बांग्लादेश की जेल में 9-10 साल रहा…करीब 11 वर्ष बाद घर पहुँचा अजय टोप्पो…2014 में राँची से लापता हो गया था…
राँची।राजधानी राँची के नामकुम इलाके से 11 साल पहले चाचा के साथ धुर्वा बाजार गया नामकुम प्रखंड के राजाउलातू पंचायत के सिंजु सेरेंग गांव का मानसिक रुप से कमजोर अजय टोप्पो भटककर बांग्लादेश पहुच गया था। जहां बंगलादेश पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया। 9-10 साल जेल में रहने के बाद वहां की अदालत ने उसे रिहा कर दिया। दिसम्बर 2024 में रिहाई के बाद अजय व एक अन्य युवक को बंगलादेश पुलिस ने पश्चिम बंगाल के 24 परगना बोर्डर के पास छोड़ दिया। जहां अजय भटकता रहा।दिल्ली गृहमंत्रालय की ओर से पत्र आने के बाद सक्रिय हुई झारखण्ड पुलिस की स्पेशल शाखा की टीम के निर्देश पर नामकुम पुलिस 24 परगना गई जहां से अजय को लेकर वापस राँची लौटी। 25 जून को नामकुम थाना में पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया।परिजनों से मिलकर अजय एवं परिजन काफी खुश है।
जानकारी के अनुसार 2014 में अजय अपने चाचा के साथ धुर्वा बाजार गया था।वहीं से अजय लापता हो गया।उसके बाद अजय टोप्पो भटककर बोर्डर पार बंगलादेश पहुंच गया।वहां की पुलिस ने पकड़कर जेसोर जेल भेज दिया।थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि विशेष शाखा की सूचना पर छानबीन की गई।जिसमें जानकारी मिली कि 2014 से अजय लापता हैं।उसके माता-पिता का देहांत हो चुका है। फोटो व अन्य साक्ष्य लेकर झारखण्ड पुलिस परिजनों को लेकर बंगाल गई,वहां से अजय टोप्पो को लेकर वापस आई है।अजय ने झारखण्ड पुलिस,बंगाल पुलिस और राँची के नामकुम पुलिस को धन्यवाद दिया है।कहा कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण लापता होने के बाद वे काफी घबरा गए थे।कई दिनों तक भूखे प्यासे चले उसे पता ही नहीं चला कैसे बांग्लादेश बार्डर पार कर गए।वहां की पुलिस ने उसे जासूस समझकर जेल में डाल दिया।
बेटे से मिलने की आस लगाईं बैठीं माँ,बेटे के आने से पहले आ गईं मौत
11 साल से लापता बेटे को मृत मान चुकी माँ बेटे के लिए पल-पल तड़पती रही।दिसंबर 2024 में बेटे के जीवित होने की जानकारी मिलने व विडियो कॉल में देखने के बाद माँ को नई जिंदगी मिल गई। दिसंबर से माँ बेटे से मिलने की आस लगाईं बैठी थी। माँ के लिए एक एक दिन काटना मुश्किल हो गया था। एक एक दिन उसके लिए एक साल जैसा था। बेटे की राह ताकती रही माँ,परंतु बेटा नहीं आया।बेटे के पहुंचने से पहले उन्हें मौत आ गई।दो महीने पहले माँ ने दम तोड दिया।पुलिस के साथ गए बुआ व दादी को अजय ने पहचान लिया। अभी भी उसकी मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं है।अजय ने बताया कि वह बंगलादेश कैसे पहुंचा नहीं पता।उसे सिर्फ चाचा के साथ बाजार गया था वो याद है।

