दारोगा का जिससे था विवाद,उसे फर्जी केस में फंसाया,एसपी के निर्देश पर जांच हुई तो झूठी रिपोर्ट की पोल खुल गई…दरोगा सस्पेंड..

 

राँची।झारखण्ड पुलिस में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। एक दरोगा का जिस व्यक्ति के परिवार के साथ जमीन को लेकर बीते तीन दशकों से विवाद चल रहा था, उसे अफीम की खेती के आरोप में बदले की भावना से आरोपी बना दिया। पीड़ित व्यक्ति के भाई ने जब मामले की शिकायत की, तब खूंटी एसपी ने पूरे मामले की जांच एसडीपीओ खूंटी से करायी तो सनसनीखेज खुलासा हुआ। खूंटी एसपी ने जानबूझकर कर्तव्य में लापरवाही, पद के दुरुपयोग व पुलिस की छवि धूमिल करने के आरोप में दरोगा रामसुधीर सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं पूरे मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय को जांच रिपोर्ट भेजी है।

क्या है मामला:

दरअसल,झारखण्ड के खूंटी जिले के सायको थाने में दरोगा रामसुधीर सिंह अफीम की खेती से जुड़े केस 13/25 के अनुसंधान पदाधिकारी थे। इस केस में लाखा पाहन नाम का व्यक्ति मुख्य आरोपी है। जांच के क्रम में लाखा पाहन की स्वीकारोक्ति में रामसुधीर सिंह ने लिख दिया कि लाखा पाहन और अमरेंद्र कुमार की मुलाकात सितंबर 2024 में सायको बाजार में हुई। मुलाकात के दौरान अफीम की खेती के लिए लाखा को 25 हजार रुपये दिए। जिसके बाद लाखा ने दुरूडीह में अफीम की खेती की। पुलिस डायरी में अनुसंधान पदाधिकारी ने लिखा कि अमरेंद्र के लालच में लाखा पाहन ने खेती की।

जांच में क्या आया:

अमरेंद्र कुमार को आरोपी बनाए जाने के बाद उनके भाई मृत्युंजय कुमार ने डीजीपी अनुराग गुप्ता और खूंटी एसपी को आवेदन दिया। आवेदन के आधार पर खूंटी एसपी ने एसडीपीओ से जांच करायी। जिसमें यह बात सामने आयी कि रामसुधीर सिंह की उनके पिता के साथ वर्ष 1996 से दुश्मनी थी। तब रामसुधीर सिंह के परिवार के सदस्यों के खिलाफ अमरेंद्र कुमार के पिता ने बेगूसराय के बलिया थाने में केस दर्ज कराया था। इसी दुश्मनी का बदला लेने के उदेश्य से रामसुधीर सिंह ने बेगूसराय के बलिया निवासी अमरेंद्र कुमार को फर्जी केस में फंसा दिया। सीडीआर जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई कि अमरेंद्र कुमार ना तो कभी खूंटी या सायको आए हैं और ना ही लाखा पाहन ही कभी बेगूसराय गया था। दोनों एक-दूसरे के परिचित भी नहीं थे। केस डायरी में भी की गड़बड़ी जब रामसुधीर सिंह को लगने लगा कि उसकी गलती पकड़ी जाएगी, तब उसने अमरेंद्र कुमार को फंसाने का पूरा दोष लाखा पाहन पर मढ़ने की कोशिश की। उसने केस डायरी में लिखा कि लाखा पाहन बेगूसराय में अमरेंद्र कुमार के घर का कामकाज करता था। पैसे को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, इसी वजह से लाखा पाहन ने स्वीकारोक्ति बयान में अमरेंद्र कुमार का नाम लिया, जबकि एसडीपीओ ने जांच में पाया कि लाखा पाहन कभी बिहार गया ही नहीं।इस तरह जांच में दरोगा की झूठी रिपोर्ट की पोल खुल गई।जानकारी के अनुसार,दरोगा दो तीन महीने में रिटायर्ड भी होने वाले हैं।

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