पलामू में टैक्स अधिकारी पर वसूली-धमकी के आरोप, मुख्यालय सख्त; 7 दिन में जांच रिपोर्ट तलब

 

मेदिनीनगर। झारखण्ड के पलामू जिले में वाणिज्य-कर विभाग के एक अधिकारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डालटनगंज स्थित पलामू अंचल में पदस्थापित स्टेट टैक्स अधिकारी जियाउल हक पर व्यवसायियों ने अवैध वसूली, धमकी देने और बेवजह परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर व्यवसायी संघ की ओर से लिखित शिकायत किए जाने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। राज्य-कर अपर आयुक्त (प्रशासन), राँची प्रमंडल ने शिकायत की जांच कराने का निर्देश जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।

मासिक वसूली की मांग का आरोप, नहीं मानने पर कार्रवाई का डर दिखाने की शिकायत

व्यवसायियों की शिकायत के मुताबिक, अधिकारी पर कारोबारियों से कथित तौर पर हर महीने रकम मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में उन्हें नोटिस जारी कर परेशान किया जाता था और कार्रवाई का भय दिखाया जाता था। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में निजी बिचौलियों की भूमिका होने का आरोप भी लगाया गया है।शिकायत में कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क की ओर इशारा किया गया है, जिसके माध्यम से कारोबारियों से रकम वसूले जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित अधिकारी की भूमिका क्या रही है।

मुख्यालय तक पहुंचा मामला, अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए वाणिज्य-कर विभाग के मुख्यालय ने भी शिकायत पर संज्ञान लिया। उपलब्ध विभागीय पत्र के अनुसार, मुख्यालय की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद राज्य-कर अपर आयुक्त (प्रशासन), रांची प्रमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को संबंधित अधिकारियों को जांच का निर्देश जारी किया।

विभाग ने जांच में स्पष्ट मंतव्य के साथ विस्तृत प्रतिवेदन देने को कहा है। पत्र में निर्धारित समय-सीमा के अनुसार, पत्र प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपनी है। अब जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

नोटिस की वैधता से लेकर बिचौलियों की भूमिका तक होगी पड़ताल?
इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। क्या वास्तव में व्यवसायियों से मासिक रकम की मांग की गई थी? क्या कथित बिचौलियों के जरिए वसूली किए जाने के आरोपों में कोई तथ्य है? क्या कारोबारियों को जारी किए गए नोटिस नियमानुसार थे या उनका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच से ही तस्वीर साफ हो सकेगी।जांच की निष्पक्षता के लिए शिकायतकर्ताओं के पक्ष के साथ-साथ संबंधित अधिकारी का जवाब और विभागीय रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल जांच का आदेश जारी होना आरोपों की पुष्टि या अधिकारी को दोषी ठहराया जाना नहीं है।

व्यवसायियों को निष्पक्ष जांच का इंतजार
मेदिनीनगर के व्यवसायियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कारोबारियों को कर नियमों के दायरे में काम करने के साथ-साथ पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था भी मिलनी चाहिए।अब सबकी नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी है। एक सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट में क्या सामने आता है, आरोपों की पुष्टि होती है या शिकायतों को लेकर कोई दूसरा तथ्य सामने आता है।यह जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

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