20 वर्षीय कुख्यात अपराधी कुबेर का कबूलनामा:झारखण्ड भर में फैले रंगदारी नेटवर्क का पर्दाफाश,फेसबुक से जुड़ा गैंग,जंगी-टेलीग्राम से चलता था नेटवर्क,पाकिस्तान तक जुड़े तार,हथियार और फंडिंग का पूरा सिस्टम उजागर…
राँची।एयरपोर्ट थाना से जुड़े टीटोस रेस्टोरेंट हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। गिरफ्तार आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर (20 वर्ष) ने पुलिस के समक्ष अपना अपराध स्वीकारोक्ति बयान दर्ज कराया है, जिसमें झारखण्ड के कई जिलों में फैले एक संगठित आपराधिक गिरोह, उसके संचालन, रंगदारी नेटवर्क, हथियार सप्लाई और हत्याओं की साजिश का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह बयान बैंकमोड़ थाना परिसर में एयरपोर्ट थाना के एसआई पंकज कुमार शर्मा द्वारा दर्ज किया गया। आरोपी पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र का निवासी है और स्नातक का छात्र बताया गया है।
फेसबुक से अपराध की दुनिया में एंट्री

आरोपी ने अपने बयान में बताया कि वर्ष 2021-22 में वह डालटनगंज में किराये के मकान में रहता था, जहां उसकी मुलाकात सुजीत सिन्हा से हुई। उसे पता चला कि सुजीत सिन्हा एक संगठित अपराध गिरोह का संचालन करता है। पैसों के लालच में वह फेसबुक के माध्यम से “कोयलांचल शांति सेना” नामक गिरोह से जुड़ गया। शुरुआत में उसकी भूमिका लेवी वसूली, पैसों का ट्रांसफर, हथियार और गुर्गों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की थी। पढ़ा-लिखा होने के कारण उसे अकाउंट्स और ट्रांजैक्शन से जुड़े काम भी सौंपे गए।
प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा का नेटवर्क
आरोपी के अनुसार, बाद में सुजीत सिन्हा और कुख्यात अपराधी प्रिंस खान एक साथ आ गए और पूरे झारखण्ड में रंगदारी का नेटवर्क खड़ा किया गया। व्यवसायियों, ठेकेदारों, कोयला कंपनियों, डॉक्टरों और अधिवक्ताओं से “छोटे सरकार टैक्स” के नाम पर वसूली की जाती थी। राँची, पलामू और आसपास के जिलों में रंगदारी वसूली और दहशत फैलाने की जिम्मेदारी आरोपी को दी गई थी। इसमें फायरिंग, बमबाजी और धमकी भरे पर्चे फेंकने जैसे काम शामिल थे।
जंगी, टेलीग्राम और फर्जी नंबरों से ऑपरेशन
गिरोह के सदस्य आपस में संपर्क के लिए जंगी एप, टेलीग्राम, वाट्सएप और मैसेंजर का इस्तेमाल करते थे। फर्जी अंतरराष्ट्रीय नंबर बनाकर बातचीत की जाती थी ताकि पुलिस से बचा जा सके। आरोपी ने बताया कि गिरोह का एक सदस्य फर्जी इंटरनेशनल नंबर तैयार करता था, जिससे सभी ऑपरेशन संचालित होते थे।
30 लाख की रंगदारी वसूली
पलामू में एक रिसॉर्ट कर्मचारी के माध्यम से पिछले दो महीनों में करीब 30 लाख रुपये की रंगदारी वसूली गई। इस रकम का हिस्सा विभिन्न खातों और यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर किया गया। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खुद कई बार बैंक खातों में पैसे जमा किए और अलग-अलग लोगों के खातों में रकम ट्रांसफर करवाई।
हथियार सप्लाई: पंजाब से मध्य प्रदेश तक नेटवर्क
गिरोह के लिए हथियार लाने की जिम्मेदारी भी आरोपी और उसके सहयोगियों को दी गई थी। पहले पंजाब के अमृतसर से हथियार लाने की कोशिश हुई, लेकिन असफल रही। इसके बाद मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से तीन पिस्टल मंगवाए गए, जिनमें एक प्रतिबंधित जिगाना और एक ग्लॉक शामिल था। ये हथियार बाद में राँची लाए गए और विभिन्न घटनाओं में इस्तेमाल किए गए।
धनबाद में फायरिंग की साजिश
आरोपी ने बताया कि फरवरी 2026 में धनबाद में प्रतिद्वंदी गैंग के सदस्य पर हमला करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए स्थानीय शूटरों को पैसे और हथियार उपलब्ध कराए गए। इस घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ था। घटना के बाद हथियार और शूटरों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था भी गिरोह द्वारा की गई।
टीटोस रेस्टोरेंट हत्याकांड का खुलासा
सबसे बड़ा खुलासा राँची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र स्थित टीटो’s रेस्टोरेंट में हुए हत्याकांड को लेकर हुआ है। आरोपी के अनुसार, रेस्टोरेंट मालिक से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। पैसा नहीं देने पर हत्या की साजिश रची गई। पहले 1 मार्च को घटना की कोशिश हुई, लेकिन रेस्टोरेंट बंद होने के कारण असफल रही। इसके बाद 7 मार्च को शूटरों ने रेस्टोरेंट में घुसकर वेटर मनीष गोप की गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद पेमेंट और ट्रांजैक्शन
हत्या के बाद शूटरों को भुगतान किया गया। आरोपी ने बताया कि विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई के जरिए रकम ट्रांसफर की गई। इसके अलावा, गिरोह के अन्य सदस्यों को भी उनके हिस्से का पैसा दिया गया।
झारखण्ड के कई जिलों में फैला नेटवर्क
गिरोह का नेटवर्क राँची, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग और पलामू सहित कई जिलों में फैला हुआ है। कई लोग व्यवसायियों के नंबर उपलब्ध कराने, धमकी देने और रंगदारी वसूलने में शामिल हैं। कुछ महिलाएं भी इस नेटवर्क में सक्रिय हैं और जेल से ही संचालन करने के आरोप सामने आए हैं।
पाकिस्तान से कनेक्शन का दावा
आरोपी ने यह भी दावा किया कि गिरोह का सरगना प्रिंस खान फर्जी पाकिस्तानी दस्तावेज बनाकर पाकिस्तान में छिपा हुआ है। उसने बताया कि प्रिंस खान ने अपना पाकिस्तानी पहचान पत्र भी उसे भेजा था। बयान में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह धनबाद में एक और बड़ी घटना की योजना बना रहा था। कुछ शूटर हथियार और विस्फोटक के साथ जंगल क्षेत्र में छिपे हुए हैं।
पुलिस के लिए बड़ी सफलता
इस कबूलनामे के बाद पुलिस को गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग, हथियार सप्लाई और आगामी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पुलिस अब अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और छिपे हुए हथियारों की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। यह मामला झारखण्ड में संगठित अपराध के बढ़ते नेटवर्क और उसके आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को भी उजागर करता है, जिससे निपटना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

