झारखण्ड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने डीजीपी पद से दिया इस्तीफा…
राँची।झारखण्ड के डीजीपी और 1990 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रिटायरमेंट के बाद भी सेवा विस्तार पर पद पर बने रहने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे।मंगलवार देर शाम उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में अपना इस्तीफा सौंपा है।गौरतलब है कि अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन झारखण्ड सरकार ने उन्हें दो वर्ष का सेवा विस्तार दे दिया था। केंद्र सरकार ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए 22 अप्रैल 2025 को तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्त अधिकारी को एक्सटेंशन नहीं दिया जा सकता. इसके बाद राज्य और केंद्र के बीच पत्राचार और कानूनी विवाद का दौर शुरू हुआ।इस पूरे मामले पर भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
मिली जानकारी के अनुराग गुप्ता के इस्तीफे के बाद अब झारखण्ड के नए डीजीपी की तलाश शुरू हो गई है।दो नाम सबसे प्रबल माने जा रहे हैं। 1992 बैच के आईपीएस प्रशांत सिंह और 1993 बैच के आईपीएस एम.एस.भाटिया है।
अनुराग गुप्ता को पहली बार 26 जुलाई 2024 को प्रभारी डीजीपी बनाया गया था, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर उन्हें हटा दिया गया था।बाद में 28 नवंबर 2024 को हेमंत सोरेन के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद उन्हें फिर से प्रभारी डीजीपी बनाया गया और 3 फरवरी 2025 को नियमित डीजीपी नियुक्त किया गया।
अपने तीन दशक से अधिक के करियर में अनुराग गुप्ता ने झारखण्ड पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे गढ़वा, गिरिडीह, हजारीबाग के एसपी और राँची के एसएसपी रह चुके हैं।संयुक्त बिहार में भी उन्होंने उत्कृष्ट कार्य किया था, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
वर्ष 2016 के राज्यसभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोप में उन्हें फरवरी 2020 में निलंबित कर दिया गया था। करीब 26 महीने के निलंबन के बाद अप्रैल 2022 में हेमंत सोरेन सरकार ने निलंबन रद्द कर उन्हें पुनः डीजीपी बनाया और बाद में नियमित डीजीपी पद पर नियुक्त किया।

