झारखण्ड के राज्यपाल की बेटी को BJP का राज्यसभा टिकट, श्रुति गंगवार की सियासी एंट्री
राँची/बरेली। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बरेली की श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाकर एक अहम राजनीतिक संदेश दिया है। श्रुति गंगवार झारखण्ड के राज्यपाल और बरेली से आठ बार सांसद रह चुके संतोष गंगवार की बेटी हैं। भाजपा ने यूपी से राज्यसभा के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों में श्रुति गंगवार को भी शामिल किया है।
श्रुति गंगवार को टिकट दिए जाने के साथ ही बरेली की राजनीति में गंगवार परिवार की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। संतोष गंगवार लंबे समय तक बरेली से भाजपा के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और बाद में उन्हें झारखण्ड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अब उनकी बेटी को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने को परिवार को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन हैं श्रुति गंगवार?
श्रुति गंगवार बरेली में लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वह वर्तमान में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, बरेली की चेयरपर्सन हैं। अगस्त 2024 में वह बैंक की निदेशक चुनी गई थीं और इसके बाद चेयरपर्सन की जिम्मेदारी संभाली। स्थानीय स्तर पर भाजपा के कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में भी उनकी सक्रियता रही है।
झारखण्ड राजभवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार संतोष गंगवार के दो बच्चे हैं पुत्री श्रुति गंगवार और पुत्र अपूर्व गंगवार। उनका मूल राजनीतिक आधार बरेली रहा है और वह बरेली लोकसभा सीट से आठ बार सांसद निर्वाचित हो चुके हैं।
राज्यसभा टिकट के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश?
भाजपा के इस फैसले को सिर्फ एक उम्मीदवार के चयन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र में कुर्मी समाज के बीच संतोष गंगवार की राजनीतिक पहचान रही है। ऐसे में उनकी बेटी को राज्यसभा का टिकट मिलने से गंगवार परिवार की राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के रूप में भी देखा गया है।हालांकि, भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित करने की आधिकारिक घोषणा में किसी विशेष जातीय वोट बैंक को साधने को टिकट का कारण नहीं बताया गया है। इसलिए कुर्मी वोट बैंक से जुड़े इस पहलू को राजनीतिक विश्लेषण और क्षेत्रीय समीकरणों के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।
महिला चेहरे को भी प्रतिनिधित्व
श्रुति गंगवार के नाम के साथ भाजपा ने यूपी से घोषित आठ उम्मीदवारों की सूची में दो महिला चेहरों को जगह दी है। श्रुति के अलावा प्रियंका सिंह रावत को भी उम्मीदवार बनाया गया है। इस लिहाज से श्रुति का चयन बरेली की स्थानीय राजनीति के साथ महिला प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।
बरेली से दो नाम, अलग-अलग सामाजिक समीकरण
भाजपा ने बरेली क्षेत्र से श्रुति गंगवार के साथ धर्मपाल सिंह को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। दोनों नामों के जरिए पार्टी ने रुहेलखंड क्षेत्र से अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक आधार वाले चेहरों को उच्च सदन भेजने का फैसला किया है।अब श्रुति गंगवार के राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि झारखण्ड के राज्यपाल संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत को उनकी बेटी किस तरह आगे बढ़ाती हैं। राज्यसभा का टिकट मिलने के साथ ही श्रुति गंगवार का सक्रिय राजनीति में कद भी बढ़ा है और बरेली की राजनीति में गंगवार परिवार की मौजूदगी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

