कोलकाता पुलिस ने 2.5 करोड़ की ठगी करने वाला शातिर को जामताड़ा से किया गिरफ्तार,साइबर अपराधियों को बंधन बैंक के अधिकारी करते थे मदद

जामताड़ा। कोलकाता साइबर पुलिस ने मंगलवार देर शाम जामताड़ा जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र के नामूपाड़ा मोहल्ले से 2.5 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में गिरोह के एक शातिर को दबोचा है। कोलकाता पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी मुरारी मंडल है और इस ठगी के मामले में उसके साथ कई अन्य अपराधी शामिल हैं।

कोलकाता साइबर अपराध शाखा के इंस्पेक्टर गौतम सरकार ने बताया कि इस गैंग ने सुनियोजित तरीके से ठगी के इस धंधे में बंधन बैंक के पांच अधिकारियों को शामिल कर कई खाताधारकों को ब्योरा हासिल कर तकरीबन 2.5 करोड़ रुपये की ठगी की है।इन पैसों का ट्रांजेक्शन इन अपराधियों ने अलग-अलग 97 बैंक खातों के जरिए की है। गैंग में कई लोग शामिल हैं, गैंग का मुख्य सरगना समीर बताया जा रहा है, जोकि अब तक पुलिस की पहुंच से दूर है। कोलकाता पुलिस मुरारी को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर बुधवार को अपने साथ कोलकाता ले गई।

इंस्पेक्टर गौतम सरकार ने बताया कि इसी साल 23 जुलाई को कोलकाता स्थित बंधन बैंक मेन ब्रांच के अधिकारी बसंत बंदानी की शिकायत पर यह मामला बिधान नगर थाने में दर्ज किया गया था। जांच के दौरान इन शातिरों द्वारा बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ठगी की बात सामने आई थी।

जामताड़ा के बंधन बैंक का अधिकारी शुभम कुमार 2.5 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी मामलों में शामिल था। शुभम समेत झारखण्ड के अलग-अलग जिलों के बंधन बैंक से जुड़े पांच बैंक अधिकारी इसमें शामिल थे। शुभम कुमार समेत इन पांचों के खिलाफ कोलकाता के बिधान नगर साइबर थाने में इनके खिलाफ केस नंबर 8425 दर्ज किया गया।

कोलकाता साइबर पुलिस ने 11 अगस्त को शुभम को जामताड़ा से ट्रांजिट रिमांड पर लिया और जब सभी आरोपी से पूछताछ शुरू हुई तो कई सनसनीखेज खुलासे हुए। पश्चिम बंगाल साइबर अपराध शाखा ने कोलकाता स्थित निजी क्षेत्र के बंधन बैंक के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को ग्राहकों की जानकारी भारी रकम के बदले साइबर ठगी जालसाजों को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार किए गए लोगों में झारखण्ड की हजारीबाग शाखा के मुख्य जोखिम अधिकारी (सीआरओ), जामताड़ा शाखा के सीआरओ, धनबाद की सरायढेला शाखा के सेल्स मैनेजर, कोलकाता की मेटियाब्रुज शाखा के सीआरओ और सेल्स मैनेजर शामिल हैं।

ग्राहकों को बीमा पॉलिसी व फिक्स्ड डिपॉजिट करवाने की बात कह लेते थे डिटेल्स
पुलिस ने दावा किया है कि गिरफ्तार किए गए लोग कोर बैंकिंग सिस्टम से जानकारी इकट्ठा कर साइबर ठगों को मुहैया कराते थे। इसके अलावा ये ग्राहकों को वाट्स-एप, एसएमएस या कॉल करके उनकी केवाईसी अधूरी बताकर और जानकारी मांगते थे।

ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट व बीमा पॉलिसी का लालच दिया जाता था। इस तरह से उन्होंने कई ग्राहकों की गुप्त जानकारी एकत्रित की। साइबर अपराध शाखा को जांच के दौरान एक के बाद एक सनसनीखेज जानकारी मिली।उसके आधार पर शुक्रवार को अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। बैंक के सीआरओ का मुख्य काम बैंक को वित्तीय, परिचालन, प्रतिष्ठा और नियामक संबंधी जोखिमों से बचाना है। वे जोखिमों की पहचान करते हैं, उनका आकलन करते हैं और उन्हें कम करने के लिए रणनीतियां बनाते हैं, साथ ही यह सुनिश्चित करते हैं कि बैंक लागू नियमों का पालन करे।

वहीं बैंक बिक्री प्रबंधक का मुख्य काम बैंक के राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बिक्री रणनीतियों का विकास और कार्यान्वयन करना है, जिसमें बिक्री टीमों का नेतृत्व करना, ग्राहक संबंध बनाना और बाजार के रुझानों के अनुकूल रणनीतियां बनाना शामिल है

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