गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड:कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग कर हुई थी हत्या…हाइकोर्ट ने 11 साल बाद कुख्यात विकास तिवारी समेत अन्य किया बरी

 

राँची।झारखण्ड के हजारीबाग कोर्ट में गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव सहित तीन लोगों के हत्याकांड के दोषी कुख्यात विकास तिवारी,संतोष पांडेय,दिलीप साव,राहुल पांडेय समेत अन्य को झारखण्ड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।हाईकोर्ट ने विकास तिवारी,संतोष पांडेय,दिलीप साव राहुल पांडेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड में बरी कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ में दोषियों की याचिका पर सुनवाई हुई।

बता दें इससे पहले हजारीबाग सिविल कोर्ट ने उक्त लोगों को सुशील श्रीवास्तव की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। 2 जून 2015 को हज़ारीबाग़ कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े कोर्ट में पेशी के लिए आए सुशील श्रीवास्तव, सहयोगी कमाल खान,ग्यास खान की हत्या भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एके- 47 से कर दी गई थी।

2 जून 2015 को कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच सुशील श्रीवास्तव की हत्या में एके- 47 हथियार का इस्तेमाल किया गया था।ऐसा पहली बार हुआ था, जब झारखण्ड में अपराधियों वे एके-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल किया।इस क्रम में दो अन्य मो. कलाम और ग्यास खान की भी मौत हो गयी थी।घटना के बाद सुशील श्रीवास्तव की सुरक्षा में लगे 19 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया था।इस हत्याकांड के बाद सदर थाने में कांड संख्या 610/15 दर्ज किया गया था।जिसके बाद पुलिस ने एक अगस्त 2015 को दिल्ली से विकास तिवारी को गिरफ्तार किया।

इनकी हुई थी हत्या:गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव, गयास खान उर्फ गयासुद्दीन खान (भुरकुंडा रिवर साइड) व मो कमाल (जमुई, बिहार),घायल : घायल हवलदार देवेंद्र पासवान, रामगढ़ डीसी के बड़ा बाबू जोलेन सोरेन, अधिवक्ता अश्विनी कुमार और राजेश भारती।पुलिस ने किया जब्त : एके-47, दो खाली मैगजीन, 22 खोखा, बोलेरो (जेएच12बी/ 1694) और उसमें रखे एक आंसू बम, एक फाइल व ड्राइविंग लाइसेंस

 

कौन था सुशील श्रीवास्तव:
सुशील श्रीवास्तव शुरुआती दिनों में भोला पांडेय गिरोह का सदस्य था, पर बाद में अलग हो गया था।भोला पांडेय व सुशील श्रीवास्तव की दुश्मनी हो गयी। 20 सालों से दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी।बाद में भोला पांडेय की हत्या कर दी गयी।इसके बाद किशोर पांडेय के हाथ में गिरोह का संचालन आ गया था।उसके बाद जमशेदपुर में किशोर पांडेय की भी हत्या कर दी गयी थी। दोनों की हत्या में सुशील श्रीवास्तव का ही नाम आया था। 1996-97 में सुशील ने राँची जेल में भोमा सिंह की हत्या ब्लेड से कर दी थी।इस मामले में वह उम्र कैद की सजा काट रहा था।सुशील का रामगढ़, कुजू, भुरकुंडा, पतरातू, राँची, खलारी में आतंक था।जेल में रह कर भी वह कोयला और स्क्रैप के कारोबारियों से रंगदारी वसूलता था। उस पर धनबाद, नवादा, दुमका, राँची, जमशेदपुर, रामगढ़ में 20 मामले दर्ज थे।

 

 

 

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