पंचतत्व में विलीन हुए दिशोम गुरुजी…सीएम हेमन्त सोरेन ने दी मुखाग्नि..नम आंखों से लोगों ने दी अंतिम विदाई…उमड़ा जन सैलाब
राँची/रामगढ़।दिशोम गुरु के नाम से मशहूर वरिष्ठ आदिवासी नेता शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर का मंगलवार को उनके पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हो गया। देश के शीर्ष राजनेताओं से लेकर आम लोगों तक जनसैलाब रामगढ़ जिले के नेमरा में उमड़ पड़ा।झामुमो के सह-संस्थापक के पैतृक गांव में गमगीन माहौल के बीच हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। जैसे ही उनके बड़े बेटे और झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिबू सोरेन की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों ने ‘गुरुजी अमर रहें’ के नारे लगाए।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को पारंपरिक रीति- रिवाज एवं रस्म के साथ दी मुखाग्नि
रामगढ़ जिला के गोला प्रखंड स्थित पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दिवंगत शिबू सोरेन जी का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी ने पिता के पार्थिव शरीर को पारंपरिक रीति- रिवाज तथा रस्म के साथ मुखाग्नि दी। इस दौरान हर किसी की आंखें नम थी।

अंतिम जोहार के लिए उमड़ा जन सैलाब
क्या आम और क्या खास, दिवंगत शिबू सोरेन जी के अंतिम जोहार के लिए नेमरा गांव में जन सैलाब उमड़ पड़ा था। उनके अंतिम दर्शन के लिए राज्य के अलग-अलग कोनों से लोग पधारे थे। इनमें अति विशिष्ट व्यक्ति से लेकर आम जन तक, हर कोई शामिल था। हर किसी ने झारखंड राज्य के प्रणेता, पथ प्रदर्शक औऱ मार्गदर्शक दिशोम गुरु जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान हर किसी का दिल उदास, व्यथित और आंखें नम थी।
रो पड़ा पूरा नेमरा
यूँ तो दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के निधन की जानकारी मिलने के बाद से ही उनके पैतृक गांव नेमरा में उदासी और सन्नाटा पसर चुका था। हर कोई गमगीन था। घरों में चूल्हे तक नहीं जले थे। वहीं, आज जैसे ही दिशोम गुरु जी का पार्थिव शरीर पैतृक आवास पहुंचा, पूरा नेमरा रो उठा। परिजन एवं सगे- संबंधी समेत राज्य के दूर दराज से आए लोगों की आंखों से आंसू छलक रहे थे। सभी ने दिशोम गुरु जी को नमन कर अन्तिम विदाई दी।
राँची के मोरहाबादी स्थित उनके सरकारी आवास से विदाई यात्रा शुरू हुई जो सबसे पहले विधानसभा पहुंची। यहां कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक जगत से जुड़े लोगों ने नम आंखों से शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी। मोरहाबादी से विधानसभा परिसर तक गुरु जी अंतिम जोहार, विनम्र श्रद्धांजलि नाम से बड़े-बड़े होर्डिंग उनके यादों को ताजा कर रही थीं।
बड़ी संख्या में लोग चौक-चौराहों पर लोग गुरु जी अमर रहे, गुरु जी जिंदाबाद के नारे लगाते दिखे। इस दौरान पूरे मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। मंगलवार को अपराह्न करीब 2.30 बजे शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव नेमरा पहुंचा। वाहन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बेटे बसंत सोरेन अपने पिता के सिरहाने बैठ थे।
पैतृक घर पहुंचने के बाद संथाली रीति रिवाज से अंतिम विदाई की तैयारी की गई। सोरेन परिवार के पूर्वजों का अंतिम संस्कार जिस घाट पर होता है, वहीं दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भी मुखाग्नि दी गई। मुखाग्नि के दौरान बारिश के बीच बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। शिबू सोरेन अमर रहे का नारा आसमान में गुंजायमान होता रहा।
शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा उनके घर से अपराह्न करीब 3.40 बजे निकली। करीब 4.15 बजे उन्हें मुखाग्नि दी गई। गुरुजी की अंतिम यात्रा में कई नेता, मंत्री, सांसद, विधायक, राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव अविनाश कुमार के अलावा कई जिलों के एसपी, डीसी सहित अन्य अधिकारी और वीआईपी मौजूद थे।
शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर जिस वाहन पर रखा गया था, उसके आगे की तरफ अंतिम जोहार लिखा हुआ था। वहीं, वाहन में उनके दोनों बेटे हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन सहित सोरेन परिवार के खास लोग ही बैठे थे। शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के एक अस्पताल में किडनी संबंधी बीमारियों के इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 81 साल के थे।

