जामताड़ा की वो खौफनाक रात: पंचर गाड़ी से शुरू हुआ खेल, इंसास छीनकर भागा सुजीत सिन्हा और फिर चलीं 14 गोलियां–

–रात के अंधेरे में अचानक चीख-पुकार, हथियार छीनकर भागता कुख्यात गैंगस्टर और पीछे से गूंजती गोलियों की आवाज….जामताड़ा बाईपास पर 2 अगस्त की रात कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिला दिया। अब दर्ज प्राथमिकी ने उस रात की परत-दर-परत कहानी सामने रख दी है।
राँची/जामताड़ा/साहिबगंज। 2 अगस्त 2026 की रात। घड़ी करीब 10 बजा रही थी। साहिबगंज से धनबाद की ओर बढ़ रहा पुलिस का भारी-भरकम काफिला जामताड़ा जिले के जामताड़ा बाईपास से गुजर रहा था। सब कुछ सामान्य था। कैदी वाहन में कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा हथकड़ी में था और उसके चारों तरफ पुलिस का सुरक्षा घेरा था।लेकिन अगले कुछ मिनटों में हालात ऐसे बदले कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए अंधेरे में मोर्चा संभालना पड़ा।
एक झटके में सड़क से नीचे उतरी कैदी गाड़ी
एफआईआर के मुताबिक, रात करीब 10 बजे जामताड़ा बाईपास पर कैदी वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के बाईं ओर नीचे उतर गया। जोरदार झटके के बाद वाहन रुक गया।चालक ने बताया कि टायर पंचर हो गया है और वाहन कीचड़ में फंस गया है।
आगे चल रहे बरहरवा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल और पीछे चल रहे राजमहल एसडीपीओ विमलेश त्रिपाठी अपने अंगरक्षकों के साथ तुरंत कैदी वाहन के पास पहुंचे।यहीं से शुरू हुआ वह घटनाक्रम, जिसका अंत कुछ ही देर बाद गोलियों की बौछार और सुजीत सिन्हा की मौत के साथ हुआ।
प्लान बदला, सुजीत को दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने का फैसला
वाहन के फंस जाने के बाद पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा को देखते हुए सुजीत सिन्हा को छोटे वाहन में शिफ्ट कर आगे ले जाने का फैसला किया।एफआईआर के अनुसार, हवलदार राजू कुमार यादव रस्सा-हथकड़ी पकड़कर सुजीत को कैदी वाहन से नीचे उतार रहे थे। पुलिसकर्मी उसे पीछे खड़ी राजमहल एसडीपीओ की बोलेरो की ओर ले जा रहे थे।तभी अचानक पूरा घटनाक्रम पलट गया।
अचानक छीनी इंसास… और अंधेरे में शुरू हुई भागदौड़
पुलिस की प्राथमिकी में दावा किया गया है कि इसी दौरान सुजीत सिन्हा ने झटके से हवलदार धर्मेंद्र मड़ेया की इंसास रायफल छीन ली।इसके बाद उसने पुलिस टीम की ओर फायरिंग की और अंधेरे का फायदा उठाते हुए सड़क से ऊपर टेकरी की तरफ भागने लगा।
पुलिसकर्मियों ने उसे घेरने की कोशिश की। लेकिन एफआईआर के मुताबिक, सुजीत ने पलटकर पुलिस बल की ओर फिर सीधी फायरिंग की।अब मामला सिर्फ एक कैदी के भागने का नहीं था। सामने हथियारबंद आरोपी था और दूसरी ओर पुलिस की टीम।
अंधेरे में गूंजी आत्मसमर्पण की चेतावनीपुलिसकर्मियों ने खुद को कवर में लेते हुए सुजीत को बार-बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी।एफआईआर में दावा है कि चेतावनी के बावजूद फायरिंग जारी रही।इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग शुरू की।कुछ ही क्षणों में जामताड़ा बाईपास का वह इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा।
14 राउंड फायरिंग का दावा
एफएसएल और पुलिस जांच के हवाले से प्राथमिकी में कुल 14 राउंड फायरिंग का उल्लेख किया गया है।एफआईआर के अनुसार—बरहरवा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल ने एके-47 से 2 राउंड फायर किए।हवलदार राजू कुमार यादव ने एके-47 से 5 राउंड चलाए।हवलदार दिनेश हेम्ब्रम ने एके-47 से 2 राउंड फायर किए।आरक्षी राजीव कुमार ने एके-47 से 1 राउंड चलाया।राजमहल एसडीपीओ विमलेश त्रिपाठी ने सर्विस पिस्टल से 1 राउंड फायर किया।पुअनि सुमित कुमार सिंह ने सर्विस पिस्टल से 2 राउंड फायर किए।पुअनि अखिलेश कुमार यादव की सर्विस पिस्टल से 2 राउंड फायर होने का उल्लेख है। प्राथमिकी में दो बार कॉकिंग मिस/फायर रुकने की बात भी दर्ज है।
गोलियां थमीं तो खामोश पड़ा था सुजीत
फायरिंग थमने के बाद पुलिस टीम ने इलाके में सघन तलाशी शुरू की।कुछ दूरी पर सुजीत सिन्हा जमीन पर गिरा मिला। प्राथमिकी के मुताबिक, उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी।उसके ठीक बगल में वही इंसास रायफल पड़ी थी, जिसे पुलिस के अनुसार हवलदार धर्मेंद्र मड़ेया से छीना गया था।मौके से तत्काल साहिबगंज पुलिस कंट्रोल रूम और एसपी को सूचना दी गई। एंबुलेंस के लिए अनुरोध किया गया।कुछ देर बाद स्थानीय पुलिस, जामताड़ा के अंचल अधिकारी और मेडिकल टीम घटनास्थल पर पहुंची। डॉक्टरों ने जांच के बाद सुजीत सिन्हा को मृत घोषित कर दिया।इसके बाद पहुंची एफएसएल टीम, शुरू हुई सबूतों की पड़ताल
घटना के बाद एफएसएल टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। दंडाधिकारी और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए।अब इस पूरी घटना की कानूनी जांच एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ रही है।
एक पंचर टायर… और बदल गई पूरी कहानी
इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक सामान्य ट्रांजिट के दौरान कैदी वाहन का अचानक सड़क से नीचे उतरना, वाहन का कीचड़ में फंसना, कैदी को दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने का फैसला और उसी दौरान हथियार छीने जाने की घटना कैसे एक के बाद एक हुई?एफआईआर पुलिस का आधिकारिक पक्ष और घटनाक्रम दर्ज करती है। आगे की जांच में घटनास्थल के फोरेंसिक साक्ष्य, हथियारों की जांच, फायरिंग के निशान और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान इस कहानी की अगली कड़ियां तय करेंगे।
फिलहाल 2 अगस्त की वह रात जामताड़ा पुलिस रिकॉर्ड में एक ऐसे ऑपरेशन के रूप में दर्ज हो चुकी है, जिसमें कुछ मिनटों के भीतर कैदी वाहन के फंसने से लेकर हथियार छिनने, अंधेरे में पीछा, चेतावनी, जवाबी फायरिंग और कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत तक का पूरा घटनाक्रम सामने आया।

