सीडीएस अनिल चौहान का राँची दौरा, छात्रों को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए किया प्रोत्साहित..
राँची।चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान गुरुवार को राँची पहुंचे। इस दौरान स्कूली बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि एकमात्र जगह फौज ही है, जहां कोई भाई-भतीजावाद नहीं है।सीडीएस अनिल चौहान ने बच्चों को देश सेवा के लिए सशस्त्र बलों में शामिल होने की बात कही। साथ ही कहा कि इस साल देश के सशस्त्र बलों ने ही प्राकृतिक आपदाओं में देश के नागरिकों को बचाने का हर संभव प्रयास किए हैं।नौनिहालों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग देश सेवा करना चाहते हैं या फिर देश-दुनिया की खोज करना चाहते हैं, तो उन्हें सशस्त्र बलों में शामिल होने का मन बनाना चाहिए।
सीडीएस अनिल चौहान ने राँची में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताया कि 7 मई को हमने जिन आतंकवादी ठिकानों को चुना था, उन पर हमने रात 1:00 से 1:30 बजे के बीच हमला किया। हमने रात 1:30 बजे ही हमला क्यों किया? वह सबसे अंधेरे वाला समय होता है, उस समय सैटेलाइट तस्वीरें, फोटो खींचना और सबूत इकट्ठा करना सबसे मुश्किल होगा। फिर भी, हमने रात 1-1:30 बजे के बीच हमला किया। ऐसा क्यों था? इसके दो कारण थे।उन्होंने आगे कहा कि पहला, हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा था कि हम रात में भी तस्वीरें (इमेजरी) ले पाएंगे और दूसरा महत्वपूर्ण कारण था कि हम नागरिकों को किसी भी तरह के खतरे से बचाना चाहते थे। हमला करने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:30 से 6:00 बजे के बीच होता, जब दिन की रोशनी शुरू होती है, लेकिन उस समय पहली अजान या पहली नमाज होती है। बहावलपुर और मुरीदके में उस समय बहुत आवाजाही हो सकती थी, इसलिए कई नागरिक मारे जा सकते थे। हम उससे बचना चाहते थे, इसीलिए हमने 1:00 से 1:30 बजे के बीच का समय चुना।उन्होंने यह भी कहा कि लंबी दूरी के लक्ष्यों पर सटीक निशाने के साथ हमला करने के लिए खास कोशिशों की आवश्यकता की दरकार होती है।
बता दें 19 से 21 सितंबर तक राँची के खेलगांव में ईस्टर्न टेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव आयोजित हो रहा है।यह आयोजन भारतीय सेवा के पूर्वी कमान मुख्यालय और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के सहयोग से कराया जा रहा है।कॉन्क्लेव में भाग लेने के लिए देश की तीनों सेनाओं के अध्यक्ष सीडीएस अनिल चौहान गुरूवार को राँची पहुंचे। एयरपोर्ट पर वेटरन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ झारखण्ड के भूतपूर्व सैनिकों ने उनका स्वागत किया।उनके आगमन पर भारत माता की जयघोष के बीच तीनों सेना के अध्यक्ष का लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
“आज भारत रक्षा प्रणाली के क्षेत्र में दुनिया में नंबर वन पर हैं। इसकी नकल करने के लिए कई देश आगे आए हैं लेकिन हमारा देश काफी आगे निकल चुका है”:एनपी सिन्हा, सचिव, वेटरन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ झारखण्ड
इस दौरान पूर्व सैनिक संगठन के प्रवक्ता संजय सिंह ने बताया कि सीडीएस अनिल चौहान तीन दिवसीय दौरे पर हैं, उनके स्वागत के लिए झारखण्ड के 41 हजार पूर्व सैनिक तत्पर हैं।
झारखण्ड में पहली बार आयोजित होगा ईस्ट टेक
झारखण्ड में पहली बार आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय ईस्ट टेक में स्पेस टेक्नोलॉजी, एआई, साइबर सिक्युरिटी, रोबोटिक्स जैसे विषयों पर विस्तार से विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे। उदघाटन के मौके पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उपस्थित होने की संभावना है हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
क्षेत्रीय औद्योगिक भागीदारी को बढ़ावा
बता दें कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और क्षेत्रीय औद्योगिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2022 में पहला ईस्ट टेक गुवाहाटी में आयोजित किया गया था। उसके बाद 2023 में शिलांग और 2024 में कोलकाता में आयोजित किया गया।राँची के खेलगांव स्थित विश्वनाथ शाहदेव स्टेडियम में आयोजित होने वाले ईस्ट टेक 2025 में 200 से अधिक रक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े विक्रेता भाग लेंगे, जिसमें 50 से अधिक एमएसएमई और स्टार्टअप्स शामिल होंगे।
सेना से जुड़ी विभिन्न सामानों की लगाई जाएगी प्रदर्शनी
इसके अलावा डीआरडीओ और प्रमुख निजी उद्योग भाग लेंगे।इस कार्यक्रम में सेना के उपकरणों का लाइव प्रदर्शन, टेक्नोलॉजी और सेना से जुड़े विभिन्न सामानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जो देश के सैन्य शक्ति को प्रदर्शित करेगी।

