राजधानी राँची में दूल्हे की आत्महत्या पर डीजीपी गंभीर, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश, मांगी गई रिपोर्ट

 

राँची।राजधानी राँची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र में बारात निकलने से ठीक पहले दूल्हे के द्वारा खुद की जान लेने के मामले को लेकर झारखण्ड पुलिस मुख्यालय ने गंभीर रुख अपनाया है।प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा ने मामले की जांच के लिए राँची आईजी मनोज कौशिक को जिम्मेदारी दी है।साथ ही आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन हाजिर करने का भी आदेश जारी किया गया है।

पुलिस मुख्यालय के द्वारा जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि प्रभात खबर में छपी खबर “बारात निकलने से ठीक पहले दूल्हे के द्वारा आत्महत्या” को लेकर पुलिस महानिदेशक सह पुलिस महानिरीक्षक झारखण्ड ने संज्ञान लिया है। डीजीपी ने राँची के आईजी और एसएसपी को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डीजीपी ने पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराने और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।इसके लिए इसके लिए राँची आईजी को मामले की निगरानी करते हुए सभी पहलुओं की तहकीकात करने को कहा गया है, ताकि दूल्हे की मौत के कारणों और पुलिस पर लगाए गये कथित प्रताड़ना के आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि आरोपों से जुड़े सभी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को तत्काल लाइन हाजिर किया जाए, जिससे निष्पक्ष जांच में कोई बाधा न हो। साथ ही, अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे मृतक के परिजनों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूर्व में हुई किसी भी पुलिस कार्रवाई की बारीकी से जांच करें।

बता दें कि 29 नवंबर को राँची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र के किशोरगंज रोड नंबर 5 में शादी की खुशियां अचानक मातम में बदल गई थी। दरअसल, नितेश पांडे नामक युवक जो रेलवे में कार्यरत था, उसकी शनिवार को ही शादी थी, लेकिन इससे पहले ही उसने आत्महत्या कर ली। नितेश की आत्महत्या को लेकर परिजनों ने सुखदेव नगर पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है। इसी वजह से पुलिस को लेकर मौके पर आक्रोश था। परिजनों ने आत्महत्या की वजह पुलिस प्रताड़ना बतायी है।

नितेश के भाई नीरज पांडेय ने बताया कि 26 नवंबर को उसका तिलक था।इसी बीच प्रियंका नाम की एक लड़की ने उस पर यौन शोषण का आरोप लगा कर केस कर दिया। थाना से बिना किसी जांच के नितेश को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद उसे छोड़ने के लिए वरीय पुलिस अधिकारियों को मैनेज करने के नाम पर दस लाख रुपये भी वसूले गए।

भाई नीरज पांडे ने बताया कि थाने के मुंशी परशुराम कभी एक लाख तो कभी दो लाख की मांग करता था, कभी सिटी एसपी, तो कभी कोतवाली डीएसपी के नाम पर पैसे की मांग की जाती थी। थाने से छोड़ने के बावजूद आरोप लगाने वाली लड़की उसे बहुत परेशान कर रही थी, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या कर लिया।

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