Ranchi:सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामले में आदिवासी संगठनों का आक्रोश मार्च, सीबीआई जांच की मांग

 

राँची।राजधानी राँची में सूर्या हांसदा के कथित एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का गुस्सा चरम पर है।भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और झारखण्ड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेकेएलएम) सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे फर्जी एनकाउंटर और राजनीतिक हत्या करार दिया है।विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी इस मुठभेड़ को सुनियोजित हत्या बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। आज 23 अगस्त 2025 को राँची के शहीद चौक से राजभवन तक भारी बारिश के बीच निकाले गए आक्रोश मार्च में हजारों लोग शामिल हुए, जिन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

आदिवासी संगठनों और बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सूर्या हांसदा कोई अपराधी नहीं थे, बल्कि जल, जंगल, जमीन की रक्षा करने और समाज में शिक्षा का प्रसार करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता थे। आक्रोश मार्च में शामिल केंद्रीय सरना समिति और अन्य आदिवासी संगठनों के नेताओं ने कहा कि गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ इलाकों में खनन माफियाओं के इशारे पर पुलिस ने सूर्या की हत्या की है।वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब भी कोई सामाजिक या राजनीतिक कार्यकर्ता समाज हित में आवाज उठाता है, तो उस पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।क्या ऐसे में उसे अपराधी करार कर हत्या कर दी जाएगी?

आक्रोश मार्च में शामिल नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि “अबुआ राज” का नारा देने वाली सरकार में आदिवासियों की आवाज को दबाने की साजिश हो रही है। उन्होंने दावा किया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का श्राद्धकर्म भी पूरा नहीं हुआ था और राज्य शोक में डूबा था,तभी पुलिस ने उभरते आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की सुनियोजित हत्या कर दी। मार्च में बीजेपी से जुड़े आदिवासी नेताओं ने भी हिस्सा लिया और सरकार पर निशाना साधा।

बता दें गोड्डा पुलिस के अनुसार, सूर्या हांसदा को 10 अगस्त 2025 को देवघर के नवाडीह गांव से गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन, 11 अगस्त को बोआरीजोर थाना क्षेत्र के कमलडोर पहाड़ के पास कथित मुठभेड़ में उसे मार गिराया गया। पुलिस का दावा है कि सूर्या ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में उसे गोली मारी गई।हालांकि, सूर्या के परिजनों और स्थानीय लोगों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है। सूर्या की मां और पत्नी ने आरोप लगाया कि उनकी तबीयत खराब थी और वह भागने की स्थिति में नहीं थे।

बीजेपी ने इस मामले को फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में सात सदस्यीय जांच टीम गठित की थी, जो 17 अगस्त को सूर्या के गांव डकैता, ललमटिया पहुंची और परिजनों से मुलाकात की। टीम ने सूर्या के शव का दोबारा पोस्टमार्टम और सीबीआई जांच की मांग की है।बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह जन सरोकार की आवाज को दबाने की साजिश है और हाईकोर्ट के सिटिंग जज या सीबीआई से जांच होनी चाहिए।

वहीं,जेकेएलएम के विधायक जयराम महतो ने भी इसे सुनियोजित हत्या बताया और कहा कि सूर्या के शव पर चोट और जलने के निशान साफ दर्शाते हैं कि यह फर्जी एनकाउंटर था।विधानसभा के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गूंजा, जहां एनडीए विधायकों ने सीबीआई जांच की मांग को जोर-शोर से उठाया।

आज 23 अगस्त को शहीद चौक से राजभवन तक निकाले गए आक्रोश मार्च में केंद्रीय सरना समिति, जय आदिवासी केंद्रीय परिषद और अन्य संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए।भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग मार्च में जुटे। प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग की गई। संगठनों ने दावा किया कि सूर्या हांसदा 350-500 बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने वाला स्कूल चलाते थे और आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ते थे।

आदिवासी संगठनों और बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सूर्या हांसदा ने अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके कारण खनन माफियाओं और पुलिस की साठगांठ से उनकी हत्या की गई। राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि हेमंत सोरेन सरकार आदिवासियों की हितैषी होने का ढोंग करती है, लेकिन अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी है, जिसका नेतृत्व दुमका रेंज के डीएसपी और सुपरविजन डीआईजी चंदन कुमार झा कर रहे हैं।हालांकि, बीजेपी और आदिवासी संगठनों ने सीआईडी जांच पर भरोसा जताने से इनकार किया है।उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई या हाईकोर्ट के सिटिंग जज की कमेटी ही उपयुक्त है

सूर्या हांसदा बोरियो विधानसभा क्षेत्र से चार बार (2009, 2014, 2019, 2024) अलग-अलग दलों (बीजेपी, जेवीएम, जेकेएलएम) से चुनाव लड़ चुके थे।वह अपने गांव में गरीब और आदिवासी बच्चों के लिए मुफ्त स्कूल चलाते थे, जिसमें 350-500 बच्चे पढ़ते थे। उनके खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, अपहरण और वसूली जैसे आरोप शामिल थे, लेकिन परिजनों और समर्थकों का दावा है कि ये मामले उनकी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता को दबाने के लिए दर्ज किए गए थे।

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