जितना आसानी से अपहरण की योजना बनायी थी,उतने ही आसानी से पुलिस की गिरफ्त में भी आए गए अपराधी…मुख्य आरोपी रुद्रांश और विकास के मंसूबे पर पानी फेर दिया राँची पुलिस ने…
राँची।राजधानी राँची में बुधवार को हुए स्कूली छात्रा अपहरण कांड में शामिल एक नाबालिग सहित आधा दर्जन अपराधियों को राँची पुलिस ने अपहरण की घटना के करीब 6 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।सभी पांच आरोपियों को आज गुरुवार को जेल भेज दिया गया है। वहीं एक नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है।बता दें बुधवार की सुबह करीब आठ बजे फायरिंग कर एक स्कूली छात्रा के अपहरण ने राजधानी में सनसनी फैला दी थी,लेकिन राँची पुलिस ने घटना के कुछ ही मिनटों में त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी और पुलिस ने अपहरण के मात्रा दो घंटे के भीतर छात्रा को सुरक्षित बरामद कर लिया और कुछ ही घण्टे में छह अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार नाबालिग 12वीं क्लास का छात्र है। 
गिरफ्तार 6 आरोपी-वसीम,ऋषभ,पीयूष, रुद्रांश, नाबालिग और विकास
पूरी कार्रवाई में रामगढ़ पुलिस का बड़ा योगदान रहा
अपहरण की घटना के बाद राँची पुलिस की सुचना पर रामगढ़ पुलिस ने भी बिना देर किए राँची पुलिस का सहयोग किया और छात्रा को रामगढ़ के कुज्जू से बरामद कर लिया गया है।वहींं, पुलिस की टीम ने रामगढ़ के गोला से चार अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है।वहीं,देर शाम दो और आरोपी चर्च रोड से पीयूष कुमार और फर्जी नम्बर प्लेट बनाने वाले बसीम को भी गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में किया खुलासा
गिरफ्तार अपहरणकर्ताओं ने पूछताछ में खुलासा किया है कि फल कारोबारी की बेटी का अपहरण कर लाखों की फिरौती वसूलने के लिए किया था।इसकी पूरी प्लानिंग छात्रा के पड़ोस में रहने वाले रूद्रांश विश्वकर्मा,विकास कुमार और ऋषभ वर्मन ने अपने साथियों के साथ मिलकर किया था और अंजाम भी दिया।गिरफ्तार आरोपियों में चर्च रोड निवासी रूद्रांश विश्वकर्मा, मेन रोड के विकास कुमार दास, अरगोड़ा के ऋषभ बर्मन,पीयूष कुमार,मो.वसीम और एक नाबालिग शामिल है।
एक सप्ताह से अपराध करने की योजना बनायी जा रही थी,अपहरण या बड़ी लूट की भी योजना थी…
गिरफ्तार मुख्य साजिशकर्ता और अपराधी रूद्रांश विश्वकर्मा पड़ोस के रहने वाली छात्रा के परिजन को अच्छी तरह से जानता है।उसे लगा आपराधिक घटना को अंजाम देकर रूपया कमाया जा सकता है।उसने विकास ,पीयूष और ऋषभ के साथ मिलकर कोई बड़ा अपराध किया जाए ।बड़ी लूट या अपहरण जैसे घटना को अंजाम देने प्लांनिग शुरू की गई।योजना बनी की अपहरण किया जाए।आखिर किसका अपहरण किया जाए जो आसानी से घटना को अंजाम देने के बाद मोटी रकम वसूला जाए।