साइबर ठगी का ‘सिम कनेक्शन’…. 800 रुपये में बेचते थे फर्जी सिम, दो POS एजेंट गिरफ्तार

 

बोकारो। साइबर अपराधियों के खिलाफ बोकारो पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे दो POS एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिन पर फर्जी तरीके से सिम जारी कर साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी महज कुछ सौ रुपये के लालच में दूसरे लोगों के आधार और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर सिम एक्टिवेट करते थे।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चंदनकियारी निवासी प्रदीप दास (27) और गम्हरिया निवासी मुकेश गोप (20) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

140 से ज्यादा सिम अकेले प्रदीप ने दिए
एएसपी चास वेदांत शंकर के अनुसार, प्रदीप दास ने जुलाई-अगस्त के दौरान 140 से ज्यादा सिम साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए, जबकि मुकेश गोप ने इसी अवधि में 42 सिम दिए।
पुलिस का कहना है कि दोनों ने दूरसंचार विभाग के नियमों का उल्लंघन करते हुए सिम जारी किए थे।

दूसरे के आधार-फिंगरप्रिंट से एक्टिवेट करते थे सिम
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वे पैसों के लालच में दूसरे लोगों के आधार और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर सिम कार्ड एक्टिवेट करते थे।इसके बाद ये सिम पमित माथा, राहुल कुमार और विवेक चौधरी को दिए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, प्रत्येक सिम के बदले आरोपियों को करीब 800 रुपये मिलते थे।

फर्जी बैंक खाते से लेकर ठगी तक में इस्तेमाल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी बैंक खाते खोलने, फोन के जरिए ठगी करने और दूसरी आपराधिक गतिविधियों में किया जाता था।यानी सिम जारी करने से लेकर साइबर ठगी तक एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा था, जिसकी कड़ियां अब पुलिस जोड़ने में जुटी है।

अब सिम लेने वालों की तलाश
दोनों POS एजेंटों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने ये सिम लिए थे। पुलिस पमित माथा, राहुल कुमार और विवेक चौधरी समेत इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन फर्जी सिम के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया और साइबर अपराध से जुड़े इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

 

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