Ranchi:ईडी के दो अधिकारियों के खिलाफ एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज…पूछताछ के दौरान मारपीट का आरोप…
राँची।चुटिया निवासी संतोष कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो अधिकारियों पर मारपीट,जानलेवा हमला,गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस मामले में ईडी के अधिकारी प्रतीक और शुभम को नामजद आरोपी बनाया गया है। पेयजल एवं स्वच्छ स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल राँची में शहरी जिला पूर्ति योजना की राशि में से बीस करोड़ रूपए का घोटाले के आरोप में पीएचईडी प्रमंडल राँची में कार्यरत कर्मचारी संतोष कुमार (कैशियर) को पूर्व में राँची पुलिस ने गिरफ्तार किया था। घोटाले के इस मामले की जांच ईडी कर रही है। इधर,संतोष कुमार की ओर से दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, संतोष कुमार को 12 जनवरी को सुबह 10 बजे ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दूरभाष पर दिया गया था। वे सुबह 9.45 बजे ईडी कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि अपराह्न करीब 1.35 बजे सहायक निदेशक प्रतीक ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाया, जहां पहले से शुभम मौजूद थे। पूछताछ के दौरान उनसे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। मना करने पर दोनों अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई और मां-बहन की गालियां दी गईं।
डंडे से हमला करने का आरोप
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने डंडे से हमला किया और जान से मारने की नीयत से लगातार मारते हुए कहा कि अगर मर भी जाओगे तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मारपीट के कारण उनका सिर फट गया और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। संतोष कुमार का आरोप है कि अपराह्न करीब 2 बजे उन्हें सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया, जहां सिर में छह टांके लगाए गए। अस्पताल में भी उन्हें धमकाया गया कि डॉक्टर को चोट लगने की सच्चाई न बताएं, अन्यथा उन्हें और उनके परिवार को जेल भेज दिया जाएगा। प्राथमिकी के अनुसार, अस्पताल से लौटने के बाद उन्हें दोबारा ईडी कार्यालय ले जाया गया, जहां साक्ष्य मिटाने की नीयत से जबरन खून से सनी टी-शर्ट उतरवाकर नई टी-शर्ट पहनाई गई। आरोप है कि इसके बाद उनसे इंसिडेंट रिपोर्ट लिखे एक कागज पर जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए, जिसे उन्हें पढ़ने तक नहीं दिया गया।
16 जनवरी को दोबारा उपस्थिति होने के लिए जबरन लिखवाया आवेदन
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे 16 जनवरी को दोबारा ईडी कार्यालय में उपस्थित होने से संबंधित आवेदन जबरन लिखवाया गया और रात 10.45 बजे तक उन्हें कार्यालय में रोके रखा गया, ताकि वे घटना की सूचना अपने परिवार, अधिवक्ता, थाना या मीडिया को न दे सकें। छोड़ते समय भी उन्हें और उनके परिवार को जेल भेजने की धमकी दी गई। इधर एयरपोर्ट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

