआईजी इंद्रजीत महथा, डीआईजी अनुरंजन केरकेट्टा, एसपी अमित रेणु समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
डीजीपी ने बताया कि 22 और 23 जनवरी को झारखण्ड पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों को सटीक सूचना मिली थी कि शीर्ष नक्सली अनल उर्फ पतिराम मांझी और अनमोल उर्फ सुशांत अपने सशस्त्र दस्ते के साथ छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमड़ीह और बहदा गांव के जंगली-पहाड़ी इलाकों में डेरा डाले हुए हैं।इसी सूचना पर झारखण्ड पुलिस, कोबरा 209 बटालियन, सीआरपीएफ और झारखण्ड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर विशेष अभियान शुरू किया।
इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई दौर की भयंकर गोलीबारी हुई। नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग की लेकिन सुरक्षा बलों ने संयमित और घातक जवाब दिया।नक्सली जंगल में भागे तो सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान 17 नक्सलियों के शव बरामद हो गए, जिनमें संगठन के बड़े नेता शामिल हैं।
इस मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में अनल उर्फ पतिराम मांझी सबसे बड़ा नाम है, उसके सिर पर झारखण्ड में 1 करोड़, ओडिशा में 1.20 करोड़ और एनआईए से 15 लाख रुपये का इनाम था। वहीं अनमोल उर्फ सुशांत पर झाऱखण्ड में 25 लाख और ओडिशा में 65 लाख का इनाम घोषित था।अन्य मारे गए नक्सलियों में अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, समीर सोरेन, रापा उर्फ पावेल, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सुरजमुनी, जोंगा, सोमबारी पूर्ति, सोमा होनहागा, मुक्ति होनहागा और सरिता शामिल हैं। इन सभी पर झारखण्ड-ओडिशा में कई हत्या, लूट और विस्फोट जैसे गंभीर मामले दर्ज थे।
सारंडा में सर्च के दौरान नक्सली ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं। इसमें 4 एके- 47 राइफल, 1 एकेएम, 4 इंसास, 3 एसएलआर, 3 .303 राइफल, असंख्य कारतूस और दैनिक सामान शामिल हैं।इससे नक्सलियों की हथियार क्षमता को बड़ा झटका लगा है।डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि चाईबासा और आसपास के इलाकों में पिछले तीन सालों से नक्सल विरोधी अभियान तेज हैं।इस दौरान 183 नक्सलियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि पहले मुठभेड़ों में 11 नक्सली मारे गए थे।अब इस अभियान से संगठन को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
डीजीपी ने बताया कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप लगाने से नक्सल गतिविधियां थम गई हैं और स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा है।डीजीपी ने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार त्यागकर सरेंडर कर दें, वरना अभियान जारी रहेगा।
वहीं दूसरी तरफ मारे गए नक्सलियों के शवों का कड़ी सुरक्षा के बीच पोस्टमार्टम भी शुरू कर दिया गया है।चाईबासा के एसपी अमित रेणु ने बताया कि चुकी शवों की संख्या 17 है इसलिए पोस्टमार्टम में समय लगेगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चाईबासा एसपी ने बताया कि मारे गए नक्सलियों के परिजनों ने उनके शवों के लिए चाईबासा पुलिस से संपर्क किया है। आवश्यक कार्रवाई करने के बाद मारे गए नक्सलियों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए जाएंगे। जिन नक्सलियों के शवों का कोई दावेदार नहीं होगा उनका कुछ दिन तक इंतजार किया जाएगा।

