गुमला में सड़क पर खड़ा ट्रैक्टर बना काल, स्कूटी समेत अंदर घुसे चाचा-भतीजा; दर्दनाक हादसे में दोनों की मौत, लापरवाही पर उठे सवाल
गुमला। सड़क पर खराब होकर खड़ा एक ट्रैक्टर दो लोगों की मौत की वजह बन गया। झारखण्ड के गुमला जिले में शनिवार की रात घाघरा-लोहरदगा मुख्य पथ पर चाहत होटल के समीप एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी सवार चाचा-भतीजे की जान चली गई। बालू लदा ट्रैक्टर टायर पंचर होने के कारण सड़क पर खड़ा था। आरोप है कि दिन के उजाले में ही ट्रैक्टर का टायर पंचर हो गया था, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी उसे सड़क से हटाने की व्यवस्था नहीं की गई। रात करीब 10 बजे स्कूटी सवार दोनों लोग वहां पहुंचे और अंधेरे में सड़क पर खड़े ट्रैक्टर को देख नहीं सके। उनकी स्कूटी पीछे से ट्रैक्टर में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों स्कूटी समेत ट्रैक्टर के अंदर फंस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
मृतकों की पहचान जग बगीचा निवासी लिबन उरांव और नौडीहा निवासी 45 वर्षीय देवनारायण उरांव के रूप में हुई है। देवनारायण, लिबन के रिश्ते में चाचा लगते थे। एक ही हादसे में चाचा-भतीजे की मौत से परिवारों में मातम पसरा है। वहीं, इस घटना ने सड़क पर खराब वाहनों को सुरक्षित तरीके से हटाने और यातायात व्यवस्था की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिन में पंचर हुआ ट्रैक्टर, रात तक सड़क पर क्यों खड़ा रहा?
इस हादसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ट्रैक्टर का टायर दिन के उजाले में ही पंचर हो गया था, तो उसे घंटों तक सड़क पर खड़ा क्यों रहने दिया गया? क्या वाहन को सड़क से हटाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी? क्या दुर्घटना की आशंका को देखते हुए वहां पर्याप्त चेतावनी संकेतक या लाइट लगाए गए थे?स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर खड़ा ट्रैक्टर हादसे की प्रमुख वजह बना। उनका कहना है कि यदि खराब वाहन को समय रहते सड़क से किनारे कर दिया जाता या उसके आसपास पर्याप्त चेतावनी संकेतक और रात में दूर से दिखाई देने वाली लाइट लगाई जाती, तो संभव था कि इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।
हालांकि, हादसे के सभी कारणों और संभावित जिम्मेदारियों का निर्धारण पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगा। लेकिन घटना के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि सड़क पर खराब होकर खड़े भारी वाहनों को लेकर सुरक्षा के नियमों का पालन आखिर कितना हो रहा है।
स्कूटी समेत ट्रैक्टर के अंदर फंसे रहे दोनों, हाइड्रा से निकाले गए शव
हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद स्कूटी सवार दोनों लोग वाहन समेत ट्रैक्टर के अंदर फंस गए। घटनास्थल पर अफरातफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद हाइड्रा की सहायता से दोनों शवों को बाहर निकाला गया।घटना की सूचना मिलने पर घाघरा थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। हादसे की खबर फैलते ही आसपास के इलाके में शोक का माहौल बन गया।
जमशेदपुर की घटना के बाद भी क्या सबक नहीं लिया गया?
इस हादसे ने सड़क पर खराब होकर खड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। जमशेदपुर में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद कुछ समय तक खराब और खड़े वाहनों को हटाने, यातायात सुरक्षा और संबंधित जिम्मेदारियों को लेकर कार्रवाई की चर्चा हुई थी। लेकिन सवाल है कि ऐसी घटनाओं के बाद शुरू होने वाली सख्ती क्या लगातार जारी रहती है या कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है?गुमला की घटना के संदर्भ में यह सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि सड़क पर खड़ा भारी वाहन रात के अंधेरे में जानलेवा बाधा बन सकता है। यदि किसी वाहन का टायर पंचर हो जाए या वह तकनीकी खराबी के कारण सड़क पर रुक जाए, तो उसे बिना किसी चेतावनी व्यवस्था के घंटों तक छोड़ देना दूसरे वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
यहां केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि खराब वाहनों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर हटाने, सड़क पर मजबूरी में खड़े वाहनों के पीछे चेतावनी त्रिकोण और रिफ्लेक्टिव संकेतक लगाने तथा रात में पर्याप्त दृश्यता सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर प्रभावी ढंग से अमल हो।
हादसे के बाद कार्रवाई, लेकिन जवाबदेही किसकी?
गुमला में चाचा-भतीजे की मौत ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्या ट्रैक्टर चालक या मालिक ने सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए थे? क्या सड़क पर खड़े वाहन को हटाने के लिए समय रहते प्रयास हुआ? क्या संबंधित स्थान पर रात में वाहन चालकों को सतर्क करने की पर्याप्त व्यवस्था थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।फिलहाल पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन इस दर्दनाक हादसे का सबसे बड़ा सबक यही है कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटना के बाद जांच और कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खराब वाहनों को सड़क पर असुरक्षित ढंग से छोड़ने की स्थिति में समय रहते कदम उठाना भी उतना ही जरूरी है।

