केस में आरोपी बनाकर पुरानी दुश्मनी साधने वाला दारोगा रामसुधीर सिंह जिला बदर….

 

राँची।झारखण्ड पुलिस के दारोगा रामसुधीर सिंह को खूंटी से जिलाबदर कर दिया गया है। प्रशासनिक आधार पर निलंबन के दौरान रामसुधीर का तबादला खूंटी जिला बल से सिमडेगा कर दिया गया है। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। खूंटी एसपी की रिपोर्ट के आधार पर दारोगा के खिलाफ मुख्यालय ने कार्रवाई की है। गौरतलब है कि दारोगा रामसुधीर सिंह का जिस व्यक्ति के परिवार के साथ जमीन को लेकर बीते तीन दशकों का विवाद चल रहा था, उसे अफीम की खेती के आरोप में बदले की भावना से आरोपी बना दिया। पीड़ित व्यक्ति के भाई ने जब मामले की शिकायत की, तब खूंटी एसपी ने पूरे मामले की जांच एसडीपीओ से करायी तो सनसनीखेज खुलासा हुआ था।

खूंटी एसपी ने जानबूझकर कर्तव्य में लापरवाही, पद के दुरुपयोग और पुलिस की छवि धूमिल करने के आरोप में दारोगा रामसुधीर सिंह को निलंबित कर दिया था। पूरे मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय को जांच रिपोर्ट भेजी गई थी। खूंटी एसपी की रिपोर्ट पर ही अब डीजीपी ने कार्रवाई की है।

रामसुधीर खूंटी के सायको थाने में अफीम की खेती से जुड़े केस 13/25 के अनुसंधान पदाधिकारी थे। इस केस में लाखा पाहन नाम का व्यक्ति मुख्य आरोपी है। जांच के क्रम में लाखा पाहन की गलत स्वीकारोक्ति बना अमरेंद्र कुमार का नाम डाल दिया था। इसके बाद अमरेंद्र कुमार को अफीम की खेती कराने वाले मास्टरमाइंड के तौर पर केस डायरी में अंकित कर दिया गया था।

इधर राँची के नामकुम थानेदार सह इंस्पेक्टर मनोज कुमार का निलंबन आदेश डीजीपी अनुराग गुप्ता ने रद्द कर दिया है। नामकुम पुलिस के द्वारा खुशी तिवारी नाम की युवती को जेल भेजने के मामले में आदेश के उल्लंघन के आरोप में नामकुम थानेदार को डीजीपी ने 11 अक्तूबर को निलंबन किया था। हालांकि, बाद में इंस्पेक्टर मनोज कुमार के द्वारा पूरे मामले में पक्ष रखा गया, जिसके बाद डीजीपी ने अपने स्तर से मामले की समीक्षा की व पाया कि इंस्पेक्टर की भूमिका पीड़िता को जेल भेजने में नहीं है। केस में अनुसंधान पदाधिकारी का निलंबन बरकरार रखा गया है

 

दारोगा का जिससे था विवाद,उसे फर्जी केस में फंसाया,एसपी के निर्देश पर जांच हुई तो झूठी रिपोर्ट की पोल खुल गई…दरोगा सस्पेंड..

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