CGL घोटाले का सनसनीखेज खुलासा: शादी के बदले नौकरी का सौदा… बेटी का रिश्ता तय कर आरोपी आनंद को रटवाए थे उत्तर, पढ़िए कैसे बेनकाब हुआ पूरा खेल…
–शादी के बदले दिलानी थी नौकरी, मास्टरमाइंड आईसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह अपनी बेटी का रिश्ता तय कर आरोपी आनंद को रटवाए थे उत्तर
–सीआईडी ने कोर्ट में किया खुलासा, आनंद भी था बोकारो के दुग्धा स्थित प्रश्न-उत्तर रटने वाले सेंटर पर, मोबाइल लोकेशन से मिली पूरी जानकारी…
राँची।सीजीएल परीक्षा 2023 के कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी ने अदालत के समक्ष एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। सिंडिकेट में केवल पैसों की उगाही ही नहीं, बल्कि शादी के बदले नौकरी का खेल भी चल रहा था। सीआईडी ने अदालत को बताया कि कथित मास्टरमाइंड व आईसीएन का संचालक मिथिलेश सिंह उर्फ आर के सिंह अपनी बेटी का विवाह आरोपी आनंद कुमार सिंह से तय करना चाहता था। इसी वैवाहिक समझौते के तहत आनंद का चयन पक्का कराने के लिए उसे लीक प्रश्न-उत्तर मुहैया कराए गए थे। केस डायरी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर रांची के अपर न्यायिक आयुक्त की विशेष अदालत ने आरोपी आनंद कुमार सिंह के अपराध को गंभीर मानते हुए उसकी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत में सीआईडी की ओर से पेश अपर लोक अभियोजक मनोज सिंह ने आनंद के पूरे नेटवर्क और गतिविधियों का सिलसिलेवार ब्योरा रखा है।
परीक्षा से एक दिन पहले आनंद का मोबाइल टावर लोकेशन दुग्धा में
सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि जांच के दौरान सामने आया कि मिथिलेश कुमार सिंह आरोपी आनंद को अपना दामाद बनाना चाहता था। इस रिश्ते के एवज में आनंद को परीक्षा पास कराने की गारंटी दी गई और उसे लीक सामग्री उपलब्ध कराई गई। हालांकि, बचाव पक्ष ने इसे केवल सामान्य पारिवारिक संबंध बताने का तर्क दिया, जिसे अदालत ने नहीं माना। सीआईडी ने सह-आरोपी उमेश राय के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर बताया कि परीक्षा से ठीक पहले बोकारो के दुग्धा स्थित एक बीसीसीएल क्वार्टर में अभ्यर्थियों का गुप्त जमावड़ा किया गया था। वहां रातभर अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर रटवाए गए। सीआईडी ने यह भी जानकारी दी है कि तकनीकी सेल की जांच के अनुसार, परीक्षा से एक दिन पहले आनंद की मोबाइल टावर लोकेशन बोकारो (दुग्धा क्षेत्र) में पाई गई। इसके तुरंत बाद उसने अपना फोन बंद कर लिया, जो इस बात का संकेत है कि वह अवैध ऑपरेशन में सक्रिय रूप से मौजूद था।
आनंद केवल लाभार्थी नहीं था, उसने गिरोह के लिए नए अभ्यर्थियों को भी जोड़ा
सीआईडी को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण से साबित हुआ कि आनंद के सगे चाचा अवधेश सिंह लगातार मास्टरमाइंड मिथिलेश और उसके परिजनों के सीधे संपर्क में बने हुए थे। आनंद केवल लाभार्थी नहीं था, बल्कि उसने गिरोह के लिए नए अभ्यर्थियों को जोड़ने और परीक्षा सेटिंग के नाम पर मोटी रकम वसूलने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। सीआईडी ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी है कि गिरोह ने संगठित तरीके से कई सुरक्षित ठिकाने तैयार किए थे। नेपाल के बीरगंज के अलावा पश्चिम बंगाल के नियामतपुर (आसनसोल), शितलपुर (दुर्गापुर), बिहार के पटना और झारखंड के दुग्धा (बोकारो) में सेफ हाउस बनाए गए थे, जहां परीक्षा से दो-तीन दिन पहले अभ्यर्थियों को जुटाकर प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए थे।
