बोकारो जमीन घोटाला:झारखण्ड सीआईडी ने राजवीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक पुनीत अग्रवाल को किया गिरफ्तार
राँची।झारखण्ड के बोकारो में वन व राजस्व विभाग की 103 एकड़ भूमि फर्जी दस्तावेज के आधार पर हड़पने के जुड़े केस में सीआईडी ने तीसरी गिरफ्तारी की है। सोमवार को सीआईडी की टीम ने राँची के लालपुर इलाके के एसजी एक्जोस्टिका अपार्टमेंट से राजवीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक पुनीत कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार किया। इसके पहले सीआईडी ने शनिवार को जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने वाले इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन को गिरफ्तार किया था। सीआईडी ने जांच में पाया है कि राजवीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक पुनीत अग्रवाल ने उमायुष नाम की कंपनी के खाते में 3.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे।इसके बाद इस पैसे का इस्तेमाल करते हुए सरकारी जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई थी। गिरफ्तारी के बाद पुनीत अग्रवाल ने जमीन घोटाले में अपनी संलिप्तता कबूली है। सीआईडी ने पाया है कि जमीन हड़पने के लिए सेल सर्टिफिकेट, हिब्बानामा, दाखिल-खारिज वाद और निर्गत रशीद सारी चीजें फर्जी हैं।
क्या है पुनीत अग्रवाल की भूमिका
बोकारो में वन व राजस्व विभाग की 103 एकड़ जमीन की पॉवर आफ एटार्नी इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन ने शैलेश कुमार सिंह को दी। इसके बाद शैलेश कुमार सिंह ने उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक ललन सिंह को केवाला के माध्यम से सरकारी भूमि की बिक्री कर दी। सीआईडी ने जांच में पाया है कि उमायुष कंपनी का निर्माण 1 फरवरी 2021 को किया गया। तब इसके खाते में महज दो लाख रुपये थे। कंपनी बनने के आठवें दिन 8 जनवरी 2021 को राजवीर कंस्ट्रक्शन से उमायुष के खाते में 1.80 करोड़ व दसवे दिन 1.20 करोड़ जमा कराए गए। इस रकम का इस्तेमाल वन भूमि की रजिस्ट्री कराने में किया गया। सरकारी राशि का भुगतान इसी पैसे से किया गया। बाद में भी 40 लाख रुपये उमायुष मल्टीकॉम के खाते में राजवीर कंस्ट्रक्शन के द्वारा किया गया। सीआईडी ने जांच में पाया है कि अभियुक्तों ने न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद गलत ढंग से जमीन की रजिस्ट्री करा ली। ईडी भी कर चुकी है जांच बोकारो जमीन घोटाले में ईडी ने भी 22 अप्रैल को राजवीर कंस्ट्रक्शन के ठिकानों पर छापेमारी की थी, तब कंपनी के बांका स्थित ठिकाने से ईडी ने 1.30 करोड़ रुपये बरामद किए थे। ईडी की जांच में भी राजवीर कंस्ट्रक्शन की भूमिका संदिग्ध के तौर पर सामने आयी थी।

