Ranchi:घर में घुसे बाघ को कई घंटे बाद सुरक्षित रेस्क्यू किया गया,बाघ देखने के लिए हजारों की भीड़ जुटी…
राँची।जिले के सिल्ली थाना क्षेत्र के मारदू गांव के पुरंदर महतो के घर में कैद बंगाल टाइगर को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है।टाइगर को रेस्क्यू करने के लिए बेतला नेशनल पार्क से टीम आई थी।इस काम में बिरसा जैविक उद्यान के कर्मियों ने भी मदद की। घटना स्थल पर राँची के डीएफओ श्रीकांत में मौजूद थे।उन्होंने बताया कि बाघ पूरी तरह सुरक्षित है।सबसे खास बात है कि रेस्क्यू करने के दौरान बाघ को ट्रैंकोलाइज करने की भी जरुरत नहीं पड़ी।
सिल्ली के मारदू गांव से रेस्क्यू किए गये बाघ को बिरसा जैविक उद्यान में रखा जाएगा। वहां उसका हेल्थ चेकअप होगा। देखा जाएगा कि कहीं वह जख्मी तो नहीं है। हेल्थ रिपोर्ट ठीक आने के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेंशन ऑथोरिटी से बात करने के बाद तय होगा कि इसको किस फॉरेस्ट एरिया में शिफ्ट करना है।डीएफओ श्रीकांत ने बताया कि घटनास्थल पर भारी भीड़ की वजह से बाघ को जिस केज में रखा गया है वो प्लास्टिक से पूरी तरह कवर्ड है। लेकिन शिफ्टिंग के दौरान उसको बेहोशी का हल्का डोज दिया गया है ताकि उसको घबराहट ना हो।
पशु चिकित्सक डॉ अजय का कहना है कि बाघ की उम्र जब 14 से 18 माह की होती है तो उसके शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरु हो जाता है। ऐसे ऐज में एक बाघ अपना इलाका तय करने के लिए निकल पड़ता है।कई बार भटकते हुए बाघ ह्यूमन हेबिटेंट में चले आते हैं। अब यह बाघ किस वजह से रिहायशी इलाके में चला आया, यह उसके उम्र के आंकलन के बाद ही पता चल पाएगा।
बता दें कि 25 मार्च की सुबह सिल्ली के कोचो पंचायत स्थित मारदू गांव के पुरंदर महतो के घर में अचानक यह बाघ घुस आया था।राहत की बात है कि इसनें किसी इंसान पर हमला नहीं बोला। पुरंदर के मुताबिक कमरे में बाघ के घुसते ही बाहर से दरवाजा बंद कर दिया गया। इसके बाद वन विभाग की सूचना दी गई। इस सूचना पर एक टीम घटनास्थल पर सुबह 5.30 बजे ही पहुंच गई थी। इसके बाद बेतला से आने वाली टीम का इंतजार किया गया।इस दौरान इलाके में भारी भीड़ और लगातार बारिश की वजह से वन विभाग की टीम को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा।हालांकि राँची जिला प्रशासन ने रात 9 बजे तक क्षेत्र कर 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दिया।फिर भी हजारों की भीड़ जुट गई।

