Ranchi:पथरी का ऑपरेशन के बाद चौकीदार की मौत..परिजनों का आरोप-अस्पताल वालों ने लाश को वेंटिलेटर पर रखा….परिजनों ने अस्पताल में की तोड़फोड़…दोनों पक्षों ने थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराया….

राँची।राजधानी राँची के स्टेशन रोड स्थित गुरुनानक अस्पताल में गढ़वा के रंका से इलाज करवाने आए चौकीदार विजय पासवान (42)की मौत हो गई।मरीज के मौत होने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया।मामले की जानकारी मिलने के बाद चुटिया पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराया।साथ ही पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।मृतक के परिजनों का आरोप है कि विजय कुमार पासवान का इलाज के दौरान अस्पताल में चार पांच दिन पहले ही मौत हो गई थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा था और बात परिजनों से छिपाई गई थी। इसी बात को लेकर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।वहीं परिजनों के ये भी आरोप है कि विजय पासवान घर से कई किलोमीटर पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुँचा और वहाँ से राँची पहुँचे।उसके बाद अस्पताल में जांच करावाया।उस समय तक बिल्कुल सही सलामत था।लेकिन अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन कराते ही उसे क्या हो गया जिससे उनकी मौत हो गई।मृतक की पत्नी ने चुटिया थाना में लिखित शिकायत दर्ज करायी है।वहीं अस्पताल प्रबंधक ने भी अस्पताल में तोड़फोड़ ,गाली गलौज और डॉक्टरों से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाकर शिकायत दर्ज कराया है।

मृतक के एक परिजन कामेश्वर पासवान ने बताया कि 20 फरवरी को विजय और उनकी पत्नी इलाज के लिए गुरुनानक अस्पताल पहुँचे थे।अस्पताल में डॉक्टर से जांच करवाया और कहा पथरी का इलाज करवाना है।उसके बाद डॉक्टर सलाह पर 21 फरवरी को ऑपरेशन हुआ था।परिजन ने ये भी बताया कि उन्होंने आर्थिक स्थिति के बारे में बताया तो अस्पताल की ओर से कहा कि आयुष्मान कार्ड से उसका इलाज हो जाएगा, एक पैसा नहीं लगेगा।उसके बाद विजय का इलाज शुरू हुआ। 21 फरवरी को पथरी का ऑपरेशन किया गया।लेकिन कुछ देर बाद ही विजय बेहोश हो गया उसके बाद कभी नहीं उठा।

मृतक के परिजनों का कहना है कि 21 फरवरी को ऑपरेशन के बाद विजय को होश ही नहीं आया था। इसी बीच 24 फरवरी को आईसीयू में कोई डॉक्टर जांच करने आये बोले मरीज की स्थिति ठीक नहीं है।सम्भवतः उसकी मौत हो गई थी।उसके बाद इलाज कर रहे डॉक्टर आये बोले मरीज को कुछ नहीं हुआ है वेंटिलेटर पर है।सब ठीक है।डॉक्टर हम है कि कोई और उसके बाद 24 से लेकर 3 मार्च तक परिजनों को आश्वसन देते रहा है।

परिजनों ने बताया कि इसी बीच अस्पताल के डॉक्टर ने कहा कि मरीज की जान बचानी है तो पैसा जमा करो।परिजन ने कहा पहले ही बता दिया गया था की उसके पास पैसे नहीं है आयुष्मान कार्ड से इलाज होगा तभी ऑपरेशन कराएंगे।अब पैसा कहां से लाएंगे।अस्पताल कर्मियों के दबाव में करीब 30 हजार जमा किया।उसके बाद हर दिन बोला जा रहा था कि 10 से 12 हजार का दवाई लग रहा है।पैसा जमा करते जाओ।

परिजन ने बताया कि सोमवार (3 मार्च) को रात 9 बजे अस्पताल के एक नर्स ने बताया कि मरीज की मौत हो गई है।लेकिन डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधक ने मौत होने से इनकार किया। उसके बाद मृतक के अन्य परिजन अस्पताल पहुँच गए। इसी बीच रात करीब साढ़े दस बजे अस्पताल का गेट बंद कर दिया और परिजन को बाहर कर दिया।उसके बाद परिजनों ने काफी हंगामा किया।परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से कहा 1.37 लाख रुपये जमा करो और शव लेकर जाओ।उसके बाद रात करीब 11.30 बजे सूचना मिलने के बाद चुटिया थाना की पुलिस अस्पताल पहुँची और मामला को शांत कराया।मृतक के परिजन ने बताया कि उन्हें अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि ब्रेन हेमरेज की वजह से विजय की मौत हो गई।

अब परिजनों का सवाल है कि ऑपरेशन पित्त की थैली में स्टोन का हुआ था, लेकिन ब्रेन हेमरेज से आखिर कैसे विजय की मौत हुई है।परिजनों का यह भी आरोप है कि ऑपरेशन खत्म होने के बाद कभी भी विजय को होश नहीं आया।फिर ब्रेन हेमरेज से से मौत कैसे हुई ? इस दौरान डॉक्टर ने किसी को भी विजय से मिलने भी नहीं दिया था।अचानक सोमवार की रात बताया गया कि विजय की मौत हो गई है।

मृतक विजय पासवान के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन विजय की मौत के बावजूद उन्हें वेंटिलेटर पर कई दिन तक रखकर उनसे पैसे की ठगी कर रहे थे।इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच काफी कहासुनी हुई।जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया।दोनों पक्षों की ओर से चुटिया थाना में आवेदन दिया गया।

परिजनों ने बताया कि मृतक चौकीदार की नौकरी करता था लेकिन कुछ महीनों से विभाग से बैठा दिया गया था।परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।उनकी चार बेटियां और एक बेटा है।सबसे छोटा बेटा है।कमाने वाले कोई नहीं है।एक बड़ी बेटी की शादी हुई है।

इस संबंध में चुटिया थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से थाना में आवेदन दिया गया है।मृतक के परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई के लिए आवेदन दिया है। मामले पर उचित कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का समय और वजह दोनों सामने आ जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इधर गुरुनानक अस्पताल के सचिव दलजीत सिंह ने मरीज के परिजनों के द्वारा लगाए गए सारे आरोप को निराधार बताया।उन्होंने कहा कि मरीज का ऑपरेशन सही सलामत किया गया।इलाज के दौरान उनका ब्रेन डेड (ब्रेन कोमा) हो गया।वेंटिलेटर पर रखा गया।अस्पताल के डॉक्टरों ने काफी प्रयास किया लेकिन बचाया नहीं जा सका।सचिव ने बताया कि पैसों को लेकर झूठा आरोप लगाया गया कि पैसों के लिए शव नहीं दिया जा रहा है।ये सरासर गलत है।मृत्यु के बाद उन्हें बताया गया कि शव ले जा सकते हैं।अस्पताल का बिल ढेड़ लाख से ऊपर हुआ था।परिजनों ने सिर्फ 30 हजार रुपये जमा किये थे।मृत्यु के बाद कोई पैसों की मांग नहीं किया गया।अस्पताल के सचिव ने ये भी बताया कि रात में मृत्यु होने की जानकारी परिजनों को दी गई।उसके बाद परिजनों ने कई लोगों को अस्पताल बुला लिया।सभी तोड़फोड़ करने लगे।अस्पताल में पुरुष और महिला कर्मी से अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा था।उसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।मौके पर चुटिया पुलिस पहुँचीं।उन्होंने कहा पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराया गया है।उन्होनें बताया कि गुरुनानक अस्पताल में सेवा भाव से इलाज किया जाता है ना कि बिज़नेस के लिए।

error: Content is protected !!