पूर्व विधायक बिरंची ने एसडीओ को सौंपा श्वेता के चार वोटर कार्ड का प्रमाण…

 

बोकारो।झारखण्ड के बोकारो विधायक श्वेता सिंह के नाम चार वोटर कार्ड रखने के मामले में पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने मंगलवार को कई साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर भारी संख्या में मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अनुमंडल कार्यालय चास पहुंचे बिरंची नारायण ने विधायक श्वेता सिंह से जुड़े तमाम दस्तावेज को सौंप दिया। तत्कालीन बोकारो डीसी विजया जाधव ने विधायक श्वेता सिंह पर लगे चार वोटर कार्ड और दो पैन कार्ड रखने के मामले को झारखण्ड के मुख्य चुनाव पदाधिकारी के समक्ष रखा था। जिसके बाद जांच पड़ताल शुरू हुई तो विधायक पर आरोप लगानेवाले पूर्व विधायक बिरंची नारायण को मामले से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया था।

विधायक के चार वोटर कार्ड से जुड़े साक्ष्यों को प्रस्तुत करने के बाद पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि विधायक श्वेता सिंह के नाम पर चार वोटर आईडी कार्ड जारी है, जिनमें से तीन आईडी बोकारो शहर के पते से है। इन तीनों में उनके पति के रूप में संग्राम सिंह का नाम दर्ज है। उनके नाम पर एक अन्य वोटर आईडी कार्ड बिहार के झाझा से जारी किया गया है, जिसमें श्वेता सिंह के पिता के रूप में दिनेश कुमार सिंह का नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि इसके आलावा दो पैन कार्ड भी विधायक के नाम है, जिसकी जांच आयकर विभाग कर रहा है। आवास की जानकारी छिपाने की भी शिकायत पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने कहा है कि एसडीओ चास को एक और शिकायत पत्र सौंपा गया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि वर्तमान विधायक ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सरकारी उपक्रम बीएसएल की ओर से प्राप्त आवास के संबंध में जानकारी छिपाई है। यही नहीं नामांकन के वक्त उसका शुल्क बकाया रखने व नो ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं देने की बात कही है। कहा यह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला बनता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की सुसंगत धाराओं में इनके ऊपर नियमानुकूल कार्रवाई करने की मांग की गई है। बिरंची नारायण ने कहा कि कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह ने विधानसभा चुनाव 2024 में नामांकन पत्र में सूचना छिपा गलत शपथ पत्र समर्पित किया है। जिसमें बीएसएल व एचएससीएल की ओर से दिए गए क्वार्टर का वर्णन नहीं है। क्वार्टर नंबर 562, सेक्टर 3/डी एचएससीएल पुल व क्वार्टर नंबर 873 सेक्टर 3/ए श्वेता सिंह के नाम पर अलॉट है। इसका इन्होंने नामांकन पत्र में नो ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं दिया है। दोनों क्वार्टर में उनके किराया की राशि बकाया है। जो धारा 191(1), 191(1)(ए) व 192 के तहत ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला बनता है, जिसमें इनकी सदस्यता रद्द किए जाने का प्रावधान है।

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