इसी दौरान रुद्रांश ने अपने पड़ोसी का नाम सुझाया और प्लांनिग बनी बच्ची का अपहरण करने की। आरोपी रूद्रांश फारेक्स ट्रेडिंग में पैसा लगाया करता है,लेकिन उसका पैसा डूब गया और उस पर कर्ज भी हो गया था।आरोपी को यह जानकारी थी कि छात्रा के पिता आफताब उर्फ सोनू फल विक्रेता हैं और उनके पास काफी पैसा है।इसी वजह से उसने बच्ची को टारगेट किया।तीन चार दिन पहले अपने साथियों के साथ मिलकर बच्ची के अपहरण की योजना बनायी।इसके लिए बच्ची की रेकी भी की गई।उसके बाद पहले 3500 में एक कट्टा और गोली खरीदा गया।वहीं एक दोस्त ने एक औऱ हथियार जुगाड़ किया।जब बुधवार सुबह टुकटुक से बच्ची स्कूल जाने लगी, तभी आरोपी अपनी कार से सिरमटोली फ्लाइओवर में टुकटुक में टक्कर मारा और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की।इसके बाद अपहरण की घटना को अंजाम दिया।
बुधवार को घटना देने से पहले विकास कुमार ने कार लेकर सुबह 6 बजे रुद्रांश और ऋषभ का इंताजर करमटोली के पास कर रहा था।विकास के पास मोबाइल नहीं था।उसी दौरान विकास ने वहां खड़े एक ट्रक चालक से मोबाइल लेकर रुद्रांश को फोन किया।जो नम्बर पुलिस को मिल गया।इसी नम्बर को ट्रैक कर पुलिस अपराधियों तक पहुँच गई।
करमटोली चौक के पास पीयूष बुलेट से रुद्रांश और ऋषभ को लेकर छोड़ने गया था।वहाँ से तीनों सवार होकर कर्बला चौक पहुँचा।जहां नाबालिग लड़का छात्रा की टोटो से आने का इंतजार कर रहा था।फिर टोटो जैसे आगे बढ़ा चारों कार पर सवार टोटो के पीछे लग गया।
भाड़े में लिया था कार, बदल दिया नंबर प्लेट
आरोपियों ने छात्रा के अपहरण के लिए ड्रीम कार कंपनी कांटाटोली से दो दिन पहले भाड़े पर कार लिया।उस कार का नंबर प्लेट पर स्कूटी का नम्बर मेन रोड रोस्पा टावर स्थित एक दुकान में बदलवाया।नम्बर प्लेट बनाने विकास गया था।कार विकास और रुद्रांश चलाने भी जानते थे।इस वजह से कंपनी से ड्राइवर को नहीं लिया। जिसके बाद आरोपियों ने भाड़े की कार से घटना को अंजाम दिया था।कार बुधवार को ही लौटाना था।
बच्ची को कार में रखकर,फिरौती लेने की थी प्लानिंग
पूछताछ में मुख्य आरोपी रुद्रांश और विकास ने पुलिस को बताया कि छात्रा को अगवा करने के बाद उसे कहीं जंगल में ले जाकर उसके पिता से फिरौती की मांग करते और जब पैसा मिल जाता तो बच्ची को छोड़ दिया जाता। बाहर ले जाने की योजना नहीं थी।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन लोगों ने अपना एक निक नाम भी रखा था, ताकि छात्रा उनके नाम पता नहीं कर सके.छात्रा के सामने रूद्रांश खुद को हसीबुल्ला, विकास को सन्नी के नाम से बुला रहे थे।वहीं, ऋषभ को बिट्टू और नाबालिग को प्रीतम को नाम से बुलाया जा रहा था।
पीयूष राँची में पुलिस की गतिविधियों की जानकारी ले रहा था,और रुद्रांश को पूरी जानकारी दी जा रही थी..
