राँची के भगवान बिरसा जैविक उद्यान हुआ और गुलजार, अलीपुर जू से पहुंची मादा जिराफ और सिल्वर फिजेंट का जोड़ा

 

राँची।बिरसा मुंडा जैविक उद्यान, ओरमांझी और भी ज्यादा गुलजार हो गया है। इस उद्यान में कोलकाता के अलीपुर जू से 6 साल की मादा जिराफ और सिल्वर फिजेंट का एक जोड़ा लाया गया है। मादा जिराफ का नाम ‘ मिस्टी ‘ है।इसकी आयु करीब 6 साल है। चिड़ियाघर में जिराफ का औसत जीवनकाल 19 से 20 साल और प्राकृतिक आवास में 17 से 18 साल तक होता है।जैविक उद्यान निदेशक जब्बार सिंह ने यह जानकारी दी है।निदेशक ने बताया कि उत्तरी जिराफ की प्रजाति केन्या, दक्षिण सूडान, चाड, नाइजर और मध्य अफ्रीकी गणराज्य के कुछ संरक्षित स्थानों पर पाई जाती है। यह एक शाकाहारी जीव है जिसको पेड़ की पत्तियां और घास खिलाया जाता है।

मादा जिराफ की ऊंचाई करीब 12 फीट है। इसके लिए 14 फीट ऊंचा खास तरह का बाड़ा तैयार किया गया था।लिहाजा, ट्रेलर में लादने के बावजूद जमीन से इसकी ऊंचाई 16-17 फीट थी। इस वजह से कोलकाता से राँची लाने में करीब 24 घंटे लग गये। सिल्वर फिजेंट का जोड़ा भी बेहद आकर्षक है। यह तितर परिवार का पक्षी है जो पूर्वी एशिया के जंगलों और पहाड़ों में पाया जाता है।

जिराफ को जैविक उद्यान लाये जाने पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यप्राणी एवं मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक, झारखण्ड, परितोष उपाध्याय मौजूद थे। उन्होंने जिराफ को सुरक्षित रूप से नाइट शेल्टर में अंदर किए जाने की प्रक्रिया भी देखी।इस आदान-प्रदान के बदले भगवान बिरसा जैविक उद्यान,राँची की ओर से फिलहाल शुतुरमुर्ग भेजा जा रहा है।अगले चरण में स्वीकृत शेष प्राणियों दरियाई घोड़ा, हिमालयन काला भालू और घड़ियाल का आदान-प्रदान किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि यह जिराफ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा।

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