सीआईडी के हत्थे चढ़ा साइबर अपराध के लिए मानव तस्करी करने वाला अपराधी , इंटरनेशनल साइबर स्लेवरी के तहत दर्ज हुआ था मामला…
राँची।झारखण्ड सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में जमशेदपुर में छापेमारी कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।जमशेदपुर का रहने वाला सरताज आलम बेरोजगार नौजवानों को नौकरी का झांसा देकर उन्हें विदेश भेज कर साइबर ठगी काम करवाता था।साइबर ठगी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी करने वाले गिरोह में शामिल सरताज आलम को सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच ने जमशेदपुर से गिरफ्तार कर लिया है। साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आरोपी युवाओं को बैंकॉक के केके पार्क में स्थित साइबर स्कैम कंपाउंड में मानव तस्करी कर भेजता था, जहां उन्हें जबरन ऑनलाइन ठगी में झोंक दिया जाता था।
यह गिरोह टेक्निकल रूप से दक्ष बेरोजगार युवकों को अपना निशाना बनाता था।बेरोजगार युवकों को बैंकॉक में बेहतरीन नौकरी का झांसा देकर ले जाया जाता था, लेकिन जब बेरोजगार युवक बैंकॉक पहुंचते थे तब उनसे साइबर ठगी का काम करवाया जाता था।मामले में सरताज आलम को जमशेदपुर पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया गया।
जांच में यह भी पता चला कि सरताज आलम विदेशी सहयोगियों के साथ मिलकर झारखंड में नौकरी तलाशने वाले युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी का लालच देता था। विदेश पहुंचाने के बाद उन्हें निवेश घोटाले, डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर ठगी के लिए मजबूर किया जाता था।
सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार सीआईडी के साइबर क्राइम थाने में 9 दिसंबर 2025 को कांड संख्या 154/25 दर्ज किया गया था। यह मामला बीएनएस की धाराओं 127 (4), 137, 140 (3), 143, 308 (2), 61 (2) तथा आईटी एक्ट की धाराओं 66 (8), 60 (C), 56(D) और इमिग्रेशन एक्ट की धारा 10/24 के तहत दर्ज था।
बेरोजगार युवकों को इस तरह फंसाता था
●Unauthorised agents द्वारा युवाओं से संपर्क कर उन्हें बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस और थाईलैंड में डाटा एंट्री सहित अन्य नौकरियों का प्रस्ताव दिया जाता था।
●वीजा और टिकट के नाम पर धनराशि जमा कराई जाती थी।
●विदेश पहुंचने पर युवाओं को स्वीम सेंटर के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता था।उन्हें व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल अकाउंट बनाकर संभावित विदेशी नागरिकों से संपर्क करने का निर्देश दिया जाता था।
●व्हाट्सएप चैट के माध्यम से आकर्षक निवेश प्रस्ताव देने, उनसे फर्जी निवेश ऐप वेबसाइट के लिंक भेजने की लिए मजबूर किया जाता था।
●पीड़ित विदेशी नागरिकों को विभिन्न खातों में धन जमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता था।
●भारत से तस्करी कर ले जाए गए व्यक्तियों को लंबे समय तक कठोर परिस्थितियों में काम करने के लिए बाध्य किया जाता था। उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता था और स्वीम सेंटर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी।
झारखण्ड पुलिस की ओर से बेरोजगार युवकों को अलर्ट भी किया गया है। झारखण्ड पुलिस ने अपील की है कि विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर कार्यरत अनाधिकृत एजेंटों से सावधान रहें।किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं।