रुद्रांश,विकास,ऋषभ और पीयूष ने पुलिस को बताया कि प्लान के अनुसार, पीयूष को राँची में रहना था और अपहरण के बाद परिजन और पुलिस की पूरी जानकारी रुद्रांश को देना था।लेकिन राँची पुलिस की कार्रवाई से सभी घबरा गया औऱ घबराहट में पहले बच्ची को छोड़ा फिर सभी पुलिस को गिरफ्त में आ गए।
रजरप्पा मंदिर में पूजा भी किया
पूछताछ में अपराधियों ने बताया कि बच्ची को कुज्जु के पास छोड़ने के बाद कार लेकर घाटों की ओर बढ़ गई।रास्ते मे जंगल मे जाकर वहां फर्जी नम्बर प्लेट हटाया और ओरिजनल नम्बर कार में लगाया।उसके बाद चारो रजरप्पा मंदिर पहुँचा।वहां पूजा भी किया फिर कार लेकर गोला पहुँचा इसी दौरान राँची पुलिस वहां पहुँच गई ।चारो अपराधी दबोचे गए।
चुटिया के एक युवक और चुटिया पुलिस के एक सिपाही ने अपराधियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया…
अपहरण की घटना के बाद राँची पुलिस ने जिस प्रकार त्वरित कार्रवाई की है।उसका श्रेय दो और लोगों को जाता है।अगर दोनों ने अपनी भूमिका नहीं निभाते तो शायद अपराधी भागने में कामयाब भी हो सकता था।दरअसल, जिस वक्त अपराधी कार्तिक उरांव (सिरमटोली) फ्लाइओवर पर अपहरण की घटना को अंजाम दे रहा था।उसी वक्त चुटिया इलाके के एक व्यक्ति उधर से स्कूटी से जा रहे थे।उन्होंने घटना को सामने होता देख लिया और जिस कार से अपराधी घटना को अंजाम दे रहा था उस कार की नम्बर नोट कर लिया। जब अपराधी फायरिंग कर रहा था उन्होंने अपनी गाड़ी तुरंत चुटिया थाना की ओर मोड़ दिया।उन्होंने तुंरत घटना के सम्बंध में चुटिया थाना पदस्थापित पुलिसकर्मी जेके मिश्रा को दिया।जेके मिश्रा ने इसकी जानकारी तुरंत पीसीआर को दिया और पीसीआर पुलिस को सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँचीं।इसी बीच जानकारी चुटिया थाना प्रभारी लक्ष्मीकांत को दी गई।थाना प्रभारी ने घटना की सूचना एसएसपी को देते हुए चुटिया पुलिस अपराधी की पीछे लग गई।एसएसपी ने जिले के सभी थानों को अलर्ट किया और सड़क पर वाहन चेकिंग अभियान शुरू करवाया।साथ ही खूँटी,लोहरदगा, रामगढ़, लातेहार, हज़ारीबाग पुलिस को सूचना प्रदान की और राँची पुलिस का ऑपरेशन शुरू हो गया।राँची के करीब ढेड़ दर्जन थानेदार को अपराधियों के पीछे लगाया गया।लेकिन फिर भी अपराधी पुलिस को चकमा देकर राँची जिला पार कर गया।लेकिन रामगढ़ एसपी की सटीक नाकेबंदी को पार नहीं कर पाया।पुलिस ने बच्ची सकुशल बरामद और आधा दर्जन अपराधी को गिरफ्तार कर लिया।
वहीं फर्जी नम्बर प्लेट बनाने वाले दुकानदार मो.वसीम ने बताया कि उसे इस सम्बंध में कोई जानकारी नहीं थी की नम्बर प्लेट फर्जी बनवाया जा रहा है।चूंकि विकास से जान पहचान था।वही नम्बर प्लेट बनाने आया था।कहा कि उसकी कार का नम्बर प्लेट टूट गया है।इसलिए नया बना दो।उसने नम्बर प्लेट बनाकर दे दिया।उससे ज्यादा उसे कुछ नहीं मालूम है।उससे एक बड़ी गलती हो गया कि बिना गाड़ी देखे ही नम्बर प्लेट बनाकर दे दिया।
अपहरण की घटना को कुछ ही घण्टो में खुलासा करने में इन पुलिस अधिकारी,पुलिस पदाधिकारी और पुलिसकर्मियों के बहुत बड़ा योगदान रहा है।राँची के एसएसपी चंदन सिन्हा,ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर,सिटी डीएसपी केवी रमन,रामगढ़ एसपी अजय कुमार,रामगढ़ एसडीपीओ,मांडू थाना प्रभारी,चुटिया थानेदार सह इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत, चुटिया थाना के एसआई,विवेक कुमार,जितेंद मिश्रा,निरंजन महतो,खादगढ़ा टीओपी प्रभारी दिवाकर,एएसआई भीम सिंह,एएसआई बिष्णु पांडेय, एएसआई अरविंद सिंह और एसएसपी का क्यूआरटी टीम और टेक्निकल टीम ने बड़ा योगदान दिया है।

