कोलकाता आर्मी इंटेलिजेंस की सटीक सूचना पर बड़ी कार्रवाई, मुर्शिदाबाद में फर्जी आर्मी अधिकारी तरुण दास गिरफ्तार; वर्दी पहनकर करता था ठगी!

राँची/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कोलकाता आर्मी इंटेलिजेंस की सटीक सूचना पर मुर्शिदाबाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कथित फर्जी आर्मी अधिकारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान तरुण दास (Tarun Das), पिता बादल दास, निवासी सागरदिघी, मुर्शिदाबाद के रूप में हुई है। आरोप है कि वह सेना की वर्दी और फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे की ठगी किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।बताया जा रहा है कि आरोपी तरुण दास कथित तौर पर सेना में फर्जी लेफ्टिनेंट कर्नल बनकर घूम रहा था। वह लोगों के सामने खुद को मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) का अधिकारी बताता था। सेना की वर्दी और फर्जी पहचान पत्रों के सहारे वह लोगों पर रौब जमाता था।

 

चेकपोस्ट पर जांच के दौरान दबोचा गया आरोपी
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता आर्मी इंटेलिजेंस की टीम पिछले कई दिनों से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। उसके कथित फर्जी सैन्य अधिकारी होने और लोगों को ठगने की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश की जा रही थी। इसी बीच मुर्शिदाबाद के एक चेकपोस्ट पर जांच के दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई में कोलकाता आर्मी इंटेलिजेंस  की अहम भूमिका रही।

घर से निकलते ही पहनता था आर्मी की वर्दी
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपी तरुण दास घर से बाहर निकलते समय सेना की वर्दी पहनता था, ताकि लोगों के बीच खुद को वास्तविक आर्मी अधिकारी के रूप में पेश कर सके। बताया जा रहा है कि वह अपनी गतिविधियों को इस तरह अंजाम देता था कि उसके घर और आसपास के लोगों को भी उसकी कथित फर्जी पहचान पर संदेह नहीं होता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने कब से इस तरीके को अपना रखा था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

कार, वॉकी-टॉकी और कई फर्जी दस्तावेज बरामद
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके पास से एक कार, वॉकी-टॉकी, कई फर्जी पहचान पत्र, संदिग्ध दस्तावेज और कथित ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बरामद सामान की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जाता था और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।

कितने लोगों को बनाया शिकार, इसकी जांच में जुटी आर्मी इंटेलिजेंस

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी ने सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर कितने लोगों से पैसे लिए और किन-किन स्थानों पर कथित ठगी की। कोलकाता आर्मी इंटेलिजेंस की टीम इन पहलुओं की पड़ताल कर रही है। आरोपी से पूछताछ के जरिए उसके नेटवर्क, संभावित पीड़ितों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इस कथित फर्जीवाड़े का दायरा कितना बड़ा है।

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