चिड़ियाघर में 21 वर्षीय जिराफ शांति का निधन, बर्ड फ्लू के चलते वन्यजीवों का आहार बदला
पटना। बिहार के पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान में मादा जिराफ ‘शांति’ की मौत हो गई। 21 वर्षीय शांति को वर्ष 2006 में अमेरिका के सैन डियागो जू से वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत पटना लाया गया था। जू प्रशासन के अनुसार, उसकी मृत्यु का प्रारंभिक कारण गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न जटिलताएं मानी जा रही हैं। सटीक कारणों की पुष्टि के लिए सैंपल विशेषज्ञ संस्थानों को भेजे गए हैं।जू अधिकारियों ने बताया कि शांति ने वर्ष 2011 में पटना जू में अपने पहले शावक ‘नव्या’ को जन्म दिया था। इसके बाद 2011 से 2023 के बीच उसने छह शावकों को जन्म दिया। उसके बच्चों को संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के तहत नंदनकानन, भुवनेश्वर, गुवाहटी और मैसूर जैसे चिड़ियाघरों में भेजा गया। वर्तमान में उसके दो शावक—अमन और नंदनी पटना जू में ही हैं।
शांति की मौत से पटना जू में शोक का माहौल है। वह न सिर्फ दर्शकों के बीच लोकप्रिय थी, बल्कि जिराफ प्रजाति के संरक्षण में उसकी भूमिका को भी अहम माना जाता था। जू प्रशासन ने उसके केयर और इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी है।इसी बीच बर्ड फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए पटना जू प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। हालांकि शांति की मौत का बर्ड फ्लू से कोई सीधा संबंध नहीं बताया गया है, फिर भी जू प्रबंधन किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहता।
एहतियात के तौर पर मांसाहारी वन्यजीवों को दिए जाने वाले चिकन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 50 किलो चिकन की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब उसकी जगह गिनी पिग को आहार के रूप में शामिल किया गया है। यह गिनी पिग विशेष रूप से लखनऊ से मंगाया जा रहा है।
जू परिसर में नियमित रूप से चूना और रासायनिक कीटाणुनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। पक्षियों के पिंजरों, प्रवेश द्वारों और वाहनों के टायरों तक को सैनिटाइज किया जा रहा है। जू प्रशासन का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

