Jharkhand:दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव में शोक का माहौल, मंगलवार को नेमरा में होगा अंतिम संस्कार
रामगढ़। झामुमो के संस्थापक, झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद उनके पैतृक गांव में भी मातम का माहौल देखने को मिल रहा है। घर पर फिलहाल सन्नाटा पसरा हुआ है। झामुमो के कार्यकर्ता और गांव के लोग काफी मर्माहत दिख रहे हैं।गुरु जी शिबू सोरेन के निधन ने सबको स्तब्ध कर दिया है। रामगढ़ जिले के नेमरा में स्थित यह दिवंगत दिशोम शिबू सोरेन के पैतृक आवास में उनके रिश्तेदार और कार्यकर्ता मौजूद हैं और घर के आसपास साफ सफाई और तैयारी का काम चल रहा है।

कार्यकर्ताओं और अधिकारियों का जमावड़ा उनके पैतृक आवास में लगा हुआ है।बड़ी संख्या में झामुमो के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन की पूरी टीम मौजूद है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं और प्रशासनिक तौर पर तैयारी जोरों पर चल रही है। लुकैयाटाड सोना सोबरन हाई स्कूल के सामने मैदान में हेलीपैड बनाया जा रहा है।टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत की जा रही है, साथ ही साथ श्मशान घाट जाने वाले मार्ग को भी दुरुस्त जिला प्रशासन द्वारा कराया जा रहा है।दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक निवास स्थान पहुंचेगा।पूरे धार्मिक रीति रिवाज के साथ यहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जेएमएम के जिला उपाध्यक्ष चित्रगुप्त महतो ने कहा कि झामुमो के संस्थापक के साथ-साथ गुरुजी हम लोगों के अभिभावक थे।केवल उनकी उपस्थिति ही हम लोगों में ऊर्जा और आत्मविश्वास भर देती थी। उनके संघर्ष का परिणाम है कि आज हम अपने अलग झारखण्ड राज्य में रह रहे हैं।
जेएमएम के सोनाराम ने कहा कि गुरु जी के निधन की खबर ने हम लोगों को अंदर से कमजोर कर दिया है।हम लोग काफी मर्माहत हैं। उन्होंने गरीबों के हित और उनके उत्थान में अपना सर्वस्व जीवन न्योछावर कर दिया है।
झामुमो के रामगढ़ जिला अध्यक्ष विनोद किस्कु ने कहा कि गुरुजी ने अलग झारखण्ड राज्य के लिए संघर्ष किया और उनके संघर्ष का परिणाम है कि आज झारखण्ड राज्य अलग हो पाया है।वह आदिवासियों के साथ-साथ गरीबों के मसीहा थे।उन्होंने अपने जीवन में इतना संघर्ष किया है कि कोई उनके संघर्षों की कल्पना सपनों में भी नहीं कर सकता है।उनके दिवंगत हो जाने से हम काफी दुखी हैं। यह समझ में नहीं आ पा रहा है कि हम क्या करें। दुखों का पहाड़ हम लोगों पर टूट पड़ा है।
पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चचेरे भाई किशोरी सोरेन ने कहा कि व्यक्तिगत के साथ-साथ सभी को क्षति हुई है।उनके रहने से एक ऊर्जा और शक्ति मिलती थी। अब उनके नहीं रहने का हम सबको काफी गम है।
वहीं स्थानीय लोगों ने भी संथाली भाषा में कहा कि दिशोम गुरु उनके लिए भगवान से कम नहीं थे।उनके नहीं रहने का दुख काफी है।दुखों का पहाड़ उन पर टूट पड़ा है। वह उनके पैतृक घर पर आए हैं, यह जानने के लिए कि वह कब आएंगे और उनके अंतिम दर्शन कब मिलेंगे।

