बाघ से पहले सुरक्षित बचे फिर बाघ की भी जान बचाई… बहादुर बाप-बेटी को सरकार ने किया सम्मानित…

 

राँची।झारखण्ड की राजधानी राँची में वन विभाग द्वारा शुक्रवार को एक पिता और पुत्री को उनकी बहादुरी और बाघ की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। दरअसल बाप-बेटी की इस बहादुर जोड़ी ने अचानक घर में घुस आए बाघ से ना केवल खुद की जान बचाई थी, बल्कि उसे भी सुरक्षित रखते हुए वन विभाग को बुला लिया था।

इस बारे में जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना 25 जून की सुबह करीब साढ़े चार बजे मुरी थाना क्षेत्र के मरदु गांव में हुई थी, जब यहां रहने वाले पुरंदर महतो के घर पर एक नर बाघ घुस आया था। उस वक्त घर में मौजूद महतो की बेटी सोनिका कुमारी और एक अन्य लड़की किसी तरह घर से बाहर निकलने में कामयाब रही थी।

अधिकारी ने बताया कि जब बाघ घर के अंदर था, तब महतो ने अपनी बेटी के साथ मिलकर दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया और इस बात की सूचना तुरंत वन विभाग को दे दी। जिसके बाद पलामू बाघ अभयारण्य (PTR) से एक बचाव दल मौके पर पहुंचा और बाघ को सफलतापूर्वक पिंजरे में बंद कर दिया। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू करने के बाद अगले दिन बाघ को पीटीआर में छोड़ दिया गया।

बाघ के घर में घुस आने के बाद भी अद्वितीय बहादुरी दिखाते हुए उसे घर में बंद करने वाले महतो और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी का इस कार्य के लिए सम्मान किया गया। इस दौरान राँची में हुए 76वें वन महोत्सव के अवसर पर दोनों को उनके वनोपज के लिए 1.20 लाख रुपए का चेक और वन संवर्धन एवं संरक्षण में उनके योगदान के लिए 21,000 रुपए का एक अलग चेक प्रदान किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर और अन्य की मौजूदगी में उन्हें राशि का चेक सौंपा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ‘प्रदूषण बढ़ रहा है क्योंकि पेड़ों की संख्या घट रही है। ऐसे में पेड़ लगाना और अपने वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना सभी का कर्तव्य है।’

इसी कार्यक्रम में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखण्ड में लगभग 30 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जो 1960-70 में 45 से 55 प्रतिशत के बीच हुआ करता था। उन्होंने कहा, ‘वन क्षेत्र में गिरावट आई है। हमें पेड़ लगाने और वन क्षेत्र को पहले की तरह बढ़ाने की आवश्यकता है।’

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