ऑपरेशन सिंदूर में शहीद जवान के घर आई नन्ही परी…माँ ने कहा-बेटी को सेना में कराएंगे भर्ती
धनबाद।भारत देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद टैंक ऑपरेटर रामबाबू कुमार सिंह की पत्नी अंजलि ने 21 अगस्त 2025 को एक बेटी को जन्म दिया है।परिवार ने बच्ची का नाम राम्या रखा है, जो उनके पिता रामबाबू के नाम से जुड़ा हुआ है।बेटी के जन्म के बाद पूरे परिवार में जहां खुशी का माहौल है, वहीं शहीद की अनुपस्थिति ने सबकी आंखें नम कर दी हैं।
रामबाबू हमेशा से चाहते थे कि उन्हें एक बेटी हो।किस्मत ने उनकी यह चाहत पूरी की लेकिन अफसोस यह रहा कि बेटी को देखने के लिए वे अब इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं।शहीद की पत्नी अंजलि ने कहा कि उनके पति अक्सर कहा करते थे कि अगर बेटी होगी तो घर की रौनक बढ़ जाएगी।आज उनकी इच्छा पूरी तो हुई है, मगर दुख इस बात का है कि वह अपनी नन्हीं परी को गोद में लेने के लिए जीवित नहीं हैं लेकिन पूरे परिवार को उनकी शहादत पर गर्व है।
अंजलि खुद एथलेटिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं।उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को उसी जज्बे और हौसले के साथ बड़ा करेंगी, जैसा उनके पति चाहते थे।उनके अनुसार राम्या केवल उनकी बेटी नहीं बल्कि शहीद की याद और अमानत है। रामबाबू और अंजलि का रिश्ता 2017 से शुरू हुआ था और लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ रहने के बाद 14 दिसंबर 2024 को उनकी शादी हुई।लेकिन शादी के महज पांच महीने बाद ही किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि 14 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर में चल रहे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रामबाबू ने देश की रक्षा करते हुए शहादत दे दी।
रामबाबू कुमार सिंह की शहादत की खबर ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। हालांकि परिवार और समाज दोनों ही इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि रामबाबू ने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए. अब बेटी राम्या के जन्म से परिवार के दिलों में नई उम्मीद जगी है।एक ओर जहां सबको यह गर्व है कि शहीद की इच्छा पूरी हुई, वहीं यह कसक भी है कि उनकी नन्हीं बेटी अपने पिता के स्नेह से वंचित रहेगी।
अंजलि के परिजनों ने कहा कि रामबाबू की शहादत हमेशा गर्व का विषय रहेगी और अब राम्या ही वह धरोहर है, जो शहीद की यादों को हमेशा जीवित रखेगी। उनकी इच्छा है कि वो राम्या को सेना में भेजेंगे।जिससे वह अपने पिता के शहादत की बदला ले सके।