आरोपी मिथलेश ने बोकारो के सेफ हाउस में पत्नी को भी रटवाए थे उत्तर
सीआईडी ने कोर्ट को जानकारी दी है कि जांच और अदालत में पेश केस डायरी के अनुसार, मिथिलेश कुमार पांडेय परीक्षा धांधली के संगठित नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था। अदालत को बताया गया कि आरोपी ने परीक्षा से ठीक पहले बोकारो के दुग्दा स्थित एक ठिकाने पर अभ्यर्थियों को जुटाया था। इस ठिकाने पर न केवल बाहर से आए कई अभ्यर्थियों को लीक प्रश्न और उत्तर रटवाए गए, बल्कि मिथिलेश खुद अपनी पत्नी पूजिता पांडे को भी वहां लेकर गया था और उसे भी परीक्षा के उत्तर रटवाए गए थे। उसकी पत्नी पूजिता परीक्षा में बैठी जरूर थी। लेकिन सफल नहीं हो सकी। अदालत के समक्ष सीआईडी ने यह भी खुलासा किया कि आरोपी मिथिलेश पांडेय सिर्फ अभ्यर्थियों को जुटाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वित्तीय लेनदेन में भी उसकी सीधी हिस्सेदारी थी। जांच में पुष्टि हुई है कि गिरोह के कथित आईसीएन के संचालक मास्टरमाइंड रामकिशोर सिंह उर्फ मिथिलेश सिंह के जरिए मिथिलेश पांडेय के बैंक खाते में चेक के जरिए राशि ट्रांसफर की गई थी। इस पूरे रैकेट का मॉडस ऑपरेंडी यह था कि अभ्यर्थियों से एडवांस कैश, मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक पहले ही जमा करा लिए जाते थे, जबकि बाकी रकम रिजल्ट आने के बाद वसूली जानी थी।
कोलकाता के होटल एनके-07 में जुटाए थे अभ्यर्थी
सीआईडी ने केस डायरी और अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों से सिंडिकेट का बेहद चौंकाने वाला और संगठित मॉडस ऑपरेंडी उजागर किया है। सीआईडी ने बताया है कि एक और आरोपी मनु कुमार सिंह ने अपने शातिर सहयोगियों अमित सिंह, कुंदन कुमार और अमित लाकड़ा के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित होटल एनके-07 को अपना गुप्त बेस कैंप बनाया था। यहीं पर झारखंड और बिहार से चुने गए अभ्यर्थियों को गोपनीय तरीके से लाकर ठहराया गया था। परीक्षा से ठीक पहले होटल के कमरों में अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र और उत्तर की कॉपी दी गई और उन्हें तोते की तरह उत्तर याद करवाए गए थे। सीआईडी को आरोपी मनु कुमार सिंह के एचडीएफसी बैंक खाते में सह-आरोपी कुंदन कुमार के माध्यम से 5,00,000 रुपए ट्रांसफर किए जाने के पुख्ता डिजिटल व बैंकिंग साक्ष्य मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि मनु अभ्यर्थियों से नकद और ऑनलाइन पैसे वसूलता था और फिर गिरोह के दूसरे सदस्यों में रकम की बंदरबांट करता था।
पकड़े जाने पर कहा मैं आईटीआई पास, पिता के इलाज के लिए लिए थे पैसे
पैसे का लेन देन सामने आने के बाद मनु कुमार सिंह की ओर से कहा गया कि वह केवल आईटीआई डिप्लोमा धारक है और वह ग्रेजुएट भी नहीं है। इसलिए उसका सीजीएल परीक्षा से कोई सरोकार नहीं था। खाते में आए 5 लाख रुपए को लेकर उसने दलील दी है कि उसके पिता गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे थे और उन्होंने सह-आरोपी कुंदन कुमार से यह पैसा फ्रेंडली लोन के तौर पर लिया था।

