खुद को बताता था स्पेशल ब्रांच का अधिकारी,चाल-ढाल,रुतबा किसी पुलिस से कम नहीं था,शराब चोरी मामले में गया जेल…
गिरिडीह।झारखण्ड के गिरिडीह जिले में शराब की चोरी मामले में उत्पाद विभाग ने तीन दिन पूर्व तीन लोगों को जेल भेज दिया गया है। जिन लोगों को जेल भेजा गया है उसमें बिहार के नवादा का रहने वाला एक शशि कुमार भी है (शशि का भव्य मकान गिरिडीह में भी है )शशि की गिरफ्तारी के काफी चर्चा हो रही है,दरअसल शशि का नाता स्पेशल ब्रांच से रहा है।नाता ऐसा वैसा नहीं बल्कि यह खुद को स्पेशल ब्रांच का अधिकारी ही साबित करता रहा था।अभी तक गिरिडीह की जनता के साथ खास लोग यहां तक पुलिस महकमा भी शशि को स्पेशल ब्रांच का कर्मी ही समझते रहे हैं।
खुद को स्पेशल ब्रांच का पदाधिकारी बताने वाला शशि की चाल-ढाल, रुतबा किसी पुलिस से कम नहीं रहा था। कड़क मूंछ, हाथ में डायरी, रौब से बात करना इसकी आदत रही और इसी रुतबा को देखकर कोई भी एक झलक में ठिठक जाता था।किसी वीआईपी का कार्यक्रम हो या वीवीआईपी का स्पेशल ब्रांच की टीम के साथ शशि भी जाता और सुरक्षा का निरीक्षण करता रहा था। शशि पिछले लगभग डेढ़ दशक से खुद को स्पेशल ब्रांच से जुड़ा हुआ बताता रहा।
शराब चोरी मामले में शशि की गिरफ्तारी के बाद जब इसके सोशल मीडिया अकाउंट (फेसबुक) को खंगाला गया तो इसमें कई तस्वीरें मिलीं।किसी तस्वीर में पुलिस पदाधिकारी के बर्थ डे को सेलिब्रेट करते हुए शशि दिखता है।तो किसी में मुख्यमंत्री के आगमन से पहले कमरे की जांच करते हुए, तो कहीं केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करते हुए।
पुराना परिसदन भवन के कमरे पर कब्जा
बताया जाता है कि शशि की मनमानी पुराना परिसदन भवन में भी चलती रही थी। वर्षों पहले एक वक्त ऐसा था जब शशि ही तय करता था किसे कमरा मिलना है। कौन किस कमरे में ठहरेगा।हालांकि इसी परिसदन भवन के कमरे में रखे शराब की चोरी में वह पकड़ा गया फिर जेल की हवा खा रहा है।
क्या है पूरा मामला:
यहां बता दें कि 2022 में उत्पाद विभाग ने निमियाघाट में अवैध शराब को पकड़ा था। इस शराब को विभाग के द्वारा पुराना परिसदन भवन स्थित गोदाम में रखा गया था।इसी गोदाम के बगल में शशि ने एक कमरा बुक कर रखा था, जिसमें वह वर्षो से रह रहा था।शशि इसी गोदाम से शराब के स्टॉक को निकाल कर पहले अपने कमरे में रखता था फिर उसे वाहन पर लादकर बिहार भेजता था।
उत्पाद अधीक्षक महेंद्र देव ने बताया कि उत्पाद विभाग के तीन गोदाम हैं।एक गोदाम पपरवाटांड, एक गोदाम बरमसिया तो एक गोदाम पुराना परिसदन भवन में अवस्थित है।पुराना परिसदन भवन में रखे शराब के गोदाम का सील किए गए ताले को खुद को स्पेशल ब्रांच का अधिकारी बताने वाले शशि ने तोड़ा और फिर उसी आकार का ताला लगा दिया जिसे उत्पाद विभाग के कर्मी पकड़ नहीं सके थे।इसी ताला को खोलकर शशि शराब की चोरी करता रहा फिर उसे बिहार भेजता रहा।महेंद्र देव बताते हैं कि यहां जांच में पता चला कि पुराना परिसदन भवन में रखे गए स्टॉक से 350 पेटी शराब गायब है और भारी मात्रा में स्प्रिट भी।इस मामले को लेकर शशि कुमार ऊर्फ शशि सिंह के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
स्पेशल ब्रांच से ऐसे शुरू हुआ नाता
इस मामले को लेकर स्पेशल ब्रांच के कई अधिकारियों से सम्पर्क किया गया।यहां पता चला कि जब नक्सलवाद चरम पर था तो कई गुप्तचरों ( एसपीओ ) को विभाग ने रखा था।गिरिडीह भी अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र था ऐसे में यहां पर 10 से अधिक गुप्तचर रखे गए थे।शशि को गिरिडीह शहरी क्षेत्र का गुप्तचर बनाया गया था।बिहार से अलग होने के बाद झारखण्ड स्पेशल ब्रांच में स्ट्रेंथ की कमी थी। यह स्थिति कई वर्ष तक बरकरार रही।
ऐसे में एसपीओ शशि यहां पर पदस्थापित अधिकारियों को अपने विस्वास में लेता रहा फिर अधिकारियों के साथ हरेक स्थान पर जाने लगा।चूंकि अधिकारियों को भी लगता कि शशि विभाग का महत्वपूर्ण कार्य करता है ऐसे में संवेदनशील-अतिसंवेदनशील स्थानों पर भी शशि को ले जाया जा रहा था। यहां तक कि वीआईपी – वीवीआईपी के आगमन से पहले सुरक्षा की जांच भी करता ( इससे जुड़ी तस्वीर शशि के सोशल मीडिया एकाउन्ट में मौजूद है )। कहा जाए तो शशि ने स्पेशल ब्रांच का भरोसा जीत रखा था।
2022 में एसपीओ से हटा दिया गया
2018 में बड़े पैमाने पर बहाली हुई और 2019 से विभाग को पर्याप्त स्ट्रेंथ मिला। कहा जाता है कि इसके बाद शशि की दखलअंदाजी पर कुछ हद तक लगाम लगा था लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि स्पेशल ब्रांच का अधिकारी बताकर शशि अवैध कार्य करता रहेगा।स्पेशल ब्रांच गिरिडीह के पदाधिकारी पंकज कुमार बताते हैं कि शशि कुमार ऊर्फ शशि सिंह स्पेशल ब्रांच का एसपीओ था। हालांकि 2022 के मध्य में ही गिरिडीह से मुख्यालय तक यह रिपोर्ट कर दिया गया कि शशि अब एसपीओ नहीं है।पिछले दो – तीन वर्ष से शशि का नाता स्पेशल ब्रांच से नहीं था।

