हजारीबाग जेल ब्रेक:एसआईटी की झारखण्ड से बिहार तक ताबड़तोड़ छापेमारी, जेल प्रशासन भी शक के दायरे में…कुख्यात देवा के संभावित ठिकाने और मददगार के घर छापेमारी….

 

हजारीबाग।झारखण्ड के हजारीबाग सेंट्रल जेल से कैदियों के फरार होने के मामले में एसपी द्वारा गठित एसआइटी ने छापेमारी तेज कर दी है। पांच अलग अलग टीमें इस दिशा में काम कर रही हैं। हजारीबाग पुलिस की विशेष टीम धनबाद,राँची के अलावा एक टीम बिहार भी गई है। कारा से तीन बंदी फरार हैं।जल्द ही पुलिस को कामयाबी मिल सकती है।वहीं इस मामले में लापरवाही के आरोप में जैप के 18 जवान कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैंं। कभी भी इन पर गाज गिर सकती है। अब तक की जांच में ये बातें सामने आई हैं कि फरारी की योजना अंधेरे, धुंध और रात के समय बिजली आपूर्ति बंद रहने की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।इसी का लाभ उठाकर बंदी जेल सुरक्षा घेरा तोड़ने में सफल रहे।

वहीं पुलिस फरार कैदी देवा भुइयां का आपराधिक इतिहास खंगाल कर कर उसके संभावित ठिकाने और मददगार के घर छापेमारी कर रही है। कुख्यात देवा भुइयां का हजारीबाग से पुराना और गहरा नाता रहा है। वह हजारीबाग की गलियों और इलाकों से भली-भांति परिचित था।

2021 में धनबाद जेल से फरार होने के बाद वह करीब साढ़े तीन वर्षों तक भूमिगत रहा और इस दौरान हजारीबाग में भी लंबे समय तक छिपकर रहा। देवा भुइयां पर एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।उसके खिलाफ धनबाद के विभिन्न थानों में मामले दर्ज हैं। पूर्व में भी वह धनबाद जेल से शौचालय की खिड़की तोड़कर रस्सी के सहारे फरार हुआ था। जांच में संकेत मिले हैं कि हजारीबाग जेल से फरारी के दौरान भी उसी तरीके को दोहराया गया।

सूत्रों की मानें तो देवा का पूर्व के आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज करना केंद्रीय कारा प्रशासन पर भारी पड़ा। कैदी और जेल प्रशासन की संभावित गठजोड़ की भी जांच की जा रही है, क्योंकि पूर्व में भी ऐसे मामलों में विभाग को खामियाजा भुगतना पड़ा है।

वहीं दूसरी ओर घटना के दूसरे दिन जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार जेपी कारा पहुंचे और सुरक्षा में लगे जवानों की समीक्षा की। उन्होंने तैनात जवानों की ड्यूटी और पोस्टिंग से संबंधित रिपोर्ट ली।जानकारी के अनुसार एक पोस्ट पर चार जवान तैनात रहते हैं और प्रत्येक की ड्यूटी दो घंटे की होती है। रात में धुंध और बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति को फरारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल SIT फरार बंदियों के नेटवर्क और उन्हें मदद पहुंचाने वालों की पहचान में जुटी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी में तीसरा व्यक्ति कौन था, जिसने अंदर या बाहर से सहायता दी। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा चूक और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

जेपी सेंट्रल जेल कैसे अपने आप को बचाने और गलतियों को ढंकने का प्रयास कर रही है। इसका उदाहरण लोहसिंघना थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी है। सूत्रों के अनुसार प्राथमिकी कुल पांच लाइन की है। पहले के दो लाइन में घटना का जिक्र किया गया है।नीचे के तीन लाइन में फरार होने वाले कैदियों के नाम पते लिखे गए हैं। इसके अतिरिक्त एक लाइन की जानकारी भी जेपी कारा की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है। आवेदन में बताया गया है कि सीसीटीवी फुटेज से ज्ञात हुआ है कि बैरक नंबर छह की खिड़की नंबर चार को काटकर रात करीब 1:36 से 2: 45 के बीच पलायन कर गए।पलायन करने वाले बंदियों में सजावर बंदी देवा भुइयां उर्फ देव कुमार भुइयां पिता शंभू भुइयां, सेंदरा नंबर 10, थाना लोयाबाद, राहुल रजवार पिता जगन रजवार, सात नंबर, मोदी डीह, नया बाजार, सरजुआ थाना जोगता तथा जितेंद्र रवानी पिता जतर रवानी, गोधर रवानी बस्ती, थाना केंदुआ सभी जिला धनबाद हैं। इस बाबत लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी संख्या 196/2025 दर्ज किया गया है।

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