स्वर्ण बॉण्ड के नाम पर 75 लाख की ठगी…गिरोह ने भरोसे में लेकर लिए पैसे, रकम मांगने पर जान से मारने की धमकी का आरोप

 

राँची। राजधानी राँची के चुटिया थाना क्षेत्र में स्वर्ण बॉण्ड प्रमाण पत्र की खरीद-बिक्री के नाम पर 75 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। चुटिया थाना में बिरेन्द्र कुमार जायसवाल (61) की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कांड दर्ज किया है। मामले में BNS की धारा 316(2), 318(4), 351(2), 352 और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

31 किलो 950 ग्राम सोने के बॉण्ड का दिया गया हवाला
शिकायतकर्ता बिरेन्द्र कुमार जायसवाल का आरोप है कि कुछ लोगों ने मिलकर उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक, मुंबई के नाम से जारी बताए जा रहे स्वर्ण बॉण्ड प्रमाण पत्र की खरीद-बिक्री का झांसा दिया। शिकायत में 31 किलो 950 ग्राम सोने के प्रमाण पत्र का उल्लेख किया गया है। प्रमाण पत्र संख्या BY/RDH-720 और BY/RDH-721 तथा दिनांक 14 मई 1993 से संबंधित दस्तावेज और रसीद संख्या RBND.829 का भी जिक्र किया गया है।शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने बताया कि उक्त स्वर्ण बॉण्ड को करीब 2.50 करोड़ रुपये में खरीदा जाना है और बाद में इसकी बिक्री कर भारी रकम हासिल की जा सकती है।

सोनू ने कराया संपर्क, फिर ओम प्रकाश और मिथलेश से हुई बातचीत

बिरेन्द्र जायसवाल ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि सोनू सिंह नामक व्यक्ति ने उनकी बातचीत ओम प्रकाश सिंह से कराई। इसके बाद ओम प्रकाश सिंह ने मिथलेश गुप्ता से उनकी बातचीत कराई। आरोप है कि दोनों ने मिलकर स्वर्ण बॉण्ड खरीदने की पूरी योजना बताई और उनसे भी रकम लगाने को कहा।शिकायत के मुताबिक, ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि वह एक करोड़ रुपये तक लगाने की बात कर रहा है, जबकि मिथलेश गुप्ता ने 75 लाख रुपये तक देने की बात कही। इसके बाद शिकायतकर्ता से भी 75 लाख रुपये लगाने को कहा गया।

तीन किस्तों में दिए 75 लाख रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने अपने मित्रों से ब्याज पर पैसा लेकर आरोपियों को तीन किस्तों में कुल 75 लाख रुपये दिए।
31 मार्च 2026 – 25 लाख रुपये
7 अप्रैल 2026 – 30 लाख रुपये
25 जून 2026 – 20 लाख रुपये
आवेदन के अनुसार यह रकम ओम प्रकाश सिंह को एकरारनामा के माध्यम से दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि मिथलेश गुप्ता ने अलग से अपने नाम पर एकरारनामा नहीं बनाया और उनके हिस्से की रकम भी उसी दस्तावेज में दर्ज कराई गई, जिससे एकरारनामा में कुल रकम 1.50 करोड़ रुपये दर्शायी गई।

बॉण्ड नहीं मिला तो शुरू हुआ टालमटोल
बिरेन्द्र जायसवाल का आरोप है कि 75 लाख रुपये देने के बाद जब उन्होंने स्वर्ण बॉण्ड की बिक्री कर रकम वापस करने को कहा तो ओम प्रकाश सिंह और मिथलेश गुप्ता लगातार टालमटोल करते रहे। आरोप है कि दोनों अलग-अलग बहाने बनाकर समय बढ़ाते रहे।जब शिकायतकर्ता ने रकम वापस करने और पुलिस में शिकायत करने की बात कही तो कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद दोनों ने बातचीत बंद कर दी और मोबाइल फोन बंद कर लिए।

पते की जांच करने पर भी सामने आया सवाल
शिकायतकर्ता ने आवेदन में दावा किया है कि उन्होंने अपने स्तर से आरोपियों के बताए पते की पड़ताल की तो वहां संबंधित नाम के लोगों के मौजूद होने की जानकारी नहीं मिली। उन्होंने पुलिस से मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की मांग की है।

छह मोबाइल नंबरों से संपर्क का दावा
शिकायत में कहा गया है कि 18 फरवरी 2026 से 20 जुलाई 2026 के बीच शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबरों पर छह अलग-अलग मोबाइल नंबरों से बातचीत हुई। आवेदन में उन छह नंबरों का उल्लेख किया गया है।शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पूरे मामले में 18 से अधिक लोगों के शामिल होने की आशंका है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि गिरोह के लोग पाकुड़, दुमका और पश्चिम बंगाल के पते बताते थे और मोबाइल नंबरों की जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी खुलासा हो सकता है।

कई लोगों के नाम शिकायत में दर्ज
शिकायत में ओम प्रकाश सिंह, मिथलेश गुप्ता, सोनू सिंह के अलावा स्वर्ण बॉण्ड प्रमाण पत्र के कथित विक्रेता के रूप में कौशलिया देवी, संजय कुमार और सुधीर कुमार के नाम तथा कथित खरीदार के रूप में रोहित अग्रवाल और मोहित अग्रवाल के नाम भी दिए गए हैं।शिकायतकर्ता ने पुलिस से सभी मोबाइल नंबरों की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने, 75 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने तथा अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

फिलहाल चुटिया थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। स्वर्ण बॉण्ड से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविकता, पैसों के लेन-देन और नामजद लोगों की भूमिका की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

error: Content is protected !!