राँची में गर्भवती सीएचओ की मौत, सदर अस्पताल की महिला डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप…
राँची।जिले के कांके की कुम्हारिया की कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर प्रतिमा कुमारी की राँची सदर अस्पताल में डिलीवरी के दौरान स्थिति बिगड़ने से हुई मौत से राज्यभर के सीएचओ आक्रोशित हैं। प्रसव के समय इलाज में कोताही का आरोप लगाते हुए शनिवार को राँची जिले के अलग-अलग प्रखंडों से बड़ी संख्या में महिला सीएचओ सदर अस्पताल पहुंच गईं और सिविल सर्जन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।साथ ही इलाज में कोताही बरतने वाली महिला चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग की।
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झारखण्ड राज्य सीएचओ संघ की प्रदेश अध्यक्ष सोनी प्रसाद ने बताया कि सदर अस्पताल में लगातार गायनी विभाग में लापरवाही की खबर मिलती रहती हैं।उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी कांके की एक नर्स की मौत इसी तरह इलाज के दौरान हो गई थी।
सीएचओ संघ की प्रदेश अध्यक्ष सोनी प्रसाद ने कहा कि माइल्ड डिलीवरी पेन के साथ प्रतिमा सदर अस्पताल पहुंचीं थी। उनका सदर अस्पताल की जगह बगल के निजी अस्पताल में अल्ट्रा सोनोग्राफी कराई गई, फिर एक यूनिट ब्लड इंतजाम करने को कहा गया और इस बीच बिना अनुमति के प्रतिमा का ऑपेरशन कर दिया गया। सोनी प्रसाद ने आरोप लगाया कि जब स्थिति खराब हो गई तो उसे रिम्स भेज दिया गया।
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने मीडिया को बताया कि सीएचओ की मौत से वह खुद मर्माहत हैं।उन्होंने दिवंगत प्रतिमा के मामले को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट बताते हुए कहा कि USG रिपोर्ट के अनुसार दिवंगत सीएचओ का मामला ‘प्लेसेंटा एकृता’ का आया था, लेकिन जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया तो मामला उससे भी आगे का यानी ‘प्लेसेंटा यूटरस के अंदर घुसा हुआ था और इसका एक्सटेंशन यूरिनरी ब्लाडर तक था, यह बहुत रेयर होता है।
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने इलाज में किसी तरह की कोताही या गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि तीन-तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सीएचओ की जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब मामला मल्टी ऑर्गन फेलियर में चला गया तो गाइडलाइन के अनुसार उसे रिम्स रेफर किया गया था।उन्होंने कहा कि फिर भी पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है।
आज सीएचओ संघ से जुड़ी दर्जनों कर्मियों ने सदर अस्पताल पहुंच कर मृतका के इलाज से जुड़े सभी मेडिकल कागजात उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया इलाज में कोताही हुई है।ऐसे में जो भी जांच कमेटी सिविल सर्जन बनाएं, उसमें सीएचओ संघ की ओर से भी एक सदस्य हो, ताकि जांच की विश्वसनीयता बनीं रहे।